क्या गरीब नहीं पढ़ सकते अच्छे स्कूलों में

हिना खान
Captureलखनऊ। आरटीई के तहत जिन गरीब बच्चों का प्रवेश सीएमएस में होना था वे आज भी प्रवेश से वंचित हैं। कोर्ट में यह मामला पहुंचने के बाद अभी तक इसकी तारीख निर्धारित नहीं की गयी है। इसके कारण 31 बच्चों का भविष्य अंधकार में है। सीएमएस के जिम्मेदारों ने कोर्ट में केस कर इस मामले को अटका रखा है।
सरकार ने गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए आरटीई के तहत कई नामी स्कूलों में ऐसे बच्चों का प्रवेश लेने के लिए निर्देश जारी किया था। कई स्कूलों ने सरकार के निर्देश को पूरा किया लेकिन सीएमएस ने ऐसे बच्चों को प्रवेश नहीं दिया। दूसरी तरफ बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों के मासूम सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
जब 4 पीएम संवाददाता ने इन अभिभवकों से बात की तो उन्होंने अपनी सारी परेशानियां बयां की। इस पूरे मसले की भुक्तभोगी रीना का कहना है कि बच्चे दिन भर एक ही सवाल करते हैं कि हम स्कूल कब जायेंगे। हमने तो बच्चों को बहलाने के लिए कह रखा है कि अभी गर्मी की छुट्टïी चल रही है। दु:ख होता है कि हम बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं।
वहीं संध्या का कहना है कि इस योजना के शुरू होने पर खुशी हुई थी कि अब हम अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजेंगे। यह एक सपने के साकार होने जैसा था। अब डर है कि कहीं यह सपने की तरह टूट न जाये।
हीरा देवी का कहना है कि मेरे बच्चे तो रोज सुबह जल्दी उठ जाते हैं और तैयार होने लगते हैं कि हमें स्कूल जाना है। सभी बच्चे तो जा रहे हैं हम कब जायेंगे। बच्चों को बहलाना मुश्किल हो रहा है। रोजीना का कहना है कि क्या हम गरीबों के बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढऩे का कोई अधिकार नहीं है। रोज बच्चों से झूठ बोलना पड़ रहा है। दुख इस बात का होता है कि हम गरीब क्यों हैं। सरकार ने जहां हमारे लिए इतना किया है, वहीं स्कूलों को भी ध्यान देना चाहिए। रती का कहना है कि बच्चे जिद करते हैं कि हमें स्कूल क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है। हमारा काम पिछड़ जाएगा। बच्चों को नहीं पता कानूनी लड़ाई क्या है। इलियास का कहना है कि बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। इन्हें गरीब का बच्चा नहीं बल्कि अपने देश का भविष्य मानना चाहिए। सायरा बानो , अफसाना ,जीनत, नसीमुन निसां , नूरजहां, अनिता इन सब का यही कहना है कि हमें गरीब होने पर दुख होता है। हम सब अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा सकते हैं।

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