केजीएमयू से मरीजों का मोह भंग

मरीज के परिजनों ने कहा प्रॉइवेट में इलाज करवा लूंगा लेकिन यहां नहीं

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अभी हाल में एक पत्रिका की ओर से केजीएमयू को देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में दूसरे स्थान पर रखा गया है लेकिन यहां की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहां डॉक्टरों की ओर से मरीजों और तीमारदारों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जाता है, यह किसी से छुपा नहीं है। इसका एक उदाहरण केजीएमयू के ईएनटी विभाग में देखने को मिला। मरीज के पिता डॉक्टरों के अभद्र व्यवहार और इलाज से इतने दुखी थे कि उन्होंने केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार को प्रार्थनापत्र लिखकर मरीज डिस्चार्ज करने की गुहार लगाई।
मरीज के पिता का कहना है कि हम प्रॉइवेट अस्पताल में इलाज करवा लेंगे लेकिन यहां पर हम अपने बच्चे की जान खतरे में नहीं डाल सकते। घंटों हो जाते हैं, डॉक्टर देखने तक नहीं आते। डॉक्टरों के आने पर जब उनसे मरीज को देखने के लिए कहा जाता है तो हम लोगों से अभद्रता पूर्र्वक बात की जाती है। दो दिन हो गए, मरीज की हालत और बिगड़ती जा रही है लेकिन डॉक्टर कुछ बताने को तैयार नहीं। ज्यादा पूछने पर डॉक्टरों की ओर से इतनी अभद्रता से पेश आया जाता है कि डर लगता है कि कहीं पीट न दें। डॉक्टरों की ओर से मरीज के साथ इतनी बेरहमी से पेश आया जाता है कि जैसे मरीज नहीं कोई जानवर है। दो दिन पहले सीतापुर निवासी विजय मिश्रा को गंभीर हालत में केजीएमयू को ईएनटी विभाग में भर्ती करवाया गया था। जहां पर डॉक्टरों की अभद्रता और बेरहमी सेमरीज के पिता इतने परेशान हो गये कि उन्होंने मरीज को डिस्चार्ज करने की गुहार लगाई है।
बाहर से लानी पड़ी दवाईयां
केजीएमयू को दवाइयों के लिए करोड़ों का बजट मिलता है ताकि गरीबों को मुफ्त इलाज मिल सके। इसके बावजूद डॉक्टरों की ओर से बाहर से दवाईयां लिखी जा रही हैं। कमीशन के चक्कर में घपले का खेल लगातार चल रहा है।

अनहोनी का है डर
ईएनटी विभाग के डॉक्टर मरीज के साथ जिस बेरहमी से पेश आते हैं, उससे विजय मिश्रा के पिता भयभीत हैं। उन्हें अपने पुत्र के साथ अनहोनी होने का डर है। इसलिए उन्होंने जल्दी से जल्दी मरीज को डिस्चार्ज कराने की मांग की है।

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