किसान के लिए नया बाजार

सरकार एनएएम के तहत ऑनलाइन 21 मंडियों को जोड़ेगी। जिससे जुडक़र किसान अपनी उपज बेच सकेंगे। इसके बाद आने वाले दो वर्षों में देश की सभी 585 थोक मंडियों (कृषि उत्पादन बाजार समिति) को इस ऑनलाइन पोर्टल से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है। जहां किसान अपने 25 तरह के कृषि उत्पादों की नीलामी से बेहतर कीमत पा सकेंगे।

sanjay sharma editor5किसानों को फसल-बीमा की सुरक्षा के बाद, अब राष्ट्रीय कृषि मंडी (एनएएम) योजना की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है। किसानों को इससे उनकी पैदावार का अच्छा मूल्य मिल सकेगा। पहले चरण में देश के आठ राज्यों की 21 मंडियों को इस योजना में जोड़ा गया है। इससे उन्हें बिचौलियों से निजात मिल सकेगी। जाहिर है इससे किसानों के हालात बदलेंगे।
सरकार एनएएम के तहत ऑनलाइन 21 मंडियों को जोड़ेगी। जिससे जुडक़र किसान अपनी उपज बेच सकेंगे। इसके बाद आने वाले दो वर्षों में देश की सभी 585 थोक मंडियों (कृषि उत्पादन बाजार समिति) को इस ऑनलाइन पोर्टल से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है। जहां किसान अपने 25 तरह के कृषि उत्पादों की नीलामी से बेहतर कीमत पा सकेंगे। लेकिन इसमें भी लाभकारी मूल्य हासिल करने के लिए किसानों को फसल को मंडी के मन मुताबिक दाम देने तक अपने पास सुरक्षित रखना होगा।
देश के किसानों की हालत का अंदाजा संयुक्त राष्ट्र की कुछ साल पहले की एक रिपोर्ट से साफ लगाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि भारत में 1997 से 2005 के बीच प्रत्येक 32 मिनट पर एक किसान हालात से हारकर आत्महत्या करने पर मजबूर हुआ। दरअसल, खाद-बीज-सिंचाई-कटाई आदि का खर्चा हाल के वर्षों में इतना ज्यादा बढ़ गया है कि किसान को कर्ज के तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आजादी के करीब सात दशक बाद भी देश के सकल फसली क्षेत्र का सिर्फ 46.9 फीसद भाग ही सिंचिंत है। बाकी मॉनसून के भरोसे है। इतना ही नहीं मॉनसून के भरोसे रहनेवाले इलाके में ही 84 फीसद दलहन, 80 फीसद बागवानी, 72 फीसद तेलहन, 64 फीसद कपास और 42 फीसद खाद्यान्न की पैदावार होती है। ऐसे में करीब दो साल से सूखे ने किसानों की हालत और पतली कर दी है।
बीज, कीटनाशक और मौसम के बाद बाजार का नंबर आता है। वहां भी किसानों की फसल औने-पौने दामों पर खरीदी जाती है। ऐसे में सरकार का कहना कि बाजार की कीमतों पर उसका नियंत्रण नहीं, क्योंकि मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल से प्रभावित होती हैं, किसानों को निरीह बना देता है। ऐसे में राष्ट्रीय कृषि मंडी किसानों के लिए एक उम्मीद की तरह है कि बेची गयी फसल की कीमत किसानों के बैंक खाते में जाएगी। इससे बिचौलियों के हाथों किसानों का लुटना बंद होगा। खरीद और बिक्री में पारदर्शिता आयेगी। लेकिन अभी हमें इस महत्वाकांक्षी पहल के सकारात्मक नतीजे का इंतजार करना होगा। उम्मीद है कि किसानों के दिन बहुरेंगे।

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