केजीएमयू में प्रोफेसर के पदों को लेकर मची अफरातफरी, डॉक्टरों ने किया हंगामा

एसजीपीजीआई के बराबर वेतन तो हुआ लेकिन बदल गया प्रोफेसर का मानक

कई शिक्षक पूरी कर चुके हैं प्रोफेसर की योग्यता

Captureकेजीएमयू प्रशासन की लापरवाही के कारण कई सालों से नहीं हुआ इंटरव्यू

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के डॉक्टरों का वेतन एजीपीजीआई के डॉक्टरों के बराबर हो गया है। इसी के साथ केजीएमयू में प्रोफेसर के लिए तय मानकों में भी बदलाव हो गया है। पहले जहां केजीएमयू में प्रोफेसर बनने के लिए 8 वर्ष का समय लगता था, वहीं अब यह समय 11 वर्ष का हो गया है। कई शिक्षकोंकी योग्यता प्रोफेसर के लिए पूरी हो चुकी थी। नये नियम के आने से शिक्षकों को प्रोफेसर बनाना खटाई में पड़ गया है। अब ऐसे शिक्षकों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि केजीएमयू प्रशासन की लापरवाही के कारण पिछले दो-तीन सालों से प्रोफेसर बनाने की प्रक्रिया पर ही रोक लगा दी गई थी जिसका खामियाजा अब योग्यता पूर्ण करने वाले शिक्षकों को झेलना पड़ रहा है।
दरअसल केजीएमयू के पुराने ढांचे के अनुसार शिक्षकों के पदोन्नति का क्रम के अनुसार पहले लेक्चरर, फिर असिस्टेंट प्रोफेसर, फिर एसोसिएट प्रोफेसर व उसके बाद प्रोफेसर का मानक था। जिसमें प्रोफेसर बनने में कुल 8 वर्ष का समय लगता था।
बीती 11 अगस्त को प्रदेश सरक ार ने केजीएमयू के डॉक्टरों का वेतन एसजीपीजीआई के बराबर किये जाने के घोषणा की थी। इस आदेश की विवेचना में केजीएमयू में लेक्चरर पद को समाप्त कर दिया गया था। साथ ही एडिशनल प्रोफेसर के पद को जोड़ा गया था। नये ढांचे के अुनसार असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 3 साल, एसोसिएट से एडिशनल चार साल, एडिशनल से प्रोफेसर चार साल यानी नये नियम के अनुसार कुल 10 वर्ष का समय लगना तय है। ऐसे में समस्या ये है कि जो चिकित्सक पहले से इस योग्यता को पूरा कर चुके हैं, उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया है।

केजीएमयू के डॉक्टरों का वेतन एसजीपीजीआई के चिकित्सकों के बराबर हो गया है इसलिये अब वहां के मानकों को भी मानना पड़ेगा। जो लोग विरोध कर रहे हैं, ऐसे लोग केवल मलाई मारना चाहते हैं। कम से कम तय नियम चिकित्सकों को मानने ही चाहिये।

– डॉ. विजय कुमार
चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू

चयन समिति की बैठक में हंगामा

सूत्रों के अनुसार प्रोफेसर के लिए नये नियम को लेकर केजीएमयू की चयन समिति की बैठक में चिकित्सकों ने जमकर हंगामा किया। चिकित्सकों ने आरोप लगाया कि केजीएमयू प्रशासन की लापरवाही के चलते पिछले दो सालों से प्रोफेसर बनने की प्रक्रिया रुकी हुई है। जिससे योग्य चिकित्सक अभी प्रोफेसर नहीं बन पाये हैं। एक डॉक्टर ऐसे भी है जो इससे पहले प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू दे चुके हैं वहीं नियम बदलने के कारण उन्होंने फिर एडिशनल प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू दिया है।

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