केजीएमयू में हो रही डेंगू की जांच के नाम पर वसूली

  • डेंगू के इलाज में स्वास्थ्य महकमे की असलियत हुई जगजाहिर
  • शासन की तरफ से दिया गया था डेंगू के मरीजों की मुफ्त जांच का आदेश

 वीरेंद्र पांडेय
8लखनऊ। किंगजार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में डेंगू के मरीजों से जांच के नाम पर खुलेआम वसूली की जा रही है। बुखार के लक्षण वाले मरीजों की डेंगू जांच करवाने के नाम पर प्रति मरीज 600-700 रुपये लिये जा रहे हैं। इन मरीजों को बाकायदा पर्ची भी दी जा रही है। जबकि डेंगू के प्रकोप और भयावहता को गंभीरता से लेकर स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने डेंगू के मरीजों की नि:शुल्क जांच करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा मनमानी करने पर आमादा है।
राजधानी में डेंगू का आतंक तेजी से फैल रहा है। जिले में रहस्यमयी बुखार की चपेट में आकर रोजाना 2-4 मरीजों की मौत हो रही है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में रोजाना दर्जनों मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके अलावा डेंगू की चपेट में आकर 65 से ज्यादा लोगों ने अपनी जांन गवां दी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा सबक नहीं ले रहा है। डेंगू पीडि़त मरीजों की जांच और इलाज में घोर लापरवाही बरती जा रही है। यह सब हो रहा राजधानी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है जब राजधानी में चिकित्सा व्यवस्था का यह हाल है तो बाकी जिलों का क्या होगा। फिलहाल ताजा मामला केजीएमयू का सामने आया है। जहां डेंगू की जांच के नाम पर मरीजों से खुलेआम पैसे लिये जा रहे हैं। मरीजों को लूटने का पुख्ता इंतजाम कर्मचारियों ने कर रखा है। नि:शुल्क जांच का सपना लेकर अस्पताल पहुंचने वाले लोगों से जांच का शुल्क लेकर बाकायदा रसीद दी जाती है। जबकि शासन से डेंगू के मरीजों की जांच से लेकर इलाज तक मुफ्त करने का आदेश दिया है। नक्खास मोहल्ले की फरजाना बानों को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा था। उन्हें परिजनों ने पास के ही अस्पताल में दिखाया। वहां चिकित्सकों की काउंसिलिंग में मरीज के अंदर डेंगू के लक्षण नजर आये। इसलिए उसे केजीएमयू भेज दिया गया। केजीएमयू में अस्पताल के कर्मचारियों ने मरीज के खून का नमूना लेने के साथ ही जांच फीस के नाम पर 600 रूपये की मांग की गयी। यह सुनने के बाद जब मरीज के परिजनों ने कहा कि डेंगू की जांच तो यहां पर मुफ्त में होती है, फिर आप पैसे क्यों मांग रहे हैं। तो वहां काउंटर पर बैठे कर्मचारियों ने जवाब दिया कि जो जांच आपकी होनी है, उस जांच के पैसे पड़ते हैं। इस पर मरीज के परिजनों ने जांच केे लिए 600 रुपये दिये। उसके बाद कर्मचारी ने बाकायदा जांच शुल्क की रशीद भी दी।

डेंगू के मरीजों को भर्ती करने की खुल रही पोल

डेंगू,मलेरिया व तेज बुखार के कारण सरकारी अस्पताल फुल हैं। बिस्तरों की कमी के कारण जमीन व स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज हो रहा है। शहर के कुछ अस्पतालों में बिस्तर खाली होने तक मरीजों की भर्ती ही रोक दी है। ऐसे में गंभीर मरीजों को इलाज मिलने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रायबरेली रोड स्थित आवास विकास कालोनी निवासी राकेश अपने भाई अनिल को लेकर शुक्रवार की शाम को सिविल अस्पताल पहुंचे थे। राकेश ने भाई को इमरजेन्सी के बाहर बिठाया और जांच के कागज लेकर इमरजेंसी ओपीडी में चिकित्सकों के पास पहुंचे थे। वहां उन्होंने चिकित्सकों से मरीज को भर्ती करने के लिए कहा, जिस पर वहां मौजूद चिकित्सकों ने बहुत भीड़ होने की बात कहकर इंतजार करने को कह दिया। इधर भाई की हालत बिगड़ता देख राकेश से नहीं रहा गया और वह तुरंत मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गये।

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