क्या बदनाम खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के घोटालों की जांच कर पायेंगे नए लोकायुक्त!

नए लोकायुक्त के सामने गायत्री के कारनामों की जांच एक बड़ा मुद्दा
मौजूदा लोकायुक्त ने गायत्री को बचाने के लिए किया दिन-रात एक
हाईकोर्ट ने भी जताई हैरानी, लोकायुक्त से किया जवाब-तलब
नए लोकायुक्त के शपथ लेते ही गायत्री के कारनामों की शिकायत करने की तैयारी

J1संजय शर्मा
लखनऊ। नए लोकायुक्त के नाम के साथ राजनैतिक गलियारों और नौकरशाही में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि तेज तर्रार छवि के नए लोकायुक्त जस्टिस वीरेन्द्र सिंह क्या यूपी सरकार के बदनाम खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के कारनामों की ईमानदारी से जांच कर पायेंगे या फिर हर बार की तरह गायत्री प्रजापति इस बार भी अपना जादू चलाने में कामयाब हो जायेंगे। गायत्री प्रजापति को बचाने के चक्कर में लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा अपनी खासी किरकिरी करा चुके हैं। हालात इतने खराब हो गए कि हाइकोर्ट को भी अपने पूर्व जज एनके मेहरोत्रा के कारनामों पर टिप्पणी करनी पड़ी। हाईकोर्ट ने लोकायुक्त को नोटिस जारी करके गायत्री के मामले में रिपोर्ट मांगी है। अब देखना यह है कि जस्टिस वीरेन्द्र सिंह इस मामले में ईमानदारी से अपनी रिपोर्ट देंगे या फिर चलते-चलते अपने नमक का हक अदा करने के लिए एनके मेहरोत्रा अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में गायत्री के पक्ष में रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेज देंगे।
लोकायुक्त कार्यालय में अगर कोई मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना तो वह गायत्री का ही मामला था। जब पहली बार गायत्री के खिलाफ ओम शंकर द्विवेदी ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी तो हंगामा मच गया था। शिकायतकर्ता ने गायत्री के कारनामों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की थी। कुछ ही दिन में यह शिकायतकर्ता पलट गया और अपनी शिकायत वापस ले ली। लोगों के बीच इस बात की चर्चा रही कि इस शिकायत को वापस लेने के लिए शिकायतकर्ता को करोड़ों रुपये की घूस दी गई। इसके कुछ समय बाद ही आईजी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने लोकायुक्त के यहां साक्ष्य लगाकर मंत्री गायत्री प्रजापति की शिकायत की और कहा कि प्रदेश भर में अवैध खनन करके गायत्री प्रजापति और उनके परिजनों तथा मित्रों ने हजारों करोड़ की संपत्ति बना ली है। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह शिकायत उन्हें कितनी भारी पडऩे वाली है। शुरूआत में तो उन्हें समझाया और धमकाया गया कि वह अपनी शिकायत वापस ले लें, मगर जब अमिताभ ठाकुर इसके लिए तैयार नहीं हुए तो उन्हें समझाने की दूसरी तरकीबें भी इस्तेमाल की गई। अमिताभ ठाकुर पर एक महिला ने बलात्कार का आरोप भी लगा दिया। अमिताभ ठाकुर का कहना था कि यह आरोप भी गायत्री प्रजापति की एक चाल थी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि लोकायुक्त मेहरोत्रा ने आनन-फानन में गायत्री को क्लीन चिट दे दी, जिसके बाद नूतन ठाकुर हाईकोर्ट गई। हाईकोर्ट ने पूरी पत्रावली देखकर हैरानी जाहिर की और लोकायुक्त को नोटिस देकर तीन सप्ताह में जवाब मांगा। कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि लोकायुक्त ने गायत्री प्रजापति से जुड़े लोगो के पैसे के सोर्स के बारे में अग्रिम जांच नहीं की। इन तमाम मामलों में खबर छपने से बौखलाए गायत्री के गुर्गों ने 4पीएम के हॉकर पर भी हमला कर दिया था।

नए लोकायुक्त को दूंगी घोटाले के और सबूत: नूतन

सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने कहा है कि वह गायत्री प्रजापति से जुड़े हुए खनन के कई और मामलों की जानकारी लोकायुक्त को देंगी। उन्होंने कहा कि जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने जिस तरह आनन-फानन में गायत्री को बचाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया उसने इस पद की गरिमा को भी कलंकित कर दिया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य देने के बावजूद लोकायुक्त मेहरोत्रा ने उन साक्ष्यों पर ध्यान देना भी जरूरी नहीं समझा। अब यह बात हर कोई समझ सकता है कि हजारों करोड़ के मालिक गायत्री आखिर सबको मैनेज कैसे कर लेते हैं।

गायत्री के लिए अपनी साख गवां दी मेहरोत्रा ने

यादव सिंह को भ्रष्टïाचार के मामले में क्लीन चिट देने वाले हाईकोर्ट के जस्टिस रहे एनके मेहरोत्रा ने गायत्री को बचाने के लिए अपनी साख ही दांव पर लगा दी। मायावती सरकार में कई मंत्रियों के खिलाफ जांच करके उन्हें बर्खास्त करवाने वाले मेहरोत्रा की सारी हेकड़ी गायत्री प्रजापति के सामने निकल गई। सभी लोग आपस में चर्चा करने लगे कि आखिर मंत्री गायत्री ने लोकायुक्त मेहरोत्रा पर ऐसा क्या जादू कर दिया कि वह गायत्री गान में ही जुट गए। हालत यहां तक हुई कि गायत्री के खिलाफ शिकायत करने वाली नूतन ठाकुर के खिलाफ ही उन्होंने कार्रवाई के लिए कह दिया।

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