कॉक्लियर इंप्लांट लगाने को केजीएमयू सहित दो चिकित्सा विश्वविद्यालय नामित

भारत सरकार की संस्था एवाईजेएनआइएचएच ने केजीएमयू को भेजा लेटर

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureखनऊ। अब उत्तर प्रदेश में गरीब गूंगे-बहरे बच्चों को भी कॉक्लियर इंप्लांट लगाया जा सकेगा। इसके लिए भारत सकरार की संस्था अली यावर जंग राष्टïीय श्रवण विकलांग संस्थान (एवाईजेएनआइएचएच )की ओर से प्रदेश के तीन चिकित्सा विश्वविद्यालयों को नामित किया है। इस संबंध में विकलांग संस्थान की ओर से तीनों चिकित्सा विश्वविद्यालयों को लेटर भेजा गया है। इनकी सहमति के बाद गरीब बच्चों को कॉक्लियर इंप्लांट लगाये जाने का रास्ता साफ हो जायेगा।
कॉक्लियर इंप्लांट लगाने के लिए प्रदेश के किंग जार्ज मेडिक ल कॉलेज, लखनऊ, गण्ेाश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानुपर और बीएचयू बनारस को नामित किया गया है। बताते चलें कि अभी तक पूरे प्रदेश में केवल केजीएमयू में ही कॉक्लियर इंप्लांट लगाये जाने की सुविधा है। केजीएमयू के ईएनटी विभाग में आने वाले मूक-बाधिर बच्चों के परिजनों को कॉक्लियर इंंप्लांंट की जानकारी दी जाती है। परिजनों की रजामंंदी के बाद केजीएमयू की वेलफेयर सोसाइटी की ओर से बाहर से कॉक्लियर इंप्लांट मंगाये जाते थे। दरअसल कॉक्लियर इंप्लांट की कीमत बुहत अधिक होती है जिससे गरीब बच्चों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाती। केजीएमयू के ईएनटी रोग विश्ेाषज्ञ डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि तमाम बच्चों को क ॉक्लियर इंप्लांट लगाने में एनजीओ और अन्य सामाजिक संस्थाओं की ओर से मदद की जाती है जिससे गरीब बच्चों को भी कॉक्लियर इंप्लांट की सुविधा मिल जाती है लेकिन ज्यादातर कॉक्लियर इंप्लांट संपन्न लेाग ही लगवा पाते हैं।
क्या है कॉक्लियर इंप्लांट
कॉक्लीयर इम्प्लांट एक ऐसा मेडिकल उपकरण है, जो श्रवण इंद्रियों में विद्युतीय उत्तेजना पैदा करेगा। इससे दुनियाभर में उन हजारों लोगों को फ ायदा होगा, जो आंशिक वधिर हैं। वर्तमान में जिस प्रकार के कॉक्लीयर इम्प्लांट मौजूद हैं, उनमें लोगों के सिर पर डिस्क के आकार का करीब एक इंच व्यास का ट्रांसमीटर लगाया जाता है। इसके अलावा जुड़े हुए माइक्रोफोन और बैट्री तक तार लगा रहता है।
इंप्लांट लगाने के हर दूसरे दिन स्पीच थैरेपी
ऑपरेशन के बाद बच्चों को हर दूसरे दिन स्पीच थैरेपी करवाना पड़ती है, जिससे करीब एक साल मेंं बच्चे सामान्य श्रोता की तरह सुन सकते हैं। कॉक्लियर इंप्लांट के बाद सिर्फ 30 प्रतिशत काम होता है। सबसे अहम स्पीच थैरेपी है। इसके जरिये ही बच्चे बोलना और सुनना सीख पाते हैं। सामान्य बच्चों की तरह बोलने में करीब सवा साल लगेगा।
करीब 25 बच्चों के हो चुके ऑपरेशन
केजीएमयू में करीब अभी तक करीब 25 मूक-बधिर बच्चों के ऑपरेशन हो चुके हैं। सभी ऑपरेशन केजीएमयू के डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने किये हैं। एक बच्चे के ऑपरेशन में करीब 8 लाख रुपए का खर्च आता है। केजीएमयू में 2002 से कॉक्लियर इंप्लांट की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार से कोई बजट नहीं दिया जाता।
क्या है एवाईजेएनआइएचएच
अली यावर जंग राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान (एवाईजेएनआइएचएच) की स्थापना 9 अगस्त 1983 को की गयी। यहं संस्थान सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के अधीन एक स्वायत्त संगठन हैं। इसका मुख्यालय बांद्रा, मुंबई में स्थित है। इस संस्थान का उद्देश्य मूक-बाधिर बच्चों को शिक्षा, चिकित्सा से लेकर हर क्षेत्र में उन्हें सामान्य नागरिकों की तरह सुविधायें प्रदान करना है।

क्या है इनका कहना

अली यावर जंग राष्टï्रीय श्रवण विकलांग संस्थान की ओर से उत्तर प्रदेश के तीन चिकित्सा विश्वविद्यालयों को नामित किया गया है। अभी तक केजीएमयू करीब 25 कॉक्लियर इंप्लांट लगाये जा चुके हैं। विकलांग संस्थान की ओर से तीन चिकित्सा विश्वविद्यालयों को नामित करने के बाद गरीब बच्चों को भी कॉक्लिया इंप्लांट लगाने में सुविधा मिलेगी।
-डॉ. वीरेंद्र वर्मा, ईएनटी विशेषज्ञ, केजीएमयू

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