केजीएमयू में अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने की कोशिश

  • बिना टेंडर प्रक्रिया के दिया गया हापुड़ की संस्था को काम
  • बजट न होने की दुहाई देने वाले केजीएमयू के पास कमाई के सैकड़ों साधन

Captureवीरेन्द्र पांडेय
लखनऊ। थोथा चना बाजे घना की कहावत किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय पर पूरी तरह चरित्रार्थ हो रही है। यहां पर गरीब मरीजों को सस्ता और अच्छा इलाज मुहैया कराने का दवा सिर्फ कोरा अश्वासन ही नजर आता है। केजीएमयू में असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों के साथ ही बीपीएल कार्ड धारक मरीजों को मुफ्त इलाज देने की बात कही जाती है। इसके बावजूद बजट का अभाव होने की बात कहकर मरीजों को बार-बार तारीख देकर लौटा दिया जाता है। जबकि यहां पर पीपीपी मॉडल से बिना टेंडर के लगायी गयी मशीनों और उनसे सालाना होने वाली करोड़ो की कमाई की बात आती है तो केजीएमयू प्रशासन के अधिकारी उसे फायदे का सौदा बताते हैं। वहीं बिजली का बिल अत्याधुनिक मशीनों की खरीद और बीपीएल कोटे के मुफ्त इलाज में विश्वविद्यालय प्रशासन खुद को कंगाल बताता है। यह दोहरी नीति या दो मुंहा चेहरा सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहा है। इससे पहले कई बार बजट के अभाव में असाध्य रोगों जैसे किडनी की बीमारी से जूझते मरीजों की हकीकत सामने आयी है।
गौरतलब है कि केजीएमयू उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पोषित संस्था है, साथ ही भारत सरकार से भी समय-समय पर वित्तीय सहायता मिलती रहती है। इसके अलावा किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यहां के भू-भाग व अन्य संसाधनों का प्रयोग कर करोड़ों की आय प्राप्त की जाती है, जिसका कोई लेख-जोखा नहीं है। केजीएमयू के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केजीएमयू प्रशासन के सहयोग से निजी व्यवसायी यहां की जमीन का उपयोग कर अपना व्यवसाय जमाने में लगे हंै और यहीं के एक बड़े साहब को फायदा पंहुचाया जा रहा है। इसके बावजूद मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हंै।
न्यू ओपीडी में शुरू होने वाली एक्स-रे तथा अल्ट्रासाउण्ड की जांच जिन मशीनों द्वारा की जायेगी। उसको एक संस्था ने लगवाया है। यहां पर काम करने वाला स्टाफ में चिकित्सक केजीएमयू के होंगे तथा तकनीशियन संस्था के होंगे।
बिना टेंडर के दी गई मशीन लगाने की अनुमति
जानकारों की माने तो किसी भी संस्था में मशीनों की खरीद फरोख्त और नियुक्ति संबंधी काम टेंडर निकालकर ही किया जाता है। अपनी मर्र्जी से बिना निविदा निकाले किसी भी कंपनी को मनमाने ढंग से मशीनें खरीदने का ठेका देना और बिना किसी प्रतिस्पर्धी के संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाने का काम नियमों के खिलाफ माना जाता है। केजीएमयू ने अल्ट्रासाउण्ड और एक्सरे मशीनों को लगाने के लिए जमीनें मुहैया करवाई हैं। इनका न तो कोई टेंडर हुआ और न ही मशीन लगाने वाली संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धी का परीक्षण कराया गया। केजीएमयू प्रशासन ने गुपचुप तरीके से हापुड़ की एक संस्था को मशीनें लगाने की अनुमति दे दी। इससे विभाग में मशीनें लगाने का टेंडर निकलने का इंतजार करने वाले अन्य तमाम संगठन काफी नाराज हैं। इन लोगों ने केजीएमयू प्रशासन के अधिकारियों के फैसले का विरोध किया है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी ऐसी किसी भी शिकायत से इंकार करते हैं।

एमआरआई , सीटी स्कैन,एक्स-रे तथा पैथालॉजी जांच करने वाली कोई संस्था नहीं है बल्कि पीपीपी मॉडल पर काम लिया जा रहा है। इससे मरीजों के साथ ही केजीएमयू को भी लाभ मिलता है। अभी जो एक्स-रे तथा अल्ट्रासाउण्ड जांच के लिए मशीन लगायी गयी हैं, वो भी पीपीपी मॉडल पर है। इससे मरीजों को तो फायदा होगा ही साथ ही केजीएमयू को भी अर्थिक लाभ मिलेगा।
डॉ. एससी. तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, केजीएमयू

मरीजों को नहीं मिल पा रहा समय से इलाज

आवश्यक जांचों में एमआरआई ,सीटी स्कैन,एक्सरे पैथालॉजी तथा फारमेसी आदि का संचालन निजी व्यसायियों द्वारा किया जा रहा है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में न्यू ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे मरीजों को फायदा मिलता है , या फिर दर-दर भटकना पड़ता है। न्यू ओपीडी में इलाज के लिए आये मरीजों को कुछ दिनों बाद एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियो डायग्नॉसिस विभाग नहीं जाना होगा। बल्कि केजीएमयू ने यहां पर अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मशीन इंस्टॉल करा दी है। यह सारे उपकरण हापुड़ की एक संस्था द्वारा लगाये गये हैं। केजीएमयू का दवा है कि जहां एक तरफ मरीजों को जांच में आसानी होगी वहीं केजीएमयू को भी लाभ मिलेगा। लेकिन अभी रजिस्ट्रेशन न होने से एक्स-रे चालू नहीं किया गया है, जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना है। उम्मीद है कि जल्द ही इन दोनों मशीनों से जांच होने लगेगी। न्यू ओपाडी में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मशीनें पीपीपी मॉडल पर लगवाई गई है। जानकारी के मुताबिक, केजीएमयू में लगी किसी भी एक्सरे मशीन का एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) के नए सॉफ्टवेयर के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं है। ऐसे में केजीएमयू प्रशासन एक साथ सभी मशीनों की पंजीकरण प्रक्रिया करवा रहा है।

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