कैबिनेट मीटिंग में 33 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज लोक भवन में कैबिनेट की मीटिंग बुलाई, जिसमें सरकार ने 33 प्रस्तावों को मंजूरी दी। बैठक का आयोजन सुबह 10 बजे से लोक भवन में किया गया था। कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी। कैबिनेट मीटिंग में लखनऊ की डॉ. राम मनोहर लोहिया लॉ यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके अलावा जरार बांध, ललितपुर पुनरीक्षित लागत प्रस्ताव, कचनौदा बांध, ललितपुर के अवशेष कार्यों की रिवाइज्ड परियोजना लागत प्रस्ताव , नगर पालिका राठ, जिला हमीरपुर की सीमा विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी मिली। वहीं वृन्दावन और बृज क्षेत्र में सदनों की निराश्रित महिलाओं और विधवाओं के लिए सुविधाओं में आवश्यक सुधार प्रस्ताव को मंजूरी, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज के निर्माण की रिवाइज्ड परियोजना प्रस्ताव , राजकीय उद्यान जवाहरबाग, मथुरा का जीर्णोद्धार करते हुए, लोहिया पार्क की तर्ज पर विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट मीटिंग में भदोही में कारपेट मार्ट के प्रबन्धन और संचालन की व्यवस्था का प्रस्ताव भी पारित किया गया। वहीं स्वाधार योजना के संशोधित फण्डिंग पैटर्न का प्रस्ताव तथा रूरल बैकयार्ड पोल्ट्री डेवलेपमेण्ट कार्यक्रम की गाइड लाइन्स के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

कागजों पर चल रहे राजनीतिक दलों पर चाबुक चलायेगा चुनाव आयोग
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने 200 ऐसे राजनीतिक दलों की सूची तैयार की है, जो सिर्फ कागजों पर हैं। आयोग इनकी मान्यता रद करेगा। आयोग को अंदेशा है कि इन पार्टियों का इस्तेमाल मनी लॉन्डरिंग के लिए हो रहा है, इसलिए वह इनके बारे में इनकम टैक्स विभाग को भी जानकारी भेजेगा ताकि वह आगे की कार्रवाई कर सके। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मान्यता रद होने वाली पार्टियों के बारे में आगे की कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग अगले कुछ ही दिनों में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी)को भेजेगा। ये ऐसे राजनीतिक दल हैं, जिन्होंने 2005 से अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है और इनका अस्तित्व महज कागजों पर है। चुनाव आयोग के अधकिारियों को अंदेशा है कि ऐसे कई राजनीतिक दलों का इस्तेमाल मनी लॉन्डरिंग के लिए हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह एक शुरुआत है, इसके बाद चुनाव आयोग सभी अगंभीर राजनीतिक दलों पर कार्रवाई करेगा। ऐसे कई राजनीतिक दल इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते और करते भी होंगे तो उसकी कॉपी चुनाव आयोग को नहीं भेजते हैं। सीबीडीटी को इसकी जानकारी इसलिए भेजी जा रही है ताकि वह इस बात की जांच कर सके कि इन पार्टियों द्वारा किस तरह का वित्तीय लेनदेन किया गया है और उन्हें मिलने वाला टैक्स बेनिफिट खत्म किया जा सके। चुनाव आयोग को लगता है कि इस तरह की सख्ती से ऐसे लोग हतोत्साहित होंगे जो राजनीतिक दल का गठन सिर्फ काले धन को सफेद करने के लिए करते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल सात राष्ट्रीय राजनीतिक दल, 58 क्षेत्रीय दल और अन्य 1786 ऐसे रजिस्टर्ड दल हैं, जिनकी कोई पहचान नहीं है। ऐसे राजनीतिक दलों का चलन बंद करने के लिए साल 2004 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। लेकिन इस सुझाव पर अभी तक अमल नहीं किया गया है।

लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं करती मोदी सरकार : कांग्रेस
लखनऊ। कांग्रेस ने नोटबंदी की मंशा को लेकर मोदी सरकार की नीयत पर सवाल उठाएं हैं। प्रवक्ता डॉ. हिलाल अहमद ने कहा है कि मोदी सरकार की मंशा यदि भ्रष्टïाचार को रोकना है, तो वह लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही है। प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार की यह गरीबों के विरूद्ध नीति को देश की जनता भलीभांति समझ रही है। वह इसका करारा जवाब ईवीएम मशीन के द्वारा भाजपा को देगी। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार की नोट बंदी के 42 दिन बाद भी हालात बुरे हैं। सरकार अभी भी नोटबंदी का उद्देश्य स्पष्ट नहीं कर पाई है। रिजर्व बैंक आफ इण्डिया के रोजाना बदलते आदेशों से बी नोटबंदी की मंशा स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का उद्देश्य भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, नकली करेंसी तथा आतंकवादियों से लडऩा तो नहीं था। यदि मोदी सरकार का भ्रष्टाचार से लडऩा उद्देश्य है तो वह लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं करते हैं। उन्होने आरोप लगाया है कि इस सम्पूर्ण व्यवस्था से समस्त छोटे उद्यमियों का व्यापार पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। किसान अपनी फसल, सब्जी, फल इत्यादि बाजारों में बेचने में असमर्थ हैं। प्रधानमंत्री को दीवाली के पटाखे, खिलौने एवं रोशनी की लडिय़ों में तो चीन दिखाई देता है परन्तु वे जिस वित्तीय कम्पनी पेटीएम को लाभ पहुंचा रहे हैं, उसमें उन्हें चीनी निवेश क्यों नहीं दिखता है।

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