कैसे निपटा जाये इन खाकी वर्दी वाले गुंडो से

सरकार बेहतर तभी मानी जाती है जब आम आदमी राहत महसूस करे और यह माने कि उसके साथ न्याय हुआ है। अगर आम आदमी की उपेक्षा की जायेगी। उसे पुलिस की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ेगा तो स्वाभाविक रूप से उसका तन्त्र से भरोसा उठेगा और यह बेहद घातक होगा।

 

SANJAY SHARMA - EDITOR

संजय शर्मा – संपादक

कानपुर में खाकी वर्दी वाले एक घर में घुसे। महिला से पूछताछ शुरू की और कुछ ही देर में अपनी औकात पर आ गये। महिला के कपड़े फाड़ दिये। उससे बर्बता की हद तक बद्तमीजी की गयी। महिला ने जब देखा की उसे कहीं से न्याय नहीं मिलेगा तो उसने आत्महत्या करना ही बेहतर समझा गंभीर हालात में महिला जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है हर बार की तरह इस बार भी किसी पुलिस वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दर्शाता है कि तन्त्र कितना खोखला हो गया है जहां किसी को किसी से कोई मतलब नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि खाकी वर्दी के यह गुंडे कब तक अपनी गुंडागर्दी का इसी तरह परिचय देते रहेंगे। आखिर न्याय की बात किससे की जायेगी और कौन उसकी सुनेगा। अगर इसी तरह का पुलिस का आचरण रहेगा तो किससे न्याय की आशा की जा सकेगी।
यह पहला मामला नहंी है जब वर्दी वाले गुंडों ने इस तरह का आचरण किया हो प्रदेश के कई स्थानों से इस तरह की खबरें रोज सुर्खियां बनती रहती हैं कि खाकी के नशे में चूर पुलिसकर्मी किस तरह आम आदमी को अपना शिकार बनाते हैं। पुलिस महकमे के जुल्म की कहानियां अब किसी से छिपी नहीं हैं लोग पुलिस की इस गुंडागर्दी से लगातार त्रस्त होते रहते हैं मगर इसका इलाज किसी के पास नहीं है।
सरकार चलाने वाले लोगों को भी यह समझ नहीं आ रहा कि अगर पुलिस के लोग इस तरह गुंडागर्दी करेंगे तो न्याय की आशा धूमिल हो जायेगी। सरकार बेहतर तभी मानी जाती है जब आम आदमी राहत महसूस करे और यह माने कि उसके साथ न्याय हुआ है। अगर आम आदमी की उपेक्षा की जायेगी। उसे पुलिस की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ेगा तो स्वाभाविक रूप से उसका तन्त्र से भरोसा उठेगा और यह बेहद घातक होगा।
दूर देहात के इलाकों में आम आदमी का सबसे ज्यादा वास्ता पुलिस महकमे से ही पड़ता है। आये दिन खबरें आती रहती हैं कि पुलिस वाले किस तरह गुंडागर्दी पर उतारू हैं। जब मन आता है तब किसी शरीफ आदमी को थाने में उठा लाते है उसे पीट देते हैं और फिर जबरन वसूली करते हैं इनको देख कर लगता है कि किस तरह ये लोग संगठित अपराध का गिरोह चला रहे हैं।
मुख्यमंत्री को भी सोचना चाहिये कि अगर इन लोगों की गुंडागर्दी बंद नहीं हुई तो उसका सीधा नुकसान उन्हें होगा। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस गुंडागर्दी पर जल्दी ही लगाम लगायेंगे।

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