कॉलेजियम प्रणाली बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने कल ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की दो दशक से अधिक पुरानी कॉलेजियम प्रणाली की जगह लेने के लिए राजग सरकार द्वारा लाए गए अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया।

sanjay sharma editor5सर्वोच्य न्यायालय ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिये पुरानी कॉलेजियम प्रणाली को बहाल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कल ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की दो दशक से अधिक पुरानी कॉलेजियम प्रणाली की जगह लेने के लिए राजग सरकार द्वारा लाए गए अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया। अब कॉलेजियम ही जजों की ट्रांसफर-पोस्टिंग करेगी। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से निश्चित ही केंद्र सरकार को झटका मिला है।
गौरतलब है कि संविधान का 99वां संशोधन और राष्टï्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित 1993 की कॉलेजियम प्रणाली के स्थान पर लाया गया था। निश्चित ही इस फैसले से केन्द्र सरकार को झटका लगा है। अब देखना होगा कि केन्द्र सरकार आगे क्या फैसला लेती है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम प्रणाली की जगह लेने वाला अधिनियम लाने के लिए संविधान में किए गए 99वें संशोधन को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया। न्यायमूर्ति जेएस खेहर, न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति एके गोयल की सदस्यता वाली पांच सदस्यीय एक संवैधानिक पीठ ने एनजेएसी अधिनियम को रद्द करने का सर्वसम्मति से फैसला सुनाया। इस पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय के 1993 और 1998 के फैसले को समीक्षा के लिए वृहद पीठ के पास भेजने की केंद्र सरकार की अपील भी खारिज कर दी। हालांकि चार न्यायाधीशों ने संविधान में 99वें संशोधन को असंवैधानिक घोषित किया लेकिन न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर ने उनसे भिन्न राय व्यक्त की और इस संशोधन की वैधता बरकरार रखने के लिए अपने तर्क भी दिए। सर्वोच्च न्यायालय ने बार से कॉलेजियम प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव मांगे हैं, जिसकी सुनवाई तीन नवंबर को होगी। अब एनजेएसी एक्ट रद्द होने के बाद से या तो 22 साल पुरानी कॉलेजियम व्यवस्था के जरिए जजों की बहाली होगी या फिर सरकार संसद में फिर से कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट सकती है।
कॉलेजियम सिस्टम 28 अक्टूबर 1998 को 3 जजों के मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के जरिए प्रभाव में आया था। संविधान में इसका जिक्र नहीं है। एनजेएसी में जिन 2 हस्तियों को शामिल किए जाने की बात कही गई थी, उनका चुनाव चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता या विपक्ष का नेता नहीं होने की स्थिति में लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता वाली कमेटी करती। इसी पर सुप्रीम कोर्ट को सबसे ज्यादा ऐतराज था।

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