क्या आपको ऐसे लोगों को सजा देने का मन नहीं करता…

चीन में भ्रष्टïाचार के आरोप में एक मंत्री को फांसी की सजा दे दी गई। हमारे यहां मंत्री भ्रष्टïाचार का इतिहास रचते रहते हैं और उनके खिलाफ कुछ नहीं होता। यह बेईमानी और बेशर्मी की पराकाष्ठïा है। अपने देश में भ्रष्टïाचार एक परंपरा बन गई है।

sanjay sharma editor5बेशक हमारे देश में कानून इसकी इजाजत न देता हो मगर उत्तराखंड के राजनेताओं और अफसरों ने जो काम किया उसको देखकर उन्हें चौराहे पर गोली मारने का मन करता है। उत्तराखंड की आपदा के समय जहां पूरा देश त्राहि-त्राहि कर रहा था उस समय आपदा राहत के लिये आये पैसे से ये अफसर और नेता मौज कर रहे थे और उस पैसे को अय्याशी में उड़ा रहे थे। यह इस देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे लोग लगातार आम आदमी की मौत पर अय्याशी के साधन जुटाते रहते हैं और इस देश का आम आदमी मजबूर होता है कि वह इन अय्याश लोगों के लिये संसाधन जुटाता रहे और उसके पैसे पर यह लोग मौज मस्ती करते रहें।
उत्तराखंड में आपदा के समय अफसरों और नेताओं ने लाखों रुपये मिनरल वाटर, कबाब और इसी तरह की अय्याशियों पर उड़ा दिये। उत्तराखंड में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना से जानकारी मिली है कि आपदा के समय यह लोग दोनों हाथों से सरकारी धन को लूटने में लगे हुये थे। उत्तराखंड की आपदा मानो इन लोगों के लिये एक वरदान लेकर आई थी कि इस आपदा का वे जितना इस्तेमाल कर सकते हैं उतना कर लें। बेशर्मी का इससे ज्यादा नंगा नाच भला और क्या हो सकता है।
चीन में भ्रष्टïाचार के आरोप में एक मंत्री को फांसी की सजा दे दी गई। हमारे यहां मंत्री भ्रष्टïाचार का इतिहास रचते रहते हैं और उनके खिलाफ कुछ नहीं होता। यह बेईमानी और बेशर्मी की पराकाष्ठïा है। अपने देश में भ्रष्टïाचार एक परंपरा बन गई है। नेताओं को लगता है इसी तरह भ्रष्टïाचार करते रहेंगे और कोई उनसे कुछ नहीं कहेगा। इस अंधेरगर्दी में वह किसी भी तरह का फायदा उठा सकते हैं।
उत्तराखंड में आपदा से मृत लोगों के लिये पूरा देश दुखी था। कई परिवारों के लोग इस आपदा में फंस गये थे और उनके परिजन उनके जिंदा लौटने की दुआ कर रहे थे। यकीन नहीं होता कि ऐसे दुख के समय में भी कोई व्यक्ति इनकी मदद करने के नाम पर पैसे लूट सकता है। मगर इस दुनिया में कुछ बेशर्म लोग होते हैं जो किसी भी समय कभी भी सिर्फ और सिर्फ दौलत को ही अपना सबकुछ समझते हैं। हर हालत में ऐसे लोगों को सबक सिखाया ही जाना चाहिये। जिससे भविष्य में वे कभी भी दोबारा यह करने की सोच न सकें।

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