केजीएमयू की आईटी सेल में भ्रष्टïाचार हटाए गए अफसर को फिर दिया चार्ज

अधिकारी एक दूसरे पर लगा रहे अनियमितता बरतने का आरोप

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। राजधानी के केजीएमयू में लेखा परीक्षक ने आईटी सेल के सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम में करोड़ों की हेराफेरी की रिपोर्ट दी है। इस मामले में उस समय सीपीएमएस के इंचार्ज डॉ.आशीष बाखलू पर उंगली उठी। इसके चलते तीन साल पहले डॉ.बाखलू को सीपीएमएस में नियमों को दरकिनार कर काम करने के आरोप में तत्कालीन वीसी डॉ.डीके.गुप्ता ने हटा दिया था। लेकिन इन आरोपों के बावजूद मौजूदा वीसी प्रो.रविकांत ने डॉ. बाखलू को सीपीएमएस का दोबारा नोडल अधिकारी नियुक्ति कर दिया है। इससे चर्चाओं का बाजार गर्म है।
प्रो.रविकांत ने 2014 के अप्रैल माह में केजीएमयू की कमान संभाली थी। पद भार ग्रहण करने के बाद डॉ.आशीष बाखलू को एक बार फिर नोडल अधिकारी बना कर केजीएमयू को ऑनलाइन करने का जिम्मा दे दिया। इसके बाद ऑनलाइन परीक्षा कराने में 300 लैपटॉप की खरीद की गई। ये लैपटॉप आज भी धूल फांक रहे हैं। इस बीच डॉ.आशीष बाखलू ने खुद से साफटवेयर बनाने का दावा कर दूसरी कंपनी को भुगतान करा दिया था। आरोप है कि सीपीएमएस सिस्टम को शुरू करने के नाम पर लगभग 6 करोड़ से आउटडेटेड सिस्टम खरीदा गया। लेकिन दो साल बाद पूरा सर्वर बैठ गया। इसके बाद भी सर्वर को चलाने के लिए 25 लाख से ज्यादा खर्च करने की तैयारी की जा चुकी है। फिलहाल यहां के जिम्मेदार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे हैं। सीपीएमएस के हेड डॉ.आशीष बाखलू ने रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में अपने को पाक साफ बताया है। इसके अलावा उन्होंने डॉ. संदीप भटï्टाचार्या पर आउटडेटेड सर्वर खरीदने तथा 40 लाख रुपये की बर्बादी का आरोप लगाया है, जबकि डॉ.संदीप भट्टïाचार्य ने डॉ.बाखलू के सारे आरोपों को निराधार बताया है।
वहीं सूत्रों की माने तो डॉ. बाखलू पर पहले ही स्वयं द्वारा साफटवेयर बनाने तथा उसका पेमेंट लेने का आरोप लग चुका है। इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच मरीज आज भी परेशान हैं। वहीं, केजीएमयू का सर्वर आये दिन फेल रहता है।

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