किसानों का अनुदान डकार रहे अफसर

  • अन्नदाता भुखमरी की कगार पर, मौज मार रहे अधिकारी
  • जनता के सामने आया प्रदेश सरकार की डीबीटी योजना का कड़वा सच

अंकुश जायसवाल
Captureलखनऊ। किसानों को चौतरफा मार हर वर्ष ही झेलनी पड़ती है। वहीं सरकार से किसानों को जो आस होती है। उस पर विभाग के भ्रष्टï अधिकारी पहले ही पलीता लगा देते हैं। इस पर किसान जाये तो कहां जाये। अन्नदाताओं के दुख दर्द से न किसी को मतलब है और न ही किसी के पास इनकी जीविकोपार्जन का हाल जानने के लिए फुर्सत है। ऊपर से सरकार की ओर से जो इन किसानों के लिए योजनाएं चलायी जाती हैं। उन पर भ्रष्टï अफसर पहले से ही अपनी नजर गड़ाये हुए डकारने के लिए तैयार बैठे रहते हैं।
पहले से ही प्रदेश के किसानों की चार साल से प्राकृतिक आपदा ने कमर तोड़ रखी है, अब बची-खुची कसर कृषि विभाग के भ्रष्टï अफसरों ने पूरी कर दी। अखिलेश यादव सरकार ने किसानों को भ्रष्टïाचार से बचाने के लिए सरकारी अनुदान सीधे खाते में डालने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना लागू की थी। लेकिन कृषि विभाग के भ्रष्टï अफसरों ने किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के बजाए अपने और अपने रिश्तेदारों के खातों में रकम डाल कर लूटने में लगे हुए हैं। इसका खुलासा शाहजहांपुर में हुए बीज खरीद के नाम पर एक करोड़ पच्चासी लाख अ_ïासी हजार दो सौ चौहत्तर के घपले से हुआ है। यह भ्रष्टïाचार मात्र एक जिले की झलक है, यूपी के 75 जिलों में किसानों के हक को लूटने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इस मुद्दे पर जहां कृषि निदेशक ने चुप्पी साध ली है। वहीं अन्य आला अधिकारियों मामले की जांच कराकर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
डीबीटी योजना चढ़ी भ्रष्टïचार की भेंट
कृषि विभाग के सूत्रों का कहना है कि विभाग के कुछ भ्रष्टï अफसरों ने डीबीटी योजना को भ्रष्टïाचार का माध्यम बना दिया है। किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के बजाए खुद को और अपने रिश्तदारों को इस योजना का लाभ पहुंचाया जा रहा है। पूरे प्रदेश में चल रही डीबीटी योजना की जांच हो जाए, तो असल सच सामने आ जाएगा। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब शासन ने सबसे अधिक भ्रष्टï अधिकारी को कृषि निदेशक बना रखा है तो आप उससे ईमानदारी की क्या उम्मीद कर सकते हैं। जहां कृषि निदेशक के संरक्षण में जमकर घपले हो रहे हैं वहीं किसान खून के आंसू पीकर भ्रष्टïाचार का शिकार बन रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
इस मामले की जांच कर रहे अपर कृषि निदेशक प्रसार सोराज सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टïया में गबन का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले की जांच की जा रही है। दोषी अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि निदेशक मुकेश श्रीवास्तव ने इस प्रकरण पर चुप्पी साध ली।

क्या है मामला

10 जुलाई 2016 को शाहजहांपुर के उप कृषि निदेशक डी.एस. राजपूत ने संयुक्त कृषि निदेशक बरेली मण्डल, कृषि निदेशक और शासन को पत्र लिखा था कि शाहजहांपुर में रबी सत्र में 2015-16 में कुल 17900 कुल गेहूं बीज 14460 किसानों को बांटा गया। बीज की दर तीन हजार रुपए प्रति कुंतल निर्धारित थी, जिस पर 1400 रुपए प्रति कुंतल सरकारी अनुदान था। शाहजहांपुर सूखाग्रस्त जिले में होने के कारण सरकार ने 600 रुपए प्रति कुंतल अनुदान और बढ़ा दिया था। इस तरह किसानों को 2000 रुपए प्रति कुंतल सरकारी अनुदान मिलना था। साथ ही सरकार ने यह व्यवस्था निर्धारित की थी कि कोई भी किसान कुल मूल्य का 1000 हजार रुपए नकद और 2000 रुपए का पोस्ट डेटेड चेक उपलब्ध कराकर गेहूं बीज खरीद सकता था। शाहजहांपुर के पूर्व उप कृषि निदेशक डा. राधा कृष्ण यादव, पूर्व जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पाण्डेय और कैशियर व डीबीटी ऑपरेटर नवनीत राठी ने किसानों के खातों में अनुदान राशि न डालकर नकद अपने और अपने रिश्तेदारों के खातों में डालकर गबन किया है। इस पत्र के बाद से कृषि विभाग और शासन के कुछ भ्रष्टï अफसरों में हडक़म्प मच गया है। कृषि विभाग ने मामले को रफा-दफा करने के लिए जहां जांच के आदेश दिए हैं। वहीं शाहजहांपुर की डीएम ने इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज करवाई है।

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