किशोरावस्था में जरूरी होता है चिकित्सक का उचित परामर्श: डॉ. सुजाता

  • शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों को न समझ पाने की वजह से आती हैं विकृतियां

Capture1वीरेन्द्र पांडेय
Captureलखनऊ। किसी भी इंसान के जीवन में किशोरावस्था बहुत ही नाजुक दौर मानी जाती है। इस दौरान व्यक्ति में होने वाले शारीरिक तथा मानसिक परिवर्तनों को न समझ पाने की वजह से लोगों में विकृतियां उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसे समय में लड़कों और लड़कियों को विशेष परामर्श और सहयोग की जरूरत होती है। यह कहना है केजीएमयू की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता का। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था के दौरान लड़कों और लड़कियों को उचित परामर्श की आवश्यकता होती है। इससे उनको स्वास्थ्य लाभ के साथ ही जीवन में आगे बढऩे का रास्ता मिलता है। हम एक स्वस्थ समाज की रचना करते हैं। किशोरावस्था में उचित परामर्श मिलने से जहां शारीरिक बीमारीयों का खतरा कम होता है ,वहीं सामाजिक अपराधों मे कमी आती हैं।
डॉ. सुजाता किशोरों के लिए महीने के पहले गुरुवार को केजीएमयू में परामर्श क्लीनिक चलाती हैं। इसके अलावा राजधानी के स्कूलों मे जाकर लड़के-लड़कियों को शारीरिक, मानसिक तथा समाजिक बदलाव के बारे में बताती हैं। उनका कहना है कि किशोरावस्था खासकर बालिकाओं के लिए एक निर्णायक उम्र मानी गई है। आज की लड़कियां ही आगे चलकर मां बनती हैं। इनकी स्वस्थ सोच और स्वास्थ्य के जरिए ही हम स्वस्थ समाज की कल्पना कर सकते हैं। बालिकाओं को किशोरावस्था में जो कुछ भी अनुभव होता है, वह उनके जीवन और परिवार को संवारने में महत्वपूर्ण रोल निभाता है। हमारे यहां लड़कियों के जीवन में किशोरावस्था के दौरान ऐसे पड़ाव आते हैं, जहां तरह-तरह के जोखिम का सामना भी करना पड़ता है। जिनमें, स्कूल छोडऩा, बाल-विवाह और समय से पहले गर्भधारण करने जैसी समस्याएं शामिल हैं। गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान किशोर बालिकाओं को अधिक उम्र की महिलाओं की अपेक्षा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सुविधाएं अपेक्षाकृत कम उपलब्ध हो पाती हैं। जिससे उनमें यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में उपयुक्त जानकारी का अभाव रहता है और वे अपने स्वास्थ्य के बारे में स्वतंत्र निर्णय लेने में अक्षम होती हैं। किशोरावस्था में गर्भधारण एक बालिका, उसके परिवार, उसके समुदाय और उसके राष्ट्र के लिए सामाजिक एवं आर्थिक दुष्परिणाम का कारण होता है। कई लड़कियां गर्भवती होने के बाद स्कूल नहीं जा पाती और भविष्य निर्माण के लिए उपलब्ध अवसरों का लाभ नहीं उठा पाती। इस प्रकार से किशोरावस्था में गर्भ धारण, गरीबी चक्र एवं खराब स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा होता है। युवा बालिका चाहे वह विवाहित हो या नहीं, गर्भावस्था के दौरान उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। विवाहित किशोरियों पर समाज का यह दबाव होता है कि वह बच्चों को जन्म दें और इस प्रकार परिवार नियोजन सेवाओं से वंचित रह जाती है। वहीं अविवाहित किशोर बालिकाओं में समाज को इस बात का डर होता है कि उन्हें समाज में स्वीकार किया जाएगा या नहीं।

परामर्श से मिलेगी सही दिशा

डॉ. सुजाता ने बताया कि किशोर अपनी पहचान व स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए अपने ही माता-पिता के भावनात्मक बंधनों को त्याग देते हैं। वे अपने मित्रों के साथ रहना पसंद करते हैं। जहां उनकी बात सुनी जाती है। इस दौरान गलत मीडिया भी उन पर उल्टा प्रभाव डालता है, जिससे उनका जीवन अन्धकारमय हो सकता है। शारीरिक व मानसिक रूप से वो टूट सकते हैं। इस समय इन्टरनेट तथा अन्य ऐसे साहित्य आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे वो भटक सकते हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता का उचित परामर्श ही उनको सही दिशा दिखा सकता है।

किशोरावस्था में भ्रम से बचना आवश्यक

डॉ. सुजाता का कहना है कि 12 साल से लेकर 20 साल तक के लड़के तथा लड़कियां किशोरावस्था की श्रेणी में आते हैं। इस दौरान उनके उनके मन में कई प्रकार के विचार चल रहे होते हैं। कुलमिला कर किशोरावस्था समस्याओं तथा भ्रम की आयु है। इस समय किशोरों की समस्याएं परिवार, विद्यालय, स्वाथ्य, मनोरंजन, भविष्य, व्यवसाय, विपरीत लिंग के लोगों आदि से सम्बधित हो सकती हैं। ये समस्यायें, अर्थिक, व्यक्तिगत और सामाजिक किसी भी स्तर की हो सकती हैं। किशोरावस्था को समस्याओ की आयु इसलिए कहा जाता है कि बालक अपने माता पिता संरक्षकों और अध्यापकों आदि से घुलमिल नहीं पाता है। उसकी अपनी अलग दुनिया होती है। उसमें चिन्ता, उत्सुकता, अनिश्चितता और भ्रान्ति के लक्ष्ण उत्पन हो जाते हैं। किशोरावस्था के अन्त तक अधिकांश समस्यायें धन, सेक्स या शैक्षिक उपलब्धि के सम्बन्ध में ही होती हैं। किशोरावस्था में आयु बढऩे के साथ-साथ किशोर अपनी समस्याओं का समाधान अपनी ही उम्र के लोगों अथवा इंटरनेट व अन्य साधनों से लेने लगते है। जिससे उनके सामने सही समाधान लेने के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है। सही परामर्श न मिलने के कारण उनके अन्दर भ्रम की स्थित पैदा हो जाती है।

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