कोरोना गाइडलाइंस और कोर्ट की सख्ती

कोरोना गाइडलाइंस और कोर्ट की सख्ती

sanjay sharma

सवाल यह है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बावजूद लोग लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट को इस मामले में कठोर रुख क्यों अपनाना पड़ा? क्या पुलिस कोरोना गाइडलाइंस का पालन कराने में नाकाम साबित हो रही है? क्या संक्रमण दर में आई कमी के कारण लोग लापरवाह होते जा रहे हैं? क्या इस लापरवाही के पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण है?

दुनिया भर में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा है। भारत में भी इसका संक्रमण फैल रहा है। यहां अब तक 78 लाख से अधिक लोग संक्रमित चुके हैं जबकि एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले उत्तर प्रदेश में साढ़े चार लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और यहां संक्रमण की रफ्तार अभी थमी नहीं है। बावजूद इसके लोग कोरोना गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं। लिहाजा अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह लोगों से कोरोना प्रोटोकाल का पालन कड़ाई से कराए और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। सवाल यह है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बावजूद लोग लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? आखिर हाईकोर्ट को इस मामले में कठोर रुख क्यों अपनाना पड़ा? क्या पुलिस कोरोना गाइडलाइंस का पालन कराने में नाकाम साबित हो रही है? क्या संक्रमण दर में आई कमी के कारण लोग लापरवाह होते जा रहे हैं? क्या इस लापरवाही के पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण है? क्या महामारी के दौर में नागरिकों को अपने कर्तव्यों को नहीं निभाना चाहिए?
अनलॉक के साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेजी से बढ़ी। वे इलाके भी संक्रमण की जद में आ गए जो लॉकडाउन के दौरान इससे बचे हुए थे। हालत यह है कि यहां रोजाना दो से ढाई हजार नए केस सामने आ रहे हैं। हालांकि इसकी रफ्तार धीमी हुई है लेकिन यदि कोरोना गाइडलाइंस के पालन में कोताही बरती गई तो कोरोना की दूसरी लहर को आने से रोका नहीं जा सकेगा। विशेषज्ञ भी इस दूसरी लहर को लेकर चिंतित है। त्यौहारी सीजन में बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। लोग न तो मास्क लगा रहे हैं और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। इसके कारण संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। पुलिस भी अब ऐसे लोगों के खिलाफ सुस्त रुख अपना रही है। लिहाजा हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस वैश्विक महामारी के दौरान भी नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करने में कोताही बरत रहे हैं। उनके ऊपर प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक की अपीलों का कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लोग महामारी के दौरान लगने वाली बंदिशों से थकने के कारण इस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार को चाहिए कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक मास्क न लगाने वालों से सख्ती से निपटे। साथ ही इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।

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