कैसे चलेगी आयुष ओपीडी, नहीं हैं फार्मासिस्ट

मरीजों को कैसे मिलेंगी दवाइयां, दवा की समस्या के बाद दवा बांटने वालों की समस्या

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आयुष चिकित्सा से ईलाज कराने वालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले करीब 6 महीने से सरकारी अस्पतालों की आयुष ओपीडी में दवा का टोटा था ,जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब जब अस्पतालों में दवायें आ चुकी हैं तो उन दवाओं के वितरण के लिए फॉर्मासिसट नहीं है, जिससे मरीजों को दवाई नहीं मिल पा रही है।
राजधानी के सिविल, बलरामपुर, लोहिया, लोकबंधु, रानी लक्ष्मी बाई अस्पतालों में आयुष की ओपीडी बनकर तैयार हो चुकी है। योग, यूनानी व आयुर्वेंदिक चिकित्सकों ने बैठना भी शुरू कर दिया है। उसके बावजूद मरीजों को बाहर से दवाई लेनी पड़ रही है। कारण आयुष की ओपीडी में फॉर्मासिस्ट तैनात नहीं है। ऐसे में मरीजों के लिए एक समस्या खत्म होने के बाद दूसरी समस्या फिर से खड़ी हो गई है।
खुद दवाई ढोने को मजबूर आयुष डॉक्टर
फॉर्मासिस्ट न होने से आयुष डॉक्टरों को सीएमएसडी स्टोर से खुद दवाई ढोनी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन की ओर से डॉक्टरों को इसकी कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पताल आुयष चिकित्सा को लेकर कितने फिक्रमंद हैं।
वीसी ने कहा नहीं मिलता है बजट
केजीएमयू में आयुष की ओपीडी की बदहाल स्थिति के बारे में 4 पीएम अखबार में खबर छपने के बाद संस्थान के वीसी ने अपनी मजबूरियां बताई हैं। वीसी रविकांत का कहना है कि आयुष के लिए केजीएमयू को कोई बजट नहीं मिला है। यह सीधे आयुष मंत्रालय से जुड़ा हुआ है।

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