किसानों को बजट में तोहफा

यह बजट भी पिछली सरकारों से ज्यादा अलग नहीं है। पर मोदी सरकार को यह उम्मीद है कि गांव के इलाकों में मांग बढऩे पर ही अर्थव्यवस्था में जान आयेगी। सरकार ने सभी योजनाओं की सब्सिडी को केवल गरीबों तक पहुंचाने और उसे लाभार्थी के बैंक एकाउंट से जोडऩे की रणनीति है।

sanjay sharma editor5मोदी सरकार के इस बजट में सबसे ज्यादा जोर ग्रामीण क्षेत्र, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों पर है। राजकोषीय घाटे को 3।5 प्रतिशत रखने के बावजूद सोशल सेक्टर के लिए धनराशि का इंतजाम किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम का भी संकेत है। पर असल सवाल यह है कि क्या सरकार इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का काम कर पाएगी।
बजट का लब्बो-लुवाब खेती और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। आधार कार्ड, खेती और मनरेगा भी बजट का एक बड़ा हिस्सा हैं। अगले छह वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों की आय दोगुनी करने और 2018 तक हरेक गांव में बिजली पहुंचाने की भी योजना है। मनरेगा के लिए जारी की गयी 38,500 रुपये अब तक की सबसे बड़ी राशि है। प्रधानमंत्री सडक़ योजना में 19 हजार करोड़ रुपये और ग्रामीण विकास के लिए कुल 87,765 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
यह बजट भी पिछली सरकारों से ज्यादा अलग नहीं है। पर मोदी सरकार को यह उम्मीद है कि गांव के इलाकों में मांग बढऩे पर ही अर्थव्यवस्था में जान आयेगी। सरकार ने सभी योजनाओं की सब्सिडी को केवल गरीबों तक उसे पहुंचाने और उसे लाभार्थी के बैंक एकाउंट से जोडऩे की रणनीति है। सडक़ों के जरिए गांवों को और संपन्न करने के लिए 10 हजार किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तार की योजना है। इसके समानांतर करीब 50 हजार किमी का स्टेट हाइवे भी बनेगा। यह व्यापारिक गतिविधियों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के रास्ते भी खोलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ सरकार डिजिटल साक्षरता पर भी जोर दे रही है। इसके लिए गांव के इलाकों में इंटरनेट की व्यवस्था करने की भी बात है। डिजिटल साक्षरता मिशन भी इसकी एक कड़ी है। देहाती इलाकों में फल और सब्जियां उगानेवाले किसानों को हो सकता है इस बजट से एक आशा जगे। चालू वित्त वर्ष में देश में एफडीआइ में 40 फीसद का इजाफा हुआ है। बाजारों को सातों दिन खोलने की पहल है, जिसे लागू तो राज्य करेंगे, लेकिन केंद्र ने इसकी पहल की है। इससे रोजगार बढ़ेंगे और कारोबार भी। इस सबके बाद भी किसान की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत होगी, यह तो समय ही बताएगा। ऐसे में यदि किसान मजबूत हुआ तो देश भी खुशहाल और तरक्की के रास्ते पर होगा।

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