कौन सुधारेगा इन अफसरों को…

अफसरों का यह नजरिया किसी भी सरकार का कबाड़ा करने के लिए काफी है। अफसरों की संवेदनहीनता सरकार को आम आदमी से दूर करती है। अफसरों का यह अहसास कि वो आम आदमी से अलग हैं और उन्हें खास तरह की तवज्जो मिलनी चाहिए अंतत: सरकार के लिए ही नुकसानदायक सिद्ध होती है।

sanjay sharma editor5यूपी के कई अफसरों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। अफसर मन की मर्जी के मालिक हैं। मन हुआ तो ब्यौरा दिया नहीं हुआ तो नहीं दिया। आखिर प्रदेश वही चलाते हैं। उनका इतना तो हक है ही कि वो अपनी मर्जी की कर सकें। ऐसे मेंं नियम कायदे की बात करना बेमानी है। हर बार इन अफसरों को चेतावनी दी जाती है । अफसर भी जानते हैं कि यह सिर्फ चेतावनी है। उनका कुछ बिगडऩे वाला नहीं है। लिहाजा वो भी पूरी लापरवाही बरतते हैं। अफसरों का यह नजरिया बताता है कि उन्हें आम आदमी के हितों से कितना मतलब है। अगर यही काम आम आदमी करता तो यह अफसर उसका जीना दूभर कर देते।
अफसरों का यह नजरिया किसी भी सरकार का कबाड़ा करने के लिए काफी है। अफसरों की संवेदनहीनता सरकार को आम आदमी से दूर करती है। अफसरों का यह अहसास कि वो आम आदमी से अलग हैं और उन्हें खास तरह की तवज्जो मिलनी चाहिए अंतत: सरकार के लिए ही नुकसानदायक सिद्ध होती है। अगर अफसरों को यह ख्याल नहीं होगा कि वो भी एक सामान्य आदमी हैं तो फिर वो आम आदमी के हितों का ध्यान कैसे रखेंगे?
अफसरों को अपनी संपत्ति की सूचना हर साल देना अनिवार्य है। मगर बहुत कम अफसर ही यह सूचना देते हैं। अधिकांश अफसर इस सूचना को देने में अपनी तौहीन समझते हैं। मजे की बात यह है कि इसमें वही सूचना देनी है जो उन्होंने अपने आयकर रिटर्न में दी है। अब यह सूचना भी उन्हें देने में खासी परेशानी होने लगी है। अफसरों के पास कितनी संपत्ति होती है यह सब जानते हैं। अब उन्हें ईमानदारी की संपत्ति बताने में भी इतनी शर्म आ रही है तो बेनामी संपत्ति तो बताने से रहे ।
मगर कानून सबके लिए बराबर होता है। अफसरों के इस गुमान को हर हालत में तोड़ा जाना चाहिए कि वो कानून से ऊपर हैं। समानता का व्यवहार ही उन्हें सही रास्ते पर ला सकता है। अफसरों को भी सोचना चाहिए कि अगर वो खुद कानून का पालन नहीं करेंगे तो दूसरों से इसकी अपेक्षा कैसे कर सकते है। यह अच्छी पहल अभी से शुरू होनी चाहिए और सभी को यह घोषणा तत्काल करनी चाहिए।

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