कैदियों की सुरक्षा

तिहाड़ जेल मेंsanjay sharma editor5 कैदियों के भागने की भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। यहां से काफी सनसनीखेज ढंग से कुख्यात अपराधी चाल्र्स शोभराज व पूर्व डकैत और सांसद फूलन देवी का हत्यारा शेर सिंह राणा भी भाग चुके हैं। तिहाड़ जेल की हालत अन्य जेलों जैसी नहीं है कि जहां वीआईपी कैदियों को फाइव स्टार सुुविधाएं मुहैया करायी जाती हों।

एशिया की सबसे सुरक्षित तिहाड़ जेल एक बार फिर चर्चा में है। तिहाड़ अपनी सुरक्षा कारणों से जाना जाता है लेकिन एक बार फिर तिहाड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। तिहाड़ में सलाखों के पीछे एक कैदी की हत्या कर दी गई। वह कैदी हाई रिस्क वार्ड में बंद था, जहां यह वारदात हुई। मृतक कैदी पिछले सात साल से जेल में बंद था। दो दिन पहले कैदी की आत्महत्या के बाद अब कैदी की हत्या से तिहाड़ की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।
तिहाड़ जेल देश की राजधानी की प्रमुख जेल तो है ही यहां कई खतरनाक अपराधियों से लेकर कई वीआईपी कैदी भी बंद रहते हैं। देश की अतिसुरक्षित जेलों में इस तरह की घटनाओं से जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। अब तो गाहे-बगाहे तिहाड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो जाता है। जुलाई माह में तिहाड़ जेल से दो कैदी फरार हो गए थे। इन दोनों कैदियों द्वारा जेल की तीन दीवारों को फांदने से यह साफ हो जाता है कि इस जेल में सुरक्षाकर्मी ठीक ढंग से निगरानी नहीं कर रहे थे। अगर ऐसा होता तो ये आसानी से पकड़े जाते। गौरतलब है की इस साल इससे पहले भी रविन्द्र नाम के कैदी की जेल में हत्या कर दी गयी थी। ऐसे मामले अक्सर जेल के भीतर वर्चस्व की लड़ाई के चलते होते हैं। जेल के अंदर हार्डकोर क्रिमिनल्स के बीच वर्चस्व की लड़ाई के चलते ऐसी वारदात को अंजाम दिया जाता है। ऐसे में जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह इन सब पर प्रतिबंध लगाए।
तिहाड़ जेल में कैदियों के भागने की भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। यहां से काफी सनसनीखेज ढंग से कुख्यात अपराधी चाल्र्स शोभराज व पूर्व डकैत और सांसद फूलन देवी का हत्यारा शेर सिंह राणा भी भाग चुके हैं। तिहाड़ जेल की हालत अन्य जेलों जैसी नहीं है कि जहां वीआईपी कैदियों को फाइव स्टार सुुविधाएं मुहैया करायी जाती हों। तिहाड़ जेल अपने अनुशासन और नियम के लिए जानी जाती रही है। एक बात तो है कि भारतीय जेल व्यवस्था में जो खामियां हैं, वो तिहाड़ जेल में भी देखने को मिलती हैं। भारत के आंतरिक सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को भी तिहाड़ में देखा जा सकता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि तिहाड़ जेल में जितने कैदियों की जगह है, उससे लगभग दोगुने कैदी यहां बंद हैं। बाकी जेलों की तरह इन कैदियों में भी ज्यादा बड़ी संख्या विचाराधीन कैदियों की है। तिहाड़ जेल की क्षमता 6200 कैदियों की है जबकि इसमें फिलहाल 14 हजार से ज्यादा कैदी हैं। 212 एकड़ में बनी इस जेल में कैदियों की निगरानी के लिए 550 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो संख्या के लिहाज से काफी कम हैं। सरकार को चाक-चौबंद सुरक्षा के लिए इसे बढ़ाना चाहिए और ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

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