केजीएमयू में खुलेआम बाहरी लोग आकर करते हैं मरीजों की जांच

मरीजों से जांच करवाने के बदले वसूली जा रही मनमाना फीस, नहीं दी जाती रसीद
बाहरी व्यक्तियों से जांच करवाने का मामला सामने आने के बाद लीपापोती में जुटे अधिकारी

captureवीरेंद्र पांडेय
लखनऊ। केजीएमयू में ट्रामा सेन्टर, इमरजेंसी, ओपीडी और क्वीनमेरी अस्पताल तक में निजी पैथालॉजी के दलालों की सेंधमारी जारी है। यहां काम करने वाले कुछ चिकित्सकों की मिलीभगत से निजी पैथालॉजी के दलाल खुलेआम परिसर में घुसकर लोगों के खून के सैंपल लेने और ईसीजी समेत अन्य जांच करने का काम करते हैं। मरीजों से जांच करवाने की मनमानी फीस वसूली जाती है, लेकिन उसकी रसीद भी नहीं दी जाती है। ट्रामा सेंटर और ओपीडी में भी डॉक्टरों द्वारा बाहरी पैथालॉजी से जांच करवाने के लिए मरीजों को पर्ची या फिर पैथालॉजी सेंटर का विजिटिंग कार्ड दिया जाता है। इसकी वजह निजी पैथालॉजी से चिकित्सकों को मिलने वाला मोटा कमीशन है, जिसकी लालच में चिकित्सक मरीजों पर बाहरी पैथालॉजी से जांच करवाने का दबाव बनाते हैं। इस मामले में पीडि़त व्यक्तियों ने केजीएमयू प्रशासन से शिकायत भी की है, लेकिन किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ट्रामा सेन्टर में रोजाना ओपीडी के टाइम सुशील नाम का एक व्यक्ति अपने ईसीजी उपकरण लेकर आता है। वह ओपीडी में आने वाले मरीजों पर जबरन जांच करवाने का दबाव बनाता है। उसके पास केवल ईसीजी उपकरण रहता है, लेकिन वह किसी भी तरह की जांच तत्काल करवाने का आश्वासन देकर मरीजों को अपने जाल में फंसा लेता है। मरीजों के खून और अन्य सभी जांचों को अस्पताल में ही करवाने का लालच देकर मोटी रकम वसूली जाती है। किसी भी मरीज की ईसीजी करने के बदले 200 रुपये जांच फीस ली जाती है। इस तरह वह रोजाना 30 से 40 मरीजों का ईसीजी करता है लेकिन किसी भी मरीज को जांच फीस की रसीद नहीं देता है। जबकि ट्रामा सेंटर, ओपीडी और इमरजेंसी में इलाज के सिलसिले में आने वाले मरीजों को साफ निर्देश दिया गया है कि यदि उनसे किसी भी जांच का शुल्क वसूला जाता है, तो उससे तत्काल रसीद लेनी चाहिए। यदि रसीद के बिना शुल्क लिया जाता है, तो उसकी शिकायत केजीएमयू प्रशासन से की जा सकती है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जनता की शिकायतों के बाद भी केजीएमयू प्रशासन ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
जबरन की जाती है मरीजों की जांच
ट्रामा में भर्ती एक मरीज के परिजन राकेश बताते हैं कि केजीएमयू में मरीजों की जबरन जांच की जाती है। आपको ईसीजी जांच करवाने की जरूरत हो न हो जबरन मशीन लगाकर ईसीजी कर दिया जाता है, उसके बाद मरीज और परिजन पर दबाव डालकर प्रति रिपोर्ट 200 रुपये वसूले जाते हैं। जबकि मरीज का ईसीजी होना है, इस बारे में डॉक्टर ने न तो मरीज से कुछ कहा होता है और न ही उसके परिजनों से जांच करवाने की बात कही गई। इसके बावजूद मरीज का ईसीजी कर दिया जाता है जबकि ट्रामा सेंटर में भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज से जुड़ी सारी फाइल डॉक्टर के पास जमा होती है।
नीलमथा निवासी अवधेश तिवारी बताते हैं कि पिछले हफ्ते उनकी भतीजी का इलाज ट्रामा सेन्टर के न्यूरो सर्जरी विभाग में चल रहा था। उनके पास भी तथाकथित रेडियोलॉजिस्ट सुशील ईसीजी उपकरण के साथ पहुंचा था। उसने मरीज की ईसीजी जांचने की बात कही, तो परिजनों ने कहा कि इस बारे में तो किसी डॉक्टर ने सलाह नहीं दी है। इस पर वहां मौजूद सुशील के अन्य साथियों ने बताया कि यह लारी से मरीजों की जांच करने आए हैं इसलिए जल्दी से जांच करवा लीजिए। यदि बाहर जाकर जांच करवाएंगे तो विलंब होने के साथ ही जांच रिपोर्ट भी सही मिलेगी या गलत, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए उन लोगों ने ईसीजी करवा लिया। उसके बदले सुशील ने 200 रुपये भी वसूले लेकिन रसीद नहीं दी।

हर शुल्क के बदले रसीद देने का नियम

ट्रामा सेन्टर में सभी प्रकार की जांचों का लेखा-जोखा रखा जाता है। यदि मरीज से शुल्क वसूला जाता है, तो उसके बदले बकायदा रसीद दी जाती है। लेकिन केजीएमयू में खुलेआम जांच के नाम पर मरीजों से वसूली करने वालों ने संस्था के सारे नियमों की धज्जियां उड़ा दी हैं। यहां मरीजों के ब्लड सैम्पल से लेकर दवाओं तक में चिकित्सकों का कमीशन सेट है। इसी के चलते निजी पैथालॉजी व दवा दुकानों के दलाल खुलेआम केजीएमयू में घूमते रहते हैं। चौक स्थित चरक पैथालॉजी के कई नुमाइंदे केजीएमयू के विभिन्न वार्डो में रोजाना घूमते हुए मिल जायेंगे। कई बार तो वार्डो में भर्ती मरीजों से चिकित्सक खुद कहते हैं कि यहां की रिपोर्ट ठीक नहीं आई है, इसलिए दोबारा चरक या किसी अन्य पैथालॉजी से जांच करवा कर रिपोर्ट दिखाइए। उसके बाद मजबूरन मरीज को एक ही टेस्ट दो बार कराना पड़ता है।
प्रभारी ने जताई अनभिज्ञता

ट्रामा में बाहरी व्यक्ति द्वारा जांच किये जाने के मामले में जब ट्रामा सेन्टर इंचार्ज हैदर अब्बास से बात की गयी। उन्होंने सुशील के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी होने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि सुशील नाम के किसी भी रेडियोलॉजिस्ट या बाहरी व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं है। यदि खुलेआम कोई बाहरी व्यक्ति परिसर में घुसकर मरीजों की जबरन जांच करता है, उनसे मनमाना शुल्क लेकर रसीद भी नहीं देता है, तो मामला गंभीर है। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। जबकि ट्रामा सेंटर में तैनात एक अन्य कर्मचारी ने सुशील को केजीएमयू की हृदय रोग ईकाई लॉरी का कर्मचारी बताया। अब एक ही विभाग के दो व्यक्तियों का आरोपी को लेकर अलग-अलग बयान दाल में कुछ काला होने की ओर इशारा कर रहा है।

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