क्या आईजी भी हत्यारोपियों का लेते हैं पक्ष

न्याय मांगने पहुंची मृतक की बहन को कार्यालय से डांट कर भगाया

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। स्थानीय थाने की पुलिस यदि आरोपियों की मदद करे तो कोई नई बात नहीं होती है लेकिन जब आरोपियों की मदद आईजी स्तर के अधिकारी करने लगे तो स्वाभाविक है कि आरोपी जहां ऊंची पहुंच वाले होंगे वहीं पीडि़त को न्याय नहीं मिल पाएगा। मामला जब खाकी से जुड़ा हो और उसके साथ अधिकारी जब इस तरह की हरकत करें तो कहना गलत नहीं होगा कि आरोपियों की पहुंच के कारण खाकी खुद ही खाकी को अपमानित करने से पीछे नहीं हटेगी।
मामला लखनऊ का है, जहां एक बहन और खाकी की बेटी 25 मार्च को जब अपने भाई की हत्या का दुखड़ा लेकर आईजी जकी अहमद के पास फरियाद करने पहुंची तो श्री अहमद ने उसकी बातों को बिना सुने उसे डांटते हुए अपने कार्यालय से ऐसे भगा दिया जैसे वह पीडि़त नहीं गुनहगार थी।
ऐसे में सवाल उठता है कि महिला की सुरक्षा का दावा पीटने वाले अधिकारी अपने मातहतों को महिला सुरक्षा का उपदेश कैसे देते होंगे। आईजी जकी अहमद की शिकायत अनामिका सिंह ने प्रमुख सचिव गृह और राज्यपाल से की है। अनामिका का आरोप है कि उसके भाई के हत्यारों को बचाने के पीछे आईजी जकी अहमद का हाथ है। जकी अहमद के कारण ही हत्यारों की जहां गिरफ्तारी नहीं हो रही है वहीं धाराओं में भी खेल करने का षडय़ंत्र चल रहा है।
सीएम के साथ फोटो दिखाकर ब्लैकमेल करते हैं अभियुक्त
पिता नरेंद्र के मुताबिक अभियुक्त सीएम के साथ अपनी फोटो दिखाकर धमकी देने के साथ ही ब्लैकमेल करते हैं। सीएम के साथ फोटो खिंचवाने के कारण पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर रही है और नहीं कागजी कार्रवाई कर रही है। ताकि उनके घरों की कुर्की हो सके।
यह है मामला
बता दें कि अभिषेक सिंह (19) पुत्र नरेंद्र बहादुर सिंह निवासी सेक्टर-एफ थाना सरोजनीनगर बीबीए का छात्र था। अभिषेक के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस में दारोगा हैं। पिता नरेंद्र सिंह के मुताबिक मामले को दबाने के लिए अपराधियों ने हत्या को सडक़ हादसे का रूप दिया था। लेकिन शव का पोस्टमॉर्टम कराने पर अभिषेक के शरीर में लगभग एक दर्जन चोटों की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट के बाद नरेंद्र ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी, लेकिन कृष्णानगर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में चार दिन का समय लगा दी।
इंस्पेक्टर और सीओ के पेशकार हुए थे सस्पेंड
इस मामले में छात्रों ने प्रदर्शन कर एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई। जहां एसएसपी यशस्वी यादव ने तत्कालीन इंस्पेक्टर विकास कुमार पांडेय को सस्पैंड कर दिया। वर्तमान में विकास कुमार पांडय को श्री यादव ने बाजारखाला थाना प्रभारी बनाया है। जबकि सीओ के पेशकार रणविजय सिंह को भी सस्पैंड किया गया।
कोर्ट ने जारी किया वारंट, फिर भी नहीं हो रही गिरफ्तारी
अभिषेक की हत्या के मामले में कोर्ट ने फरार चल रहें सातों अभियुक्तों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इसके बाद भी पुलिस उनको गिरफ्तार करने की जहमत नहीं उठा पा रही है। पिता का आरोप हैं कि अभियुक्त सत्ता पक्ष के करीबी है। जिसके कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।
डीजीपी के आदेश का भी नहीं हुआ पालन
इस मामले में पीडि़त दारोगा नरेंद्र ने डीजीपी अरविंद कुमार जैन से मुलाकात की। जहां 20 फरवरी 2015 को श्री जैन ने आईजी अशोक मुत्था जैन के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनाकर मानिटरिंग करने की बात कही थी। इतना ही नहीं पूर्व में सैफ ने सिपाही धर्मेंद्र कुमार तिवारी के भाई और उनके परिजनों को घर में घुसकर जमकर पीटा था।

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