क्या कल होगी योगी को सीएम का चेहरा बनाने की घोषणा!

  • गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर जोरदार तैयारी
  • माया पर की गई टिप्पणी से दलित समाज के लोग कल पीएम को काला झंडा की कर रहे हैं तैयारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गोरखपुर दौरा काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गालियारे में इस बात की चर्चा है कि गोरखपुर में दो बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद मोदी मंच से यूपी के सीएम चेहरे की घोषणा भी कर सकते हैं। इसमें पूर्वांचल में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले और आरएसएस की तरफ से प्रस्तावित नामों में सबसे खास माने जाने वाले योगी आदित्यनाथ को पार्टी की तरफ से सीएम उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इससे पहले संतकबीर नगर में आयोजित रैली के दौरान अमित शाह की तरफ से भी योगी को लेकर काफी सकारात्मक बयान आया था। इसलिए माना जा रहा है कि गोरखपुर में योगी को सीएम का चेहरा बनाए जाने पर अंतिम मुहर लग सकती है।
भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का भी पूरा अंदाजा है कि अब यूपी में मोदी नाम का जादू भी वैसा नहीं रहा, जैसा लोकसभा चुनाव के समय था। विकास को लेकर मोदी के नारों की यूपी में असलियत कुछ जुदा ही नजर आ रही है। भाजपा के सांसदों ने भी अपने क्षेत्रों में प्रभावी काम नहीं किया है। इन सब जिद्दोजेहद के बाद भाजपा और संघ के वरिष्ठ लोगों की बैठक के बाद तय किया गया कि यूपी का चुनाव लोकसभा चुनाव की तरह अगर सिर्फ विकास के एडेंजा पर लड़ा गया तो भाजपा को कई तीखे सवालों का जवाब देना पड़ेगा। पार्टी इन सवालों का बहुत अच्छा उत्तर दे पाने की स्थिति में फिलहाल नजर भी नहीं आ रही। इसलिए यूपी में हिन्दुत्व के मुद्दे को थोड़ी और धार देने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती दौर में योगी आदित्यनाथ और वरुण गांधी का नाम ही सबके सामने आया। वरुण गांधी के समर्थक काफी समय से उन्हें सीएम का चेहरा बनाये जाने की वकालत कर रहे हैं। मगर संघ परिवार अभी भी उनके सरनेम गांधी को पचा नहीं पा रहा। दूसरी तरफ वरुण गांधी का नाम सामने आने के बाद योगी आदित्यनाथ के तेवर कैसे होंगे, इसकी कल्पना ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को डरा रही है। पार्टी हाईकमान जानता है कि पूर्वांचल के कम से कम 14-15 जिलों में योगी आदित्यनाथ का बहुत प्रभाव है। वह 25-30 विधानसभा सीटों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं। पहले भी योगी भाजपा से बगावत कर अपने कई लोगों को विधायक बनवा चुके हैं। पूर्वांचल में योगी की हिंदू वाहिनी का बहुत प्रभाव भी है। इन सब विषयों पर चर्चा करके वरूण गांधी के नाम को किनारा करके योगी आदित्यनाथ के नाम पर ही चुनाव लडऩे का फैसला किया गया। इसी बैठक में यह विचार भी सामने आया कि योगी को चेहरा बनाने से हिंदुत्व के नाम पर अलग से कोई मुद्दा उठाने की जरूरत महसूस नहीं होगी। योगी का चेहरा ही हिंदुत्व का परिचायक हो जाएगा। इसके अलावा योगी के भाषणों से आरएसएस और भाजपा के मनमुताबिक माहौल भी तैयार हो जाएगा।
योगी को यूपी का सीएम उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें उस वक्त लगाई जाने लगी थीं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में योगी आदित्यनाथ के केन्द्रीय मंत्री बनने का फैसला हो चुका था लेकिन जब मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, तो उनमें योगी शामिल नहीं थे। उसी वक्त से लगभग यह तय हो गया था कि योगी ही भाजपा का चेहरा होंगे उनका नाम मंत्री की सूची से अलग किया गया। संघ का भी मानना है कि योगी का नाम सामने आने से हिंदु समुदाय को एकजुट होने में परेशानी नहीं होगी। योगी को आगे बढ़ाने में टीम मोदी का एक और बड़ा दांव पूरा हो जाएगा। योगी क्षत्रिय है। उनके आगे बढऩे से यूपी में भाजपा का एक बड़ा क्षत्रिय नेता तैयार होगा जो राजनाथ सिंह का विकल्प हो सकता है। यह आम धारणा है कि पीएम मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। योगी और राजनाथ सिंह के संबंध भी कुछ ज्यादा बेहतर नहीं हैं। जाहिर है कि ऐसा करने से एक तीर से दो शिकार हो जाएंगे।

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