केजीएमयू में बुरा हाल है ठेकाकर्मियों का

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हालत बंधुआ मजदूरों जैसी आन्दोलन की तैयारी में ठेका कर्मचारी
आन्दोलन में ठेका कर्मचारियों का साथ देगा पैरामेडिकल स्टाफ

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी ठेकाकर्मियों की हालत बंधुआ मजदूरों जैसी है। इनका कोई हाल पूछने वाला नही है। ये ठेका कर्मचारी जिस माहौल में काम करते हैं वहां उन पर हमेशा संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है। सूत्रों की मानें तो इससे पहले संक्रमण के चलते कई ठेका कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। आज उनका परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। हालत ये है कि ठेकाकर्मी यदि बीमार पड़ जाये या कोई असाध्य रोग हो जाये, तो इलाज के नाम पर केजीएमयू की तरफ से किसी प्रकार की सुविधा देना तो दूर उनका इलाज भी बिना पैसे के नहीं होता है, क्योंकि केजीएमयू प्रशासन अपने यहां सिर्फ नियमित कर्मचारियों को नि:शुल्क इलाज की सारी सुविधा उपलब्ध कराता है। ठेका कर्मचारियों को केजीएमयू प्रशासन अपना कर्मचारी मानता ही नहीं है। केजीएमयू प्रशासन का मानना है कि वो कम्पनी के कर्मचारी हैं।
केजीएमयू में चतुर्थ श्रेणी के ठेका कर्मचारियों की महीने भर की कुल कमाई 5000 से भी कम है। ऐसे में उनको अपना घर-परिवार चलाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुविधाओं को लेकर ठेका कर्मचारियों ने कई बार केजीएमयू प्रशासन को अवगत कराया लेकिन हुआ कुछ नहीं। केजीएमयू के इस सौतेले व्यवहार के चलते ठेका कर्मचारियों के अन्दर रोष व्याप्त है। सूत्रों की मानें तो आने वाले कुछ समय में यह रोष आन्दोलन का रूप ले सकता है। केजीएमयू कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राजित राम का कहना है कि जिन परिस्थितियों में संविदाकर्मी काम करते हैं, उसके हिसाब से उनको पैसा न के बराबर मिलता है। जान पर खतरा अलग से बना रहता है। इसके लिए हम लोगों ने प्रधान मंत्री तथा मुख्यमंत्री तक के सामने अपनी समस्या रखी थी। जिसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने केजीएमयू प्रशासन को पत्र लिख कर ठेका कर्मचारियों की समस्या निस्तारण के संबंध में जानकारी भी मांगी थी। लेकिन उस पत्र का जवाब केजीएमयू प्रशासन द्वारा जवाब नहीं दिया गया। वहीं प्रधानमंत्री कार्र्यालय से अपनी समस्याओं को ऑनलाइन भेजनेके लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि हम लोग जल्द ही दो सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे। उसके बाद मांगे पूरी न होने पर आन्दोलन के लिए मजबूर होंगे। संविदा कर्मचारियों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ भी आन्दोलन पर जायेगा।

केजीएमयू प्रशासन का दोहरा मापदण्ड
राजित राम का कहना है कि जब यहां के चिकित्सकों का पीजीआई के चिकित्सकों के समान वेतन भत्ता मिलता है, तो कर्मचारियों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को क्यों नहीं दिया जाता। मुख्यमंत्री जी ने लोहिया संस्थान के कर्मचारियों का वेतन भत्ता पीजीआई के कर्मचारियों के समान करने की घोषणा की है। हम लोग भी उनसे मांग करेंगे कि हमें भी पीजीआई के कर्मचारियों के समान वेतन भत्ता दिया जाये।

रिटायर्ड होने के पहले हो गयी मौत
राजित राम ने बताया कि शव विच्छेदन गृह मे ज्यादातर कर्मचारी अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाये। उससे पहले ही उनकी बीमारी के चलते मौत हो गयी। नियमित कर्मचारियों के परिवार के लोगों को तो नौकरी मिल गयी लेकिन जो ठेका कर्मचारी थे उनके परिवार आज भी भटक रहे हैं। ठेका कर्मचारियों का कोई भविष्य नही है। वो अपनी नौकरी को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं। राजित राम ने कहा कि हमारी दो मांगे हैं। पीजीआई के कर्मचारियों के समान वेतन भत्ता और संविदा कर्मचारियों के नियमित किया जाए।

निजी कम्पनी रखती है कर्मचारी
ठेका कर्मचारियों को रखने का काम केजीएमयू प्रशासन ने निजी कम्पनी को दे रखा है, जिसमें पैरामेडिकल स्टाफ के लिए अस्पताल प्रशासन की तरफ से 7800 रुपये तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 6300 रु. भुगतान का प्रावधान कर रखा है। लेकिन ठेका कर्मियों के हाथ में पांच हजार से भी कम पैसा आता है।

आंदोलन से बढ़ेगी समस्या

केजीएमयू में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही लगभग 4000 मरीज वार्र्डों में भर्ती रहते हैं। जिस दिन यहां के ठेकाकर्मी आन्दोलन पर चले गये और काम ठप कर दिया, उस दिन हजारों मरीजों के इलाज में केजीएमयू प्रशासन के पसीने छूट जायेंगे। इसका खामियाजा यहां इलाज के लिए आये मरीजों का उठाना पड़ेगा।

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