क्या उत्तराखंड में बचेगी सरकार?

हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन जारी होने से हडक़ंप
उत्तराखंड में सियासी संकट गहराया, आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
बागी विधायकों ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का लगाया आरोप

विधायकों ने हरीश रावत पर खनन व शराब माफियाओं के साथ साठ-गांठ का लगाया आरोप

28 मार्च को है हरीश रावत की अग्नि परीक्षा

Gh14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही। उत्तराखंड में सियासी संकट बढ़ गया है। आज कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने सीएम हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन की सीडी जारी कर उन पर कई गंभीर आरोप लगाया। हरीश रावत के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन की सीडी जारी होने व बागी विधायकों के तेवर से सरकार पर सकंट के बादल मडराने लगा है। वहीं उत्तराखंड में भाजपा भी कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रही है। दरअसल हरीश रावत को कल सदन में बहुमत साबित करना है और आज राजनीतिक उठापठक से हरीश रावत सरकार मुश्किल में आ गई है। अब देखना होगा कि उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार बचती है या नहीं?
उत्तराखंड कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह रावत ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री हरीश रावत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्टिंग ऑपरेशन की सीडी दिखाई और दावा किया कि इसमें हरीश रावत विधायकों को प्रलोभन देते दिख रहे हैं। हरक सिंह रावत ने कहा, हम 9 विधायकों के अलावा बीजेपी के विधायकों को भी खरीदने की कोशिश की जा रही है। विधायकों को धमकाया जा रहा है। राज्य में खतरनाक माहौल बन गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि सभी विधायकों को सुरक्षा दी जाए क्योंकि उनकी जान को खतरा है। हरक सिंह ने कहा कि राज्य में हालात बहुत बिगड़ चुके हैं इसलिए हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। उन्होंने कहा कि अपनी बात को कहना उनके लिए बहुत तकलीफदेह बन गया है और उनकी जान को खतरा है। वहीं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने हरक सिंह के आरोपों को खारिज किया। उपाध्याय ने कहा कि ये सीडी फेब्रिकेटिड है। उत्तराखंड में पिछले एक पखवारे से राजनीतिक उठापठक का दौर चल रहा है। दरअसल कांग्रेस के 9 विधायकों ने बागी तेवर अपनाते हुए भाजपा के खेमे में चले गए। उसके बाद से उत्तराखंड में सियासी गर्मी बढ़ गई।

कांग्रेस के बागी विधायकों पर कार्रवाई को स्पीकर तैयार
उत्तराखंड में जारी सियासी घटनाक्रम के लिहाज से आज का दिन बेहद अहम है। सभी बागी विधायकों को आज शाम 5 बजे तक खुद पेश होकर स्पीकर के नोटिस का जवाब देना है। ऐसा न होने पर स्पीकर एकतरफा कार्रवाई करते हुए सभी बागी विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से निष्कासित कर सकते हैं। मालूम हो कि 18 मार्च को विधानसभा में हरीश रावत सरकार के लिए परेशानी खड़ी करने वाले कांग्रेस के सभी 9 बागी विधायकों को स्पीकर ने दल-बदल कानून के तहत नोटिस भेजा था। नोटिस में सभी बागी विधायकों से 26 मार्च तक खुद पेश होकर जवाब देने के लिए कहा गया था। 18 मार्च की रात से ही सभी बागी विधायक उत्ताराखंड से बाहर हैं। शुक्रवार 25 मार्च को बागी विधायकों ने स्पीकर के नोटिस को गलत बताते हुए इसके विरोध में नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। विधायकों ने याचिका में स्पीकर के नोटिस का जवाब देने के लिए और समय देने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट से विधायकों को किसी तरह की राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि स्पीकर ही बागी विधायकों को अधिक समय देने या न देने के संबंध में फैसला ले सकते हैं। बताया गया है कि इसके बाद सभी बागी विधायकों ने स्पीकर को लिखित में अपने जवाब भेज दिए, लेकिन स्पीकर ने उनसे खुद पेश होकर जवाब देने को कहा है। दरअसल नोटिस की समयावधि 26 मार्च शाम 5 बजे के बाद कभी भी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा हरीश रावत सरकार को 28 मार्च को विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करना है।

बागी विधायकों के आरोप बेबुनियाद : हरीश
उत्तराखंड में सियासी सरगर्मी के बीच दोपहर में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रेस कांफ्रेंस कर स्टिंग ऑपरेशन की सीडी पर उन्होंने कहा कि यह सीडी फेक है। यह सब सुनियोजित है। दरअसल केन्द्र सरकार को गैर बीजेपी सरकार पसंद नहीं है। बीजेपी जनता को गुमराह कर रही है। विधायकों को अपने चंगुल में लेकर धनबल, बाहुबल के बदौलत उत्तराखंड सरकार को गिराना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस सीडी की सत्यता को खंगाला जाए। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। बागी विधायकों पर पलटवार करते हुए श्री रावत ने कहा कि मेरे ऊपर बागी विधायकों ने जो भी आरोप लगाया है वह बेबुनियाद है। पैसे के लालच में विधायक ऐसी हरकते कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं बागी विधायक
उत्तराखंड में चल रही राजनीतिक उठा-पठक के बीच कांग्रेस के बागी विधायक आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार ये विधायक स्पीकर के नोटिस के खिलाफ याचिका दाखिल कर सकते हैं। इससे पहले 9 बागी विधायकों द्वारा नैनीताल हाईकोर्ट में स्पीकर के नोटिस को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका खारिज कर दी गई है। स्पीकर ने सभी बागी विधायकों को कारण बताओ नोटिस देकर पूछा था कि क्यों न दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाए। वहीं कांग्रेस द्वारा बागी विधायकों को वापिस अपने पेले में लाने की कोई भी कोशिश रंग लाती दिखाई नहीं दे रही है। विधायक अव्यवहारिक मांगे कर रहें है। ऐसे में कांग्रेस का भविष्य अब राज्यपाल के ही रहमो करम पर टिका है।

 

Pin It