क्या एलियन्स ने ऑस्ट्रेलियाई विमान अगवा किया था?

 बालेन्दु शर्मा दाधीच
अगर कोई सामान्य व्यक्ति यूएफओ को देखने का दावा करे तो शायद हमें यकीन न हो, लेकिन अगर इसी तरह का दावा कोई अंतरिक्षयात्री करें तो? तब उसे अनदेखा करने का कोई कारण नहीं बनता। अपोलो 11 में अंतरिक्षयात्रा पर गए बज एल्डिन ने कहा था कि उन्होंने एक यान को अपने अंतरिक्ष यान के साथ-साथ उड़ते देखा था। तब उन्हें लगा था कि शायद यह उड़ान के अंतिम दौर में अंतरिक्षयान से अलग होकर गिरने वाला हिस्सा है। लेकिन बाद में नासा के कंट्रोल रूम से बताया गया कि वह हिस्सा तो छह हजार मील दूर पहुंच चुका है।
चौबीस जुलाई 1948 को एक यूएफओ को देखे जाने का मशहूर दावा किया गया था, जो इस तरह के सबसे पहले दावों में गिना जाता है। ह्यूस्टन से एटलांटा जा रहे विमान के दो पायलटों चाइल्स और वाइटेड ने देखा कि एक विशाल, सिगार के आकार की कोई चीज उनके विमान की तरफ आ रही है। यह चीज कुछ देर एक जगह पर रुकी रही और फिर बहुत ही तेज रफ्तार से उड़ते हुए आसमान में गुम हो गई।
एक अन्य मशहूर घटना 21 अक्तूबर 1978 की है जो ऑस्ट्रेलिया के बास जलडमरूमध्य में घटित हुई। वहां फ्रेडरिक वेलेन्टिच नामक पायलट को लेकर उड़ रहा एक हल्का विमान आसमान में ही ‘गायब’ हो गया था। फ्रेडरिक ने अपने साथ हुए हादसे से ठीक पहले एअर ट्रैफिक कंट्रोल को बताया था कि उनसे करीब एक हजार मीटर ऊपर कोई ‘अजीब सा विमान’ उड़ रहा है और उनका पीछा कर रहा है। इसमें बहुत सारी बत्तियां हैं जो बार-बार जल-बुझ रही हैं, जैसे विमान तल पर होती हैं। उन्होंने बताया कि यह बहुत ही बड़े आकार का यान है और उसकी रफ्तार उनसे करीब तीन गुनी है। फ्रेडरिक ने संपर्क पूरी तरह टूटने से ठीक पहले आपातकालीन संदेश भेजा- यह ऊपर मंडरा रहा है… यह विमान नहीं है…. इस घटना में क्या हुआ होगा? बहुत से लोगों को आशंका है कि वेलेन्टिच और उनके विमान का परग्रहीय प्राणियों ने अपहरण कर लिया होगा।

परग्रहीय प्राणियों से संपर्क की उलझन
इस विमान को काफी तलाशा गया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। कौन जाने अगर परग्रहीय प्राणियों के साथ संपर्क की कोई व्यवस्था मौजूद होती तो शायद कोई ‘सुराग’ मिल पाता। हालांकि एक कोण यह भी है कि अगर किसी ग्रह से कोई संकेत भेजा भी जाएगा या भेजा गया होगा तो उसे धरती तक पहुंचने में कई महीने या साल लग सकते हैं। ऐसे संकेत व्यावहारिक रूप से उपयोगी होंगे, इसमें कई वैज्ञानिकों को संशय है। फिर एक आशंका और है। विश्व प्रसिद्ध नक्षत्रभौतिकीविद् स्टीफन हाकिंग ने कुछ साल पहले चेतावनी दी थी कि अन्य ग्रहों के प्राणियों से संपर्क के लिए अधिक लालायित होने की आवश्यकता नहीं है। इंसानों के लिए इसके विनाशकारी नतीजे भी हो सकते हैं। वे सौर मंडलीय और परा-सौर मंडलीय दुनियाओं के निवासियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
‘ब्रीफ हिस्टरी ऑफ टाइम’ के विख्यात लेखक और एस्ट्रो-फिजिक्स से जुड़े विषयों पर विश्व के सर्वाधिक प्रामाणिक और अधिकार-सम्पन्न वैज्ञानिक, विश्लेषक और चिंतक स्टीफन हाकिंग की बातों को गंभीरता से न लेने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को झकझोर दिया है और वैश्विक स्तर पर एक आशंकाभरी बहस को भी जन्म दिया है- क्या धरती एलियन्स के निशाने पर आ सकती है? क्या किसी अंतरग्रहीय युद्ध में इंसानी प्रजाति और इस शानदार ग्रह का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है? यदि हां, तो ऐसा कब तक संभव है और क्या हम इसे टाल सकते हैं?

क्या कहते हैं स्टीफन हाकिंग
डिस्कवरी टीवी चैनल पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों की बेहद चर्चित श्रृंखला में स्टीफन हाकिंग ने मोटे तौर पर दो बातें कही हैं। पहली- अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना वास्तविक है, और दूसरी- एलियन्स से मेलजोल के प्रयास सुखद परिणाम ही लेकर आएं, यह जरूरी नहीं। इस संपर्क का परिणाम लगभग वैसा ही हो सकता है, जैसा क्रिस्टोफर कोलंबस के आने का ‘नई दुनिया’ (अमेरिका) के मूल निवासियों पर हुआ था। उनका मानना है कि जो एलियन्स धरती पर आएंगे वे असल में अपने ग्रहों पर संसाधनों का इतना अधिक दोहन कर चुके होंगे कि ये ग्रह प्राणियों के रहने योग्य नहीं रह गए होंगे। वे विशाल अंतरिक्षयानों में ही रहने को मजबूर होंगे और रास्ते में जो भी ग्रह आएगा, उसके संसाधनों को निशाना बनाएंगे। उनका बर्ताव दोस्ताना ही हो, यह जरूरी नहीं है।
हाकिंग की चेतावनी के कई कोण हैं। वह उलझन भरे प्रश्न और प्रतिप्रश्न पैदा करती है। हालांकि अभी तक एलियन्स के साथ इंसानों का सीधा संपर्क नहीं हुआ है लेकिन अन्य ग्रहों पर जीवन है, यह बात अनेक वैज्ञानिकों ने मानी है। अधिकांशत: इस मान्यता का आधार वही दलील है जो हाकिंग ने दी है। अंतरिक्ष में आकाश गंगाओं, सौरमंडलों, ग्रहों आदि की संख्या का कोई अंत नहीं है। खुद हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे हैं। ऐसे में, यह धारणा स्वाभाविक रूप से पैदा होती है कि धरती ऐसा अकेला ग्रह नहीं होगा जहां पर किसी न किसी रूप में जीवन मौजूद है।

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