कोरोना काल में बेकाबू महंगाई

कोरोना काल में बेकाबू महंगाई

sanjay sharma

सवाल यह है कि महंगाई लगातार बेकाबू क्यों होती जा रही है? क्या सरकार के पास महंगाई का कोई निदान नहीं है? क्या पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं? क्या मांग और आपूर्ति में संतुलन साधे बिना महंगाई को नियंत्रित किया जा सकता है? आखिर महंगाई कब तक रहेगी? क्या पर्याप्त कृषि उत्पादों के बावजूद हालात में सुधार की कोई संभावना नहीं है?

कोरोना वायरस ने एक ओर लोगों की सेहत को बिगाड़ दिया है वहीं दूसरी ओर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। कोरोना के कारण यहां के तमाम उद्योग धंधे चौपट हो चुके हैं। लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं। वहीं महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी दर लगातार सात फीसदी से ऊपर बनी हुई है। खाद्यान्न से लेकर सब्जियों तक के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में आम जनता के लिए परेशानियां और बढ़ गई हैं। सवाल यह है कि महंगाई लगातार बेकाबू क्यों होती जा रही है? क्या सरकार के पास महंगाई का कोई निदान नहीं है? क्या पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं? क्या मांग और आपूर्ति में संतुलन साधे बिना महंगाई को नियंत्रित किया जा सकता है? आखिर महंगाई कब तक रहेगी? क्या पर्याप्त कृषि उत्पादों के बावजूद हालात में सुधार की कोई संभावना नहीं है?
देश में महंगाई आसमान पर पहुंच चुकी है। आरबीआई भी इसकी बढ़ती रफ्तार से चिंतित है और उसे इस वर्ष इसमें किसी भी प्रकार की कमी आने की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिखाई पड़ रही है। दाल से लेकर सब्जियों तक के दामों में कई गुना इजाफा हुआ है। इसकी बड़ी वजह कोरोना वायरस के चलते पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था है। कोरोना के कारण देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। अकेले पर्यटन उद्योग से जुड़े 12 करोड़ लोगों की रोजी रोटी इससे प्रभावित हुई है। अभी भी संक्रमण खत्म नहीं हुआ है। लिहाजा बाजार में आर्थिक गतिविधियां अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रही हैं। इसके अलावा संक्रमण के डर से लोग अभी भी खरीदारी करने से बच रहे हैं। रोजगार खत्म हो जाने के कारण लोगों की क्रय क्षमता प्रभावित हुई है। इसके कारण बाजार में पूंजी का प्रवाह बाधित हुआ है। इसके चलते भी महंगाई की दर नीचे नहीं आ रही है। हालांकि अनलॉक के बाद से आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं लेकिन अभी भी आयात और निर्यात में संतुलन नहीं साधा जा सका है। इसका भी असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक में महंगाई को लेकर चिंता जताई है और उम्मीद की गई है कि महामारी से पहले वाली आर्थिक स्थिति में पहुंचने में अभी तीन से चार तिमाही का वक्त यानी कम से कम एक साल लगेगा। ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि वह महंगाई पर लगाम लगाने के लिए न केवल रोजगार के अवसरों को बढ़ाए बल्कि खाद्यान्न से लेकर सब्जियों तक के बढ़ते मूल्यों पर अंकुश लगाए।

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