क्या गुजरात में सियासी जमीन तैयार कर सकेंगे केजरीवाल?

केजरीवाल के लिए यहां सत्ता की डगर आसान नहीं होगी क्योंकि यहां की राजनीति दिल्ली से अलग है। जातीय समीकरण यहां काम आते हैं। विरोधी दल केजरीवाल पर उनके विधायकों की गतिविधियों को लेकर घेरेंगे। केजरीवाल को यह भी सोचना चाहिए कि आज केवल उनकी छवि से वोट नहीं मिलेंगे जैसा कि उन्होंने दिल्ली में चमत्कार दिखाया था। केवल पटेलों को एकजुट कर वे अन्य वर्गों से कट जाएंगे।

sanjay sharma editor5आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। यहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल में केजरीवाल ने यहां ताबड़तोड़ रैलियां कीं। भाजपा व कांग्रेस पर हमले किए और पटेल समुदाय पर डोरे डाले। सवाल यह है कि क्या केजरीवाल की रैलियां सत्ताधारी भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के अरमानों पर पानी फेर सकेंगी? क्या आप की मौजूदगी भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए खतरे की घंटी है? क्या दिल्ली में वादों की झड़ी लगाकर सत्ता में आए केजरीवाल यहां की जनता के रुख को भांपकर गुजरात में विकल्प की जमीन हमसार कर रहे हैं? क्या केजरीवाल यहां पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल के साथ गठबंधन कर सत्ता की चाबी अपने पास रखना चाहते हैं? दरअसल, मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात में कई घटनाक्रम हुए। पटेल आंदोलन ने भाजपा को हिला दिया। भाजपा भी मानती है कि पटेल आरक्षण आंदोलन और इससे निपटने के तरीके से पार्टी को खासा नुकसान हुआ है। वहीं, एक वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद हार्दिक पर देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया। पटेल को कई महीने जेल में काटने पड़े। मामला बिगड़ता देख उस समय भाजपा ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रूपानी को गुजरात की कमान सौंपी गई। केजरीवाल इसी का फायदा उठाना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने पटेलों की दुखती रग पर हाथ रखा। केजरीवाल जानते हैं कि यदि पटेल उनके पक्ष में खड़े हो गए तो यहां सत्ता में उनकी पार्टी की भागीदारी का रास्ता आसान हो जाएगा। उन्होंने अपनी रैलियों में पटेल आरक्षण आंदोलन का मुद्दा उठाया। हार्दिक को सबसे बड़ा देशभक्त करार दिया। हार्दिक ने भी अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने का संकेत केजरीवाल को दिया है। उन्होंने केजरीवाल से पूछा है कि यदि वे गुजरात में सत्ता में आते हैं तो पटेल समुदाय के लिए क्या करेंगे? बावजूद केजरीवाल के लिए यहां सत्ता की डगर आसान नहीं होगी क्योंकि यहां की राजनीति दिल्ली से अलग है। जातीय समीकरण यहां काम आते हैं। विरोधी दल केजरीवाल पर उनके विधायकों की गतिविधियों को लेकर घेरेंगे। केजरीवाल को यह भी सोचना चाहिए कि आज केवल उनकी छवि से वोट नहीं मिलेंगे जैसा कि उन्होंने दिल्ली में चमत्कार दिखाया था। केवल पटेलों को एकजुट कर वे अन्य वर्गों से भी कट जाएंगे। पटेलों का एक तबका आज भी भाजपा से जुड़ा है। यहां कांग्रेस का अपना वोट बैंक है। लिहाजा केजरीवाल को गुजरात के सत्ता की चाबी चाहिए तो उन्हें बड़ी मशक्कत करनी होगी।

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