कैलेंडर से बापू की फोटो हटाकर लगाई मोदी की तस्वीर

खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर से मचा बवाल

खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर से गांधी जी की तस्वीर हटाने का हो रहा जोरदार विरोध
मोदी सरकार एक बार फिर अपने कारनामों से विवाद में फंसी

a14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। खादी भारत की हमेशा से एक अलग पहचान रही है। देश की जनता ने खादी अपनाकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इंकलाब और आजादी की मुहिम में जोरदार योगदान दिया था। राष्ट्रपति महात्मा गांधी ने ‘खादी अपनाओ’ का नारा दिया था। खादी ग्रामोद्योग हर साल अपना कैंलेडर निकालता है और साल 2017 का कैलेंडर भी निकाला है, लेकिन इस बार का कैलेंडर सुर्खियों में है क्योंकि यहां से गांधी जी की तस्वीर गायब है और उनकी जगह पीएम मोदी की तस्वीर है। जिसका सोशल मीडिया पर जोरदार विरोध किया जा रहा है। ट्विटर पर सैकड़ों लोगों ने कैलेंडर में गांधी जी की जगह मोदी की तस्वीर लगाने को शर्मनाक बताया है। साथ ही हैश टैग चरखा चोर मोदी का ट्रेंड भी तेजी से वायरल हो रहा है।
खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर का इतिहास बताता है कि अब तक इसके कैलेंडर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर रहती थी, जो चरखा चलाते और सूत कातते हुए दिखाई पड़ते थे। लेकिन इस बार चरखे पर पीएम मोदी की तस्वीर दिखाई पड़ रही है। इस वजह से कैलेंडर चर्चा का विषय बना हुआ है। खादी ग्रामोद्योग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि ऐसा पहले भी होता रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी खादी ग्राम उद्योग के ब्रांड एंबेसडर हैं और खादी के प्रति उन्होंने दुनिया भर के लोगों का ध्यान दिलाया है, जबकि विनय कुमार के बयान से इतर सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो चुकी है।
ट्विटर पर हैश टैग चरखा चोर मोदी लिखकर लोगों ने विरोध दर्ज किया है। लोगों ने मोदी को निशाने पर लेते हुए अलग-अलग ट्वीट किए हैं और उनका कहना है कि यह बेहद निराशाजनक है। ट्विटर पर आस्था मित्तल ने लिखा यह बेहद शर्मनाक है। गौरव ने लिखा खादी पहनना पेशा नहीं बल्कि विचारधारा है। गांधी जी ने कभी 10 लाख का सूट नहीं पहना।

तुषार गांधी भी दुखी
गांधीजी के प्रपौत्र तुषार गांधी भी कैलेंडर से बापू का चित्र हटाये जाने से काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है कि बापू अब खादी विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन (केवीआईसी) को राम-राम कह दें। यूं भी केवीआईसी ने खादी और बापू दोनों की विरासत को कमजोर ही किया है। लिहाजा मोदी को चाहिए कि वो इस कमीशन को निरस्त कर दें। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी को 10 लाख के सूट पसंद हैं और शायद खादी भी गरीबों की पहुंच से बाहर हो गई है, इसलिए केवीआईसी को बंद कर देना चाहिए।

साइकिल पर ’आखिरी जंग‘, चुनाव आयोग के फैसले पर टिकीं नजरें

नामी वकीलों के साथ चुनाव आयोग पहुंचे मुलायम

अखिलेश खेमे के रामगोपाल भी मौजूद दोनों पक्षों ने रखी दलील
आयोग जल्द देगा फैसला इसकी उम्मीद कम

लखनऊ। सपा में जारी घमासान अपने अंतिम चरण में है। पार्टी और इसके चुनाव चिन्ह साइकिल को लेकर चुनाव आयोग में मुलायम और अखिलेश खेमों ने अपना-अपना पक्ष रख दिया है। सबकी निगाहें आयोग के फैसले पर टिकीं हैं। शिवपाल यादव के साथ मुलायम सिंह यादव और अखिलेश खेमे से रामगोपाल यादव समर्थकों के साथ आयोग पहुंच चुके हैं।
आज मुलायम सिंह यादव अपने काफिले के साथ चुनाव आयोग पहुंचे। उनके साथ तीन नामी वकील मोहन परसरन, एमसी ढींगरा, एन हरिहरन हैं। ये आयोग के सामने मुलायम सिंह का पक्ष रख रहे हैं, हालांकि आयोग जाने से पहले मुलायम सिंह यादव ने कहा कि कार्यकर्ता भरोसा रखे कि वे पार्टी को नहीं टूटने देंगे। वहीं आयोग जाने से पूर्व रामगोपाल यादव ने अपने आवास पर बैठक की। बैठक के बाद रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल, किरणमय नंदा, अभिषेक मिश्रा, सुरेंद्र यादव, अक्षय यादव आदि आयोग पहुंचे। उन्होंने आयोग के सामने पार्टी और चुनाव चिन्ह को लेकर अपना पक्ष रखा। रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग से चुनाव की तारीखें करीब होने का हवाला देते हुए इस मामले में जल्द फैसला देने की अपील की। चुनाव आयोग में फैसले से पहले दोनों खेमों ने कानूनी राय ली। हालांकि गुरुवार को भी दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश जारी रही। अंतिम समय में दोनों गुटों को आपस में बातकर आयोग से आवेदन वापस लेने का आग्रह किया गया था।
जिस तरह से दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं उससे अब इस बात की संभावना कम होती जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता हो पायेगा। उधर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सीएम अखिलेश यादव से बात हुई। कांग्रेस और अखिलेश यादव गठबंधन की बात को आगे बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर साइकिल चुनाव चिन्ह फ्रीज हुआ तो अखिलेश खेमा तत्काल नया चुनाव चिन्ह लेकर कांग्रेस के साथ साझा घोषणा पत्र तैयार करेगा।

सभी नेता अपने बेटों को बढ़ा रहे हैं तो नेताजी आप क्यों नहीं
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को एक और बड़े सवाल से जूझना पड़ रहा है। अजित सिंह मुलायम सिंह के कई बार फोन करने के बावजूद लाइन पर नहीं आए। कुछ बड़े नेताओं ने नेताजी से कहा चाहे रामगोपाल हों या फिर शिवपाल यादव। सभी छह महीनों से अपने बेटों को आगे बढ़ा रहे हैं तो आप क्यों अपने बेटे के पीछे पड़े हैं, जाहिर है यह ऐसे चुभते हुए सवाल हैं, जिनसे मुलायम सिंह परेशान हो रहे हैं।

क्या हैं विकल्प
चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। ऐसे में चुनाव चिह्न पर आयोग को जल्द फैसला लेना होगा। यदि तत्काल फैसला नहीं हुआ तो दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आयोग दे सकता है। इसके अलावा यदि कोई खेमा अपना दावा वापस ले लेता है तो विवाद खत्म हो जाएगा ।

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