कैसे बाराबंकी पुलिस वाले बन गए हैं ‘वर्दी वाले गुंडे’

डीजीपी साहब अब तो आपने भी देख लिया

सूबे में पहली बार डीजीपी के निर्देश पर किसी डीआईजी ने दूसरे जिले में मारा छापा

K1बाराबंकी के एसपी की दर्जनों शिकायतों के बाद हुई छापामारी और साबित हुआ कि बाराबंकी पुलिस पैसे लेकर करा रही है तस्करी
4 पीएम ने 4 सितम्बर को ही छापा था कि बाराबंकी पुलिस तरह-तरह के कारनामों से पैसा कमाने में जुटी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यह हैरत भरी बात थी कि डीजीपी जगमोहन यादव को बाराबंकी में पशु तस्करी की खबर मिलने के बाद डीआईजी लखनऊ के नेतृत्व में एक टीम बनानी पड़ी जिसने बाराबंकी में छापा मारकर पशुओं की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को पकड़ा। सात पशु तस्करों से 17 गौवंशीय पशु छुड़ाए गए। इन छापों ने इन आरोपों को साबित कर दिया कि बाराबंकी के एसपी अब्दुल हमीद के संरक्षण में बाराबंकी में खुलेआम पशु तस्करी हो रही है। बाराबंकी की पुलिस माफियाओं की भूमिका में आ गई है और अवैध वसूली के नए-नए हथकंडे अपनाने में जुटी है। पूरी आईपीएस लॉबी में यह बात बेहद चर्चा का विषय बनी हुई है कि डीजीपी ने ना सिर्फ एसपी बल्कि फैजाबाद के डीआईजी पर भी भरोसा नहीं किया और अब जब यह साबित हो गया कि खुलेआम पशु तस्करी को बाराबंकी पुलिस संरक्षण दे रही है तो एसपी को सस्पेंड क्यों नहीं किया गया।
डीजीपी जगमोहन यादव को लगातार इस बात की सूचना मिल रही थी कि बाराबंकी में खुले आम पशु तस्करी हो रही है। इस पर बेहद गोपनीय तरीके से उन्होंने डीआईजी लखनऊ को एक टीम के साथ बाराबंकी भेजा जिसमें तीन एएसपी, पांच सीओ और नौ इंस्पेक्टर थे। 17 गाडिय़ों में गई पुलिस के सामने कुछ ही घंटों में सारा कच्चा चि_ïा आ गया। दरअसल बाराबंकी पुलिस लंबे समय से पशु तस्करों के साथ मिलकर धंधा करने में व्यस्त थी और इस कारोबार से हर महीने करोड़ों रुपए कमा रही थी। दर्जनों लोगों ने आरोप लगाया था कि इस सारे धंधे की कमान खुद एसपी अब्दुल हमीद संभाले हुए हैं। उनके इन्हीं कारनामों के कारण एक बार शामली में दंगे के हालात हो गए थे। बाराबंकी कई महीनों से अवैध कारोबार का हिस्सा बन गया है। मासूम लोगों को बेवजह थाने लाकर बिठाया जाता है और उनसे रिश्वत लेकर ही छोड़ा जाता है। बाराबंकी के एसपी की दर्जनों शिकायतें होने के बावजूद उनको वहां से हटाया नहीं गया, जबकि पिछले एक महीने में ही कई बार बाराबंकी का माहौल खराब होते-होते बचा। अब देखना यह है कि जब यह आरोप साबित हो गए तो क्या डीजीपी एसपी को हटा पाने में कामयाब हो पाएंगे या एक बार फिर एसपी बाराबंकी डीजीपी पर भारी पड़ेगा।

दोषी होंगे दंडित

एडीजी कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी भी मानते हैं कि संभवत: पहली बार किसी डीआईजी को किसी दूसरे जिले में छापा मारने के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि डीआईजी की रिपोर्ट मिलते ही दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी इस तरह की सूचना मिलेगी तो इसी तरह की प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने माना कि प्रथम दृष्टïया बाराबंकी पुलिस की गलती लग रही है।

फिर आग लगाएगी मुजफ्फरनगर दंगों की रिपोर्ट

जस्टिस विष्णु सहाय की रिपोर्ट के बाद राजनैतिक भूचाल आने की संभावना
अफसरों की लापरवाही और नेताओं की साजिश के कारण हुआ था मुजफ्फरनगर दंगा

लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगे की तपिश एक बार फिर सूबे में राजनैतिक गर्मी पैदा कर सकती है। कल जस्टिस विष्णु सहाय ने जैसे ही राज्यपाल को मुजफ्फरनगर दंगों की रिपोर्ट सौंपी वैसे ही एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। साथ ही इस रिपोर्ट के बाद राजनैतिक गुणा भाग पर भी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि अभी यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। मगर सूत्रों से जानकारी मिली है कि जस्टिस सहाय को मिली जानकारी के अनुसार कुछ अफसरों का नकारापन और कुछ नेताओं की साजिश ने मुजफ्फरनगर में दर्जनों मासूमों की जान ले ली।
मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर पहले भी सपा और भाजपा में तकरार होती रही है। और एक बार फिर इस रिपोर्ट के बाद यह तकरार और बढऩे की उम्मीद है। इस समय प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर वैसे ही तनाव की स्थिति बनी हुई है ऐसे में यह रिपोर्ट आग में घी का काम करेगी।
मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर सरकार बैक फुट पर रहती है। इन दंगों में अल्पसंख्यक समुदाय का भारी नुकसान हुआ था और सपा को इस समुदाय को समझाने में लंबा समय लग गया था। उधर लोकसभा चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा ने इस दंगे का राजनैतिक फायदा उठाया था।
भारी हंगामे के बाद जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में सहाय आयोग बनाया गया था, जिसकी अवधि शुरू में 6 माह थी, मगर बाद में उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपने में दो वर्ष लग गए।

जब तक ये रिपोर्ट सार्वजानिक न हो तब तक कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। न्यायालय जो फैसला करेगी बीजेपी उसके लिए तैयार है। मुजफ्फरनगर दंगे सरकार ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए कराए थे। भाजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
-लक्ष्मीकान्त बाजपेयी,प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी

जब प्रदेश में सपा की सरकार है तो हम अपनी ही सरकार में दंगा क्यों करवाएंगे। अभी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन यह तय है कि जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-राजेंद्र चौधरी, मंत्री यूपी सरकार

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