कैसे पकड़ें अपराधियों को, आड़े आती है तोंद

पीटी परेड में न पहुंचने पर बनाते हैं बहाना, पुलिस अफसर भी बने लापरवाह

आरामतलबी और गलत खान-पान की वजह से शरीर पर बढ़ रही है चर्बी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। थुलथुल शरीर…बाहर निकले पेट पर किसी तरह टिकी पैंट। बेल्ट से पैंट को टिका कर चलने वाले वर्दीधारियों से आप यह उम्मीद कतई नहीं कर सकते कि वह दौड़ कर किसी अपराधी को पकड़ सकते हैं। लखनऊ में ऐसे पुलिसवालों की संख्या कम नहीं है। किसी भी चौराहे पर, सडक़ पर और थानों में ऐसे पुलिसवाले बड़ी आसानी से नजर आ जाएंगे जो तोंदू हो चुके हैं। हालांकि बीच में कई पुलिस अफसरों ने तोंदू पुलिसवालों को फील्ड से हटाकर आफिसों में तैनात किया, लेकिन निजाम बदला तो पुलिसवाले फिर से अपनी पहुंच से फील्ड में आ गए। ऐसा नहीं कि इनके तोंद अंदर करने के लिए पुलिस महकमें ने कोई जतन नहीं किया। योग से लेकर कसरत तक और पीटी से लेकर परेड तक सब जतन किये गये, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। कारण, बमुश्किल चंद पुलिसवाले ही सुबह पुलिस लाइन तक पहुंच पाते हैं बाकी के पास ड्यूटी का बहाना है।
परेड में नहीं पहुंच पाते अधिकतर पुलिसकर्मी
जिले की हर पुलिस लाइन में शुक्रवार को परेड होती है। इस परेड की कमान पुलिस कप्तान के पास होती है। अमूमन यह देखने को मिलता है कि कप्तान सुबह परेड में नहीं पहुंच पाते हैं। कप्तान के न पहुंचने से बाकी अमला भी लापरवाह हो जाता है। पुलिस के एक अफसर का कहना है कि जब तक जिले का कप्तान पुलिस की फिटनेस को लेकर गम्भीर नहीं होगा, तब तक पुलिसकर्मी खुद से अपने स्वास्थ में सुधार लाने को तैयार नहीं होंगे। उनके पास ड्यूटी का बहाना और कुछ अधिकारियों की पहुंच का भी वास्ता देते हैं।
तीन महीने में एक बार करनी होती है ट्रेनिंग
शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए भी सिविल इमरजेंसी रिजर्व (सीईआर) जरूरी है। मतलब तीन माह में एक माह की ट्रेनिंग। आम्र्स पुलिस के लिए एक साल में एक माह और पीएसी के लिए साल में दो महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। जाहिर है इस तरह की ट्रेनिंग हो रही होती तो पुलिसकर्मी फिट नजर आते और उनके तोंद बाहर न होते।
फोन से लेते थे कप्तानों की हाजिरी, परेड में गए या नहीं
पूर्व डीजीपी बृजलाल ने बताया कि सभी जिलों में शुक्रवार को होने वाली परेड में कप्तान पहुंच रहे हैं या नहीं इसकी चेकिंग करवाते थे। इसके लिए एडीजी स्तर के अफसरों को लगा रखा था। कप्तान के बेसिक फोन पर सुबह साढ़े छह बजे फोन करके पता किया जाता था कि वह घर पर हैं या परेड में गए हैं। उनकी हाजिरी लैंड लाइन से ली जाती थी। बृजलाल का कहना है कि पुलिस कप्तान गंभीर नहीं होंगे तो पुलिसवाले न आने के कई बहाने बना सकते हैं।
पीटी परेड में आते हैं केवल 2०-25 पुलिसकर्मी
लखनऊ पुलिस लाइन के आरआई अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि पीटी परेड मेंं पुलिस लाइन के रिक्रूट को छोड़ दें तो महज 2०-25 पुलिसवाले ही आते हैं। उन्होंने बताया कि पुलिसवालों की फिटनेस के लिए फिजियोथिरैपी, होम्योपैथी डॉक्टर, दांतों के डॉक्टर तक रहते हैं। इसके साथ ही योग के लिए योग प्रशिक्षक पुलिस एकेडमी मुरादाबाद से आते हैं। इसके साथ ही सात नवंबर को कैंसर क्लीनिक भी लगेगी। उन्होंने बताया कि रातभर ड्यूटी करने के बाद सुबह छह बजे परेड में कौन आ पाएगा, यह सवाल अक्सर उठता है।

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