केजीएमयू में बिना जुगाड़ नहीं मिलता इलाज

  • रसूखदारों के फोन पर चिकित्सक होते हैं तत्पर
  • तड़पते मरीजों को भी चिकित्सा मुहैया कराने में होती है आनाकानी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के माने-जाने केजीएमयू की सूचिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। हाल यह है कि यहां बिना जुगाड़ के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। रसूखदारों के फोन पर ही अधिकांश चिकित्सक इलाज को तत्पर होते हैं। इससे आम आदमी को इलाज मिलने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। बावजूद इसके ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ यहां का प्रबंधन मौन है।

केस-1

जानकीपुरम निवासी सत्यप्रकाश कुलश्रेष्ठï की मंगलवार सुबह सडक़ दुर्घटना में पसली की हड्डी टूट गई। परिजन मरीज को लेकर ट्रामा सेन्टर पहुंचे। ट्रामा की इमरजेन्सी में मौजूद चिकित्सकों ने मरीज को ऊपर के वार्ड में शिफ्ट कर दिया। लेकिन दो घंटे बाद भी मरीज को देखने कोई चिकित्सक नहीं आया। जिस पर परिजनों ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एससी.तिवारी को फोन कर समस्या बताई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में ट्रामा के डॉ. हैदर अब्बास के हस्तक्षेप पर मरीज का इलाज शुरू हो सका।

केस-2

गोमतीनगर निवासी हर्षित को आंतों की समस्या के चलते ट्रामा में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने आपरेशन की बात की। लेकिन 12 घंटे बीत जाने के बाद भी किसी प्रकार का इलाज शुरू नहीं हो सका। इसकी भी शिकायत डॉ. हैदर अब्बास से की गयी जिसके बाद मरीज का इलाज शुरू हो सका।

नहीं लगा जुगाड़ मरीज गया निजी अस्पताल

मंगलवार को सीतापुर के मच्छरेहटा निवासी जिया (30) को इलाज के लिए परिजन ट्रामा लेकर पहुंचे। सुबह से दोपहर तक मरीज को भर्ती कराने के लिए जूझते रहे। लेकिन सफल नहीं हो सके। परिजनों ने बताया कि जिया का
इलाज राजधानी के ही एक निजी अस्पताल में पिछले छ: महीने से चल रहा था। सोमवार की दोपहर हालत बिगडऩे पर परिजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे थे। चिकित्सकों ने गंभीर हालत में मरीज को ट्रामा सेन्टर भेज दिया। लेकिन यहां इमरजेन्सी में चिकित्सकों ने उसे कहीं और ले जाने की सलाह दी। वहीं, सिद्घार्थ नगर निवासी सरोज किडनी की समस्या से पीडि़त हैं। उनका इलाज गोरखपुर में चल रहा था। वहां के चिकित्सकों ने उन्हें डायलिसिस कराने की राय दी। बेहतर इलाज के लिए परिजन सरोज को लेकर ट्रामा सेन्टर आये थे। परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों ने देखने के बाद बताया कि ट्रामा सेन्टर में डायलिसिस दोपहर 2 बजे तक ही की जाती है, जबकि आपात स्थिति में इसकी सुविधा 24 घंटे की है। चिकित्सा न मिलने के कारण परिजन मरीज को लेकर विवेकानन्द अस्पताल चले गये।

Pin It