कोर्ट के आदेशों को ठेंगे पर रखते हैं नगर निगम के अधिकारी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निगम की कुर्सियों पर वर्षों से बैठे अधिकारियों की कार्यप्रणाली से सब वाकिफ हैं। लेकिन सत्ताधारियों से नजदीकी के दम पर यह अधिकारी हाईकोर्ट के आदेशों को भी अपने ठैंगे पर रखे हुए हैं। लखनऊ के मोहल्ला डौडा खेड़ा में सरकारी जमीन पर मंदिर बनाकर कथित तौर पर अतिक्रमण किए जाने के खिलाफ 19 स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 10 जून 2016 को एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने इससे प्रत्येक नागरिक की स्वतंत्र आवाजाही के मौलिक अधिकार का हनन होने का हवाला दिया था।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल और राकेश श्रीवास्तव की लखनऊ बेंच ने जनवरी 2011 से सार्वजनिक स्थलों, राजमार्गों, गलियों, फुटपाथों व सडक़ किनारे बने किसी भी प्रकार के धार्मिक ढ़ाचों को निजी भूखंड पर स्थानांतरित करने और 2011 के बाद बने धार्मिक ढ़ाचों को दो महीने के भीतर हटाने का आदेश दिया था। लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। जब कार्रवाई को लेकर 2011 से पहले और बाद निर्मित धार्मिक ढ़ाचों की लिस्ट मांगी तो वह भी देने में बगलें झांकते नजर आए। विभागीय सूत्रों की मानें तो पूर्व अपर नगर आयुक्त विशाल भारद्वाज के समय में सभी जोनों से इसको लेकर लिस्ट तैयार की गई थी। लेकिन इस वक्त वह लिस्ट कहां है, किसी को नहीं पता। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर निगम के अधिकारी कोर्ट के आदेश को लेकर कितने संजीदा हैं।

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