क्या बनेगी बात?

  • सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पीयूष गोयल के बीच बिजली मुद्दे पर
  • उत्तर प्रदेश में बिजली की भारी किल्लत / बिजली उत्पादन यूनिट को नहीं मिल पा रहा कोयला
  • पूर्व में अखिलेश यादव और पीयूष गोयल के बीच रहा है छत्तीस का आंकड़ा

गवर्नर की पहल के बाद हो रही मुलाकात
– 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

WER8लखनऊ। केन्द्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल सोमवार को भारी भरकम लाव लश्कर के साथ यूपी पधार रहे हैं। सबसे पहले वह प्रधानमंत्री के क्षेत्र बनारस जाएंगे और उसके बाद 5 कालीदास मार्ग पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ बैठक कर भोजन ग्रहण करेंगे। जाहिर सी बात है कि पीयूष गोयल की आमद उत्तर प्रदेश की बिजली समस्या को लेकर है। इस होने वाली अहम बैठक में तय होगा कि यूपी को केन्द्रीय सरकार की तरफ से क्या सौगातें मिलने वाली हंै। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कई बार चिटठी लिखकर इस दिशा में बिजली मंत्री से मांग कर चुके हैं। यहीं नहीं यूपी में लगने वाले नये बिजली घरों और चल रहे बिजली उत्पादन यूनिटों के लिए कोयला आपूर्ति पर भी बात होगी और तय हो जाएगा कि यूपी के हिस्से में कितना कोयला आने वाला है। ध्यान रहे कि यूपी में बिजली उत्पादन और कन्जम्पशन में भारी अंतर है। उत्तर प्रदेश को 12 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली की जरूरत है। लेकिन इसके बरअक्स यूपी में सिर्फ हजार मेगावाट का बिजली उत्पादन हो पा रहा है। ऐसे में बिजली मंत्री के साथ मुख्यमंत्री की इस बैठक को अहम माना जा रहा है।
यूपी का दंगल/ बिजली पर सियासत
उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र के होने वाले दंगल में बिजली एक अहम मुददा बनेगा। मोदी सरकार हो या फिर अखिलेश सरकार। गुड
गवर्नेंस का वायदा कर मुखिया की गददी पर बैठे हैं। ऐसे में जनता तो बस यही देख रही है कि उसके हिस्से की मिलने
वाली मूलभूत सुविधाएं उसे कब से मिलने लगेगी।
गौरतलब है कि एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रही केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार के बीच इस मुददे को लेकर तनातनी रही है। अखिलेश यादव और पीयूष गोयल के बीच भी छत्तीस का आंकड़ा बताया जाता है। ऐसे हालात में यूपी के राज्यपाल राम
नाईक ने बीच की कड़ी बनते हुए दोनों लोगों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई
और इस मीटिंग को आहूत कराया। अब देखना यह होगा कि इस बैठक के बाद यूपी को बिजली मिलना शुरू होगी या
फिर सिर्फ अगली बैठक की तिथि निर्धारित होगी। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के शहरी इलाके हो या फिर ग्रामीण इलाके कहीं भी रोस्टर के हिसाब से बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
सीएमएस के खिलाफ फूटा गुस्सा
-4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। 6 अप्रैल से यूपी सरकार के खिलाफ बगावत पर आमादा सिटी मांटेसरी स्कूल के खिलाफ आज लोगों का गुस्सा फूंट पड़ा। दरअसल यूपी में इस वर्ष से राईट टू एजूकेशन एक्ट लागू हुआ है। इस एक्ट की धारा 12 के तहत पब्लिक स्कूलों में 25 फीसदी गरीब बच्चों के एडमिशन होने हैं। बाकी के सभी स्कूलों ने तो न नुकर के बाद बच्चों को भर्ती कर लिया है लेकिन डान बना सिटी मांटेसरी स्कूल गरीबों के वास्ते अपने स्कूल में शिक्षा के रास्ते खोलने के लिए तैयार नहीं है। सीएमएस में 31 गरीब बच्चों को फ्री में एजूकेशन मिलने का रास्ता सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ने खोला है।
नहीं बढऩे दिया आगे
सीएमएस में गरीब बच्चों के एडमिशन की जंग 6 अप्रैल, 2015 से जारी है। स्कूल प्रबंधन कभी एडमिशन के लिए राजी होता है और जब पैरेंटस वहां औपचारिकता पूरी करने के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें वहां से भगा दिया जाता है। आखिरकार इन गरीब बच्चों के मां बाप का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने मैग्सेसे अवार्ड विजेता संदीप पाण्डेय की अगुवाई में रायल होटल चैराहा से रैली निकालकर अपना विरोध दर्जन कराया। पहले से तय कार्यक्रम में यह लोग सीएमएस स्टेशन रोड पर एक घंटे तक शांतिपूर्वक धरना-प्रर्दशन करना चाहते थे।

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