केजीएमयू बना दलालों का अड्डïा

-रोहित सिंह
Captureलखनऊ। केजीएमयू में दलालों का एक बड़ा गुट सक्रिय है जो भोलेभाले मरीजों को फंसाकर चूना लगा रहा है। पल्मोनरी विभाग में लूट का एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है जहां इलाज कराने आये मरीज को दलाल ने सीएमओ का ड्राईवर बताकर लूट लिया। घटना के शिकार मरीज ने पल्मोनरी विभाग के एचओडी डॉ सूर्यकांत का लिखित शिकायती पत्र दिया है।
रामखेलावन नामक मरीज पल्मोनरी विभाग की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आया था। भीड़ अधिक होने से रामखेलावन परेशान हो रहा है। सक्रिय दलाल ने रामखेलावन की स्थिति को समझते हुए उससे कहा कि मैं सीएमओ का ड्राईवर हूं और मेरी इस विभाग में अच्छी पकड़ है। दलाल ने रामखेलावन को डॉक्टर से दिखाने की बात कही। उसके बाद दलाल रामखेलावन का पर्चा अंदर लेकर घुस गया। थोड़ी देर बाद बाद वह निकला और रामखेलावन को बिना डॉक्टर को दिखाये कहने लगा कि डॉक्टर साहब ने भर्ती करने के लिए बोला है व कुछ दवाइयंा लिखी हैं जो बाहर से लानी पड़ेगी। करीब एक हजार रूपये की दवाइयां मिलेंगी। उसने रामखेलावन से एक हजार रूपये लिए और बहाने से किसी को फोन करने के लिए मरीज का मोबाइल भी ले लिया। हैरत की बात ये है कि दलाल ने मरीज को बेड पर भर्ती भी करा दिया और दवाई लेने के लिए उसके परिजन को लकर लॉरी तक गया। रामखेलावन का कहना है कि वहां पर दवाई के लिए उसके परिजन से दलाल ने दो हजार रूपये लिए। उसके बाद दवाई के बहाने लॉरी विभाग की तरफ चला गया और फिर लौटा ही नहीं।
यह कहानी केवल रामखेलावन की नहीं है बल्कि केजीएमयू आने वाले हर उस मरीज की है जो कभी न कभी इस लूट का शिकार हुआ है। केजीएमयू में मरीजो की भारी संख्या और उनकी परेशानियों को देखते हुए दलालों का सक्रिय होना लाजमी है। ऐसे में सवाल यह है कि केजीएमयू को इन दलालों से मुक्त कराने के लिये विश्वविद्यालय प्रशासन किस प्रकार का कदम उठाता है। यह तो समय ही बतायेगा कि प्रशासन कब गहरी नींद से जागेगा।
कर्मचारियों की दलालों से रहती है सेटिंग
केजीएमयू में दलाली का यह एक मामला नहीं है। बीते दिनों न्यू बिल्डिंग की ओपीडी में एक दलाल ने मरीज को अच्छा-खासा चूना लगााया था। जिसमें केजीएमयू के कर्मचारियों पर भी अंगुली उठी थी, हालाकि बाद में मामला शांत हो गया था। सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों ओर दलालों के बीच सेटिंग रहती है। आधा-आधा पैसा दोनों के बीच डिवाइड हो जाता है। जिसके चलते मरीजों के लूटने के काम को अंजाम दिया जाता है।
अभी तक नहीं लगाये गये सीसीटीवी कैमरे
केजीएमयू के कुलपति रविकांत ने जब अपना पदभार ग्रहण किया था तो पीजीआई की तरह केजीएमयू के हर विभाग में सीसीटीवी लगाने की बात कही गई थी लेकिन ट्रॉमा सहित कुछ जगहों को छोडक़र कहीं भी सीसीटीवी नहीं लगा हैं। ट्रॉमा में लगे सीसीटीवी कैमरे भी अक्सर खराब रहते हैं। केजीएमयू दवा काउंटर सहित न्यू ओपीडी बिल्डिंग व अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर विचार कर रहा है।

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