कृषि विभाग में प्रिंटिंग के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी कर रहे अफसर

  • अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर में की जा रही लेट लतीफी
  • कागजों में छह महीने से चल रही प्रक्रिया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
1लखनऊ। कृषि भवन में भ्रष्टïाचार इस कदर व्याप्त है कि कमीशनखोरी और अपनों को फायदा दिलाने के चक्कर में अब तक कृषि प्रसार केन्द्र में प्रिंटिंग के लिए टेंडर नहीं कराया गया है। टेंडर कराने की तय समय सीमा को छह महीने बीत चुके हैं लेकिन प्रक्रिया अभी तक सिर्फ कागजों में ही चल रही है। इसको हकीकत में करवाने की दिशा में कोई भी काम नहीं हो रहा है। यह टेंडर कब होगा, इस बारे में भी कहीं से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। जिन अधिकारियों को टेंडर कराने की जिम्मेदारी मिली है, वे लोग कमीशन बटोरने में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं मौजूदा प्रिंटिंग फर्म को तय रेट के अधिक कीमत पर करोड़ों रुपये का काम दिया जा रहा है, ताकि विभाग के अधिकारियों को तगड़ा कमीशन पहुंचता रहे और सब बैठकर मलाई काटते रहें। इसी वजह से टेंडर करवाने में जानबूझकर विलंब करवाया जा रहा है जबकि विभाग के कुछ अधिकारी टेंडर में विलंब का ठीकरा शासन के ऊपर फोड़ रहे हैं। इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

छह महीने बाद भी नहीं हुआ टेंडर

जानकारों की माने तो कृषि विभाग के कृषि प्रसार केन्द्र में प्रति वर्ष प्रिंटिंग के लिए अप्रैल में टेंडर निकाला जाता है। टेंडर के बाद प्रिंटिंग फर्म वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंतर्गत 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का काम संभालती है। यह अवधि खत्म होने के बाद अगले वर्ष फिर टेंडर निकाला जाता है। किन्तु इस वर्ष २०१६-१७ के लिए टेंडर निकालने का काम अब तक नहीं हुआ है। छह माह बीत जाने के बाद भी अब तक टेंडर नहीं कराया गया है। जानकार बताते हैं कि कमीशन के चलते मौजूदा फर्म को अतिरिक्त काम दिया जा रहा है,
जिसकी वजह से टेंडर प्रक्रिया में विलंब हो रहा है।

मौजूदा फर्म को अधिक रेट से दिया जा रहा पैसा

विभागीय कर्मचारियों के मुताबिक मौजूदा समय में पुरानी फर्म ही प्रिंटिंग का काम देख रही है। जानकारों की मानें तो उन्हें अभी हाल ही में करोड़ों रुपये का काम तय कीमत से अधिक रेट पर दिया गया। इसमें कमीशन कृषि प्रसार केन्द्र के आला अधिकारियों को अच्छा कमीशन मिला है, जिसकी आपस में बंदरबांट की गई है। इसी वजह से प्रिंटिंग के टेंडर को छह महीने से टाला जा रहा है।

अधिकारियों का कुछ और ही तर्क

जानकारों की माने तो पहले जुलाई के आखिर में टेंडर के लिए विज्ञापन निकालने का निर्णय लिया गया था। इसमें 15 अगस्त तक टेंडर से जुड़ी सारी प्रक्रिया खत्म कर लेना तय समझा जा रहा था। इन सबके बावजूद तय समय पर टेंडर नहीं हुआ। आलम ये है कि सितम्बर महीना खत्म हो चुका है लेकिन अब तक टेण्डर की कोई तैयारी नहीं हुई है। इससे साफ जाहिर है कि टेण्डर कराने में कोई भी अधिकारी रुचि नहीं ले रहा है और सब कमीशन बटोरने में लगे हुए हैं। वैसे पिछले साल से टेण्डर ई-टेण्डिरिंग प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है और पिछले साल ई-टेण्डर के तहत अक्टूबर, नवंबर
तक टेंडर किया गया था, जिसमें वर्तमान समय में कार्यरत प्रिंटिंग प्रेस को टेण्डर
मिला था।

क्या है प्रक्रिया

जानकारों के मुताबिक ई टेण्डर के लिए विज्ञापन निकाला जाएगा। इसके बाद सभी फर्में समय अंतराल में ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी। इसके पश्चात् ११ सौ रुपये की रसीद कटवानी होगी और एक लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। इसके बाद दो चरणों में फर्मों का चयन किया जाएगा। पहले चरण में टेक्निकल चीजें चेक की जाती है। इसमें जो फर्म पास हो जाती है। उसके बाद फाइनेंशियल वैल्यू चेक होते ही किसी एक फर्म का चयन कर लिया जाता है।

प्रिंटिंग टेंडर के लिए फाइल चल रही है और शासन भेजी गई है। वहां से आते ही टेण्डर प्रक्रिया पूरी करार्ई जाएगी।
-विवेक कुमार सिंह
संयुक्त कृषि निदेशक, कृषि प्रसार केन्द्र

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