काशी में बवाल

वैसे भी इस समय प्रदेश में साम्प्रदायिक माहौल बिगाडऩे की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में साम्प्रदायिक सदभाव बिगाडऩे की कोशिश हो चुकी है। वैसे भी अभी प्रदेश में दादरी का मुद्दा गरमाया हुआ है। दादरी में सियासत हो ही रही थी कि काशी में संतों की प्रतिकार यात्रा जुलूस में बवाल हो गया।

sanjay sharma editor5प्रदेश में अभी दादरी में सियासत हो ही रही थी कि बनारस में संतों के प्रतिकार जुलूस में बवाल होने से यह मामला संवेदनशील हो गया है। कुछ दिनों पहले ही मूर्ति विसर्जन को लेकर पुलिस ने बनारस में संतों के विरोध करने पर उन पर लाठी भांजी थी। इस घटना का पूरे देश के संतों ने विरोध किया था। इस घटना के बाद बनारस में पूरे देश से संतों का आना शुरु हो गया था।
कल मूर्ति विसर्जन को लेकर हुए बवाल के विरोध में संतों ने प्रतिकार यात्रा जुलूस निकाली थी। इस जुलूस में हजारों लोग मौजूद थे। जुलूस में पूरे देश से साधु-संत शामिल हुए थे। यह जुलूस शांति से ही निकाला गया लेकिन गोदौलिया पहुंचते ही कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। अराजक तत्वों ने पुलिस की जीप और 4 बाइकों में आग लगा दी। देखते ही देखते मामले ने वीभत्स रूप ले लिया। मजबूरन पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। जिसके बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया। गोदौलिया, चौक और मैदागिन इलाकों को सील कर दिया गया। इस घटना से इलाके में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया। घटना में आम लोगों सहित कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गये।
यहां सवाल उठता है कि प्रशासन ने पहले से अराजक तत्वों से निपटने की तैयारी क्यों नहीं की थी। यह घटना ऐसे तो नहीं हुई होगी। निश्चित ही पहले से इसकी तैयारी कर ली गई होगी। धार्मिक जुलूसों पर पुलिस-प्रशासन पहले से नजर रखती है और इसे सकुशल सम्पन्न कराने की योजना बनाती है। अक्सर देखा गया है कि ऐसे जुलूस पर अराजक तत्व निगाह लगाए रखते हैं। अराजक तत्व जानते हैं कि धार्मिक जुलूस में अगर एक भी पत्थर उछाल दिया तो उनके मंसूबे साकार हो जायेंगे। ऐसे में संतों ने जब प्रतिकार यात्रा निकालने का आह्वïान किया था तो प्रशासन को पहले से इसमें चौकसी बरतनी चाहिए थी।
वैसे भी इस समय प्रदेश में साम्प्रदायिक माहौल बिगाडऩे की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में साम्प्रदायिक सदभाव बिगाडऩे की कोशिश हो चुकी है। वैसे भी अभी प्रदेश में दादरी का मुद्दा गरमाया हुआ है। दादरी में सियासत हो ही रही थी कि काशी में संतों की प्रतिकार यात्रा जुलूस में बवाल हो गया। सियासत करने वालों को बैठे बिठाए एक और मुद्दा मिल गया है। निश्चित ही इस पर भी सिसायत तेज होगी। इस बवाल के बाद संतों का रोष और भी बढ़ गया है। अब संत क्या करते हैं यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन यह तो तय है कि काशी की फिजा निश्चित ही प्रभावित होगी।

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