केजीएमयू में भ्रष्टïाचार की पोल खोलना डॉ. संतोष को पड़ रहा भारी

  • एक्सीडेंट के झूठे मामले में फंसाकर परेशान किये जाने का आरोप

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Capture5लखनऊ। राजधानी के किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार का विरोध करना शिक्षक संघ के महासचिव व रेस्पारेटरी मेडिसिन के प्रो. डॉ. संतोष को भारी पड़ रहा है। उनके खिलाफ साजिशों का दौर शुरू हो गया है। जानकारों की माने तो उनको फंसाने के लिए आये दिन नये मामलों को खोजा जा रहा है, इसका मकसद उनको चुप कराना है। इसी वजह से उन पर एक्सीडेंट के मामले में लगे आरोपों की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया गया है। यह आदेश एडीजी ने उनकी तरफ से पेश सबूतों को देखने के बाद दिया है।
डॉ. संतोष पर लगभग एक वर्ष पहले साइकिल सवार विश्राम नाम के आदमी को अपनी कार से एक्सीडेंट करने का आरोप लगाकर हजरतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी, जिसमें उनके खिलाफ जार्चशीट भी दाखिल कर दी गयी थी। लेकिन चिकित्सक द्वारा अपने बेगुनाही का सबूत पेश करने के बाद एडीजी ने पूरे मामले की दोबारा जांच के आदेश दिये हैं। दरअसल डॉ. संतोष ने पत्र के माध्यम से एडीजी को पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया था कि इस घटना से मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है। किसी न किसी षड्यंत्र के तहत मुझे एक्सीडेंट के मामले में फंसाया जा रहा है, इसीलिए एडीजी ने दोबारा जांच के आदेश दे दिये हैं।

पहले भी दर्ज हो चुकीहै प्राथमिकी

डॉ. संतोष का खौफ केजीएमयू के भ्रष्टïाचारियों को सता रहा है। इसी वजह से उन पर आरोपों की झड़ी लगा दी गई है। एक्सीडेंट का मामला तो बानगी मात्र है। इससे पहले भी इन पर एक चिकित्सक ने अपने ऊपर लगाये गये आरोपों को फर्जी बताया था। साथ ही उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी, जिसमें कहा गया था कि डॉ. संतोष ने उनके चिकित्सक होने के प्रमाण पत्रों पर गलत सवाल उठाया है। जो कि चिकित्सक की छवि को धूमिल करने की साजिश है।
इंस्पेक्टर विजयमल पर लगाया फंसाने का आरोप
डॉ. संतोष ने हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर विजयमल पर केजीएमयू के कुछ विरोधियों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए एडीजी से शिकायत की है। साथ ही अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज की सीडी भी शिकायतपत्र के साथ एडीजी को भेजी है।

क्या था मामला

निशातगंज निवासी विश्राम की दूरदर्शन के सामने 22 जून 2015 को किसी गाड़ी ने टक्कर मार दी थी। वहां मौजूद चौकीदार ने 100 नम्बर पर फोन कर पुलिस को बुलाया था, जिसके बाद विश्राम को चोटिल अवस्था में सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल में थोड़ी देर इलाज के बाद ट्रामा सेन्टर भेज दिया गया था। ट्रामा सेन्टर में विश्राम का चार दिन इलाज करने के बाद बलरामपुर अस्पताल में भर्ती क राया गया, जहां उसकी मौत हो गयी।

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