किताबों से दोस्ती की कोशिश कर रहे युवा

13वें नेशनल बुक फेयर में युवाओं ने की बढ़-चढ़ कर खरीदारी
इतिहास व महापुरुषों पर आधारित पुस्तकों की बिक्री जोरों पर

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इंटरनेट और मोबाइल के दौर में युवा वर्ग फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप के प्रति तेजी से आकर्षित हो रहा है। मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों की ऊंगलियों का एक टच सारी दुनियां से पल भर में रूबरू करा सकता है। इसके बावजूद युवा वर्ग किताबों के साथ दोस्ती करना पसंद कर रहा है। मोती महल लान में लगे तेरहवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में युवाओं ने पुस्तकों की खरीदारी में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इसके साथ ही पुस्तकों के बारे में अपने विचार सोशल साइट पर भी साझा कर रहे हैं।
किताबों को इंसान का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है। इन किताबों का अपना संसार होता है। किताबें हमें दुनियां से परिचित कराती हैं। किताबों से हमें सुख-दुख, अच्छी-बुरी, धर्म-अधर्म, इतिहास-भूगोल और नई-पुरानी बातों की जानकारी मिलती है। किताबों को पढऩे व समाज से मिले अनुभवों और अपने विवेक की कसौटी के आधार पर ही हमारी विचारधारा का निर्माण होता है, जो समाज को नई दिशा दिखाने में सहायक माना जाता है। वर्तमान समय में समाज संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। हर व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था और सरकारों की कार्यप्रणाली में बदलाव चाहता है। इस कारण इंटरनेट, सोशल मीडिया और किताबों के साथ वक्त बिताने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद न सिर्फ अपनी बल्कि सामाजिक समस्याओं का सही समाधान निकालना है। ऐसे ही युवाओं में किताबों से दोस्ती का जज्बा देखने को मिल रहा है।
आजकल के युवाओं में भारतीय संस्कृति, अलग-अलग धर्मों, पुनर्जागरण और सामाजिक आंदोलनों के बारे में सब कुछ जान लेने की होड़ सी मची है। सोशल साइट्स तो युवाओं के ढेरों विचारों और तर्क वितर्क से पटी पड़ी है।
इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि युवा किताबों और सोशल साइट्ïस को कैसे जोड़ कर देख रहे हैं। राष्ट्रीय पुस्तक मेले में आये युवा देवी देवताओं, गुरुओं और महापुरुषों के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी जिज्ञासा को शांत करने का सबसे सरल और सहज माध्यम किताबें हैं, इसी वजह से पुस्तक मेले में गोस्वामी तुलसी दास, रवीन्द्र नाथ टैगोर, प्रेमचन्द, बंकिम चन्द्र चटर्जी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की किताबों की डिमांड बढ़ रही है।इसके अलावा पुनर्जागरण, राष्ट्रीय आन्दोलन और समाज में बदलाव लाने वाले महान इंसानों से जुड़ी किताबों की बिक्री भी अधिक हो रही है। इसमें शहीद भगत सिंह, महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, नेल्सन मंडेला, मलाला, सचिन तेन्दुलकर और चेतन भगत समेत अन्य की किताबें युवा वर्ग जमकर खरीद रहा है। इन किताबों को पढऩे के बाद बहुत से लोगों ने अपने फेसबुक और ट्विटर पर अनुभवों को साझा भी किया है। इससे युवाओं में किताबों के प्रति बढ़ते रुझान का सीधा संदेश मिल रहा है।

मेले में लगे 180 स्टॉल

गांधी जयंती पर मोती महल लॉन में 13वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ। इस मेले का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने किया था। इस बार पुस्तक मेले का आयोजन संविधान और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की थीम पर किया गया है। इस पुस्तक मेले में कुल 180 स्टॉल लगे हैं। पुस्तक मेला 11 अक्टूबर तक चलेगा। यहां साहित्य, धर्म, कला और संस्कृति से जुड़ी अनेकों किताबों का समागम है। पुस्तक मेले में प्रेम चन्द की पूस की रात, मलय जैन की ढाक के तीन पात, ज्ञान चतुर्वेदी की नरक यात्रा, पवित्र कुरान का हिन्दी अनुवाद, सामवेद संहिता, ज्योतिष, हास्य और व्यंग्य से जुड़ी ढेरों किताबें हैं। इसके साथ ही शायरी, गजल और कविता से जुड़ी अनेकों किताबों का संग्रह भी मौजूद है। पुस्तक मेले में स्कूली बच्चों, अध्ययनरत छात्रों और महिलाओं के लिए भी बहुत कुछ है। स्कूली बच्चों के लिए स्पाइडर मैन, चाचा चौधरी और साबू, अलीबाबा चालीस चोर, पंचतंत्र की कहानियां और नागराज की कहानियों की किताबें प्रमुख हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजनों, सिलाई-कढ़ाई, रंगोली, मेंहदी और बुनाई की जानकारी देने वाली किताबें भी मौजूद हैं। पुस्तक मेले में अंग्रेजी और उर्दू में लिखी सैकड़ों पुस्तकें भी उपलब्ध हैं।

Pin It