क्या सच में कुएं में घुल गई है भांग…

जाहिर है यह भ्रष्टïचारियों को बचाने की सरकारी रणनीति का एक बड़ा उदाहरण था। सरकार किस तरह बेइमानों को बचाती है, बदायूं घूसकांड इसका जीता जागता उदाहरण है। सीएम के सामने हमेशा स्वास्थ्य मंत्री अपनी ईमानदारी का बखान करते रहते हैं।

sanjay sharma editor5मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि भ्रष्टïाचार की जड़ें इतनी गहरी होंगी कि पूरा तंत्र ही बेबस नजर आयेगा। मगर जिस तरह बदायूं में घूसकांड सामने आया और उसके बाद नेताओं और अफसरों की खामोशी सामने आयी, उसने साबित कर दिया कि सिस्टम में सुधार असंभव है। भ्रष्टïाचारियों का साम्राज्य इतना बड़ा है कि उसकी चपेट में हर कोई आ जाता है। पैसे की ताकत ने एक बार फिर दिखा दिया कि भ्रष्टïाचार के आगे हर कोई बेबस है। घूस लेने वाले सीना तान कर कह रहे हैं कि हमारा क्या बिगाड़ लिया। जाहिर है यह भष्टïाचार की ऐसी गंगा है जिसमें सब डुबकी लगाना चाहते हैं।
भ्रष्टïाचार का यह मामला बदायूं में घटा। वहां के सांसद धर्मेंद्र यादव सीएम के भाई हैं। इस लिहाज से यह वीवीआईपी जिला माना जाता है। यहां के सीएमओ ने सभी डॉक्टरों से नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन के नाम पर बड़ी घूस हासिल की और जब नगर विधायक ने दबाव बनाया तो उनके सामने ही यह घूस वापस कर दी गई। जिला निगरानी समिति में दो सांसदों और चार विधायकों के सामने सीएमओ ने स्वीकार किया कि हां घूस ली गई थी मगर यह घूस वापस कर दी गई।
सभी का अंदाजा था कि इस मामले में दोषी सीएमओ जेल जायेंगे और सरकार भ्रष्टïाचारियों को साफ संदेश देगी कि भ्रष्टïाचारियों का ठिकाना जेल ही है। मगर अप्रत्याशित रूप से जिस तरह से इस भ्रष्टï सीएमओ का सबने बचाव किया वह सबको हैरत में डालने वाला था। घटना के तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जाहिर है यह भ्रष्टïाचारियों को बचाने की सरकारी रणनीति का एक बड़ा उदाहरण था। सरकार किस तरह बेइमानों को बचाती है, बदायूं घूसकांड इसका जीता जागता उदाहरण है। सीएम के सामने हमेशा स्वास्थ्य मंत्री अपनी ईमानदारी का बखान करते रहते हैं। मगर जब उनकी पार्टी के ही विधायक ने यह रिश्वत वापस करवाई और उनके सीएम के सांसद भाई के सामने ही सीएमओ ने रिश्वत लेना स्वीकार किया फिर भी कोई कार्रवाई न होना इस बात का सीधा उदाहरण है कि भ्रष्टïाचारियों को उनका संरक्षण मिला हुआ है।
यह बेहद दु:खद हालात हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवायें वैसे ही चरमराई हुई हैं। ऐसे में अगर इस विभाग में भी भ्रष्टïाचार का ऐसा ही नंगा नाच खेला जायेगा तो फिर न्याय की आशा किससे की जा सकेगी। पता नहीं कब यह बेइमानी का सिलसिला खत्म होगा।

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