कार्डधारकों ने खराब गेहूं लेने से किया इंकार

  • कोटेदारों को भेजा गया भीगा व गंदा गेहूं

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आवश्यक वस्तु निगम के कोटेदारों को भीगा और खराब गेहूं वितरण के लिए भेजा गया है। कार्ड धारकों ने इस गेहूं को लेने से इंकार कर दिया है। इस कारण कोटेदारों ने आपूर्ति विभाग को पत्र लिखकर गेहूं वापस करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार मल्होत्रा के मुताबिक इस बार शहर के आठों क्षेत्रों में एपीएल वितरण के लिए भेजा गया गेहूं काफी खराब और फूला हुआ है। इस कारण गोमतीनगर, इंदिरानगर, हसनगंज, चौक, हजरतगंज, आलमबाग, राजाजीपुरम, यहियागंज में गेहूं का वितरण करना मुसीबत बन गया है। राशन वितरण के दौरान कार्डधारक खराब गेहूं के कारण वाद-विवाद करते हैं। कोटेदारों पर खराब गेहूं बांटने का आरोप लगाकर गाली-गलौच करते हैं। इसमें कई क्षेत्रों से मारपीट की शिकायतें भी मिली हैं। इस कारण कोटेदारों के सामने शांतिपूर्ण ढंग से राशन का वितरण करना चुनौती बन गया है। परिणामस्वरूप कोटेदारों ने आपूर्ति विभाग को पत्र लिखकर खराब गेहूं को वापस करने की बात कही है। इस संबंध में आपूर्ति विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। जबकि राशन वितरण की अवधि मात्र तीन दिन शेष है। इस संबंध में राज्य आवश्यक वस्तु निगम के गोदाम प्रभारी विजय सिंह गेहरवार का कहना है कि सरकार की तरफ से जो भी खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। आवश्यक वस्तु निगम उसी खाद्यान्न को सस्ता गल्ला परिषद की दुकानों पर भिजवाती है। इस बार खराब गेहूं आया था, इसकी शिकायत एफसीआई से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार दुकानों पर राशन पहुंचा दिया गया। हालांकि राशन पहुंचने के बाद से लगाकार कोटेदारों की शिकायतें आ रही हैं लेकिन हम मजबूर हैं, कुछ नहीं कर सकते हैं। अब प्रशासनिक स्तर से ही कुछ हो सकता है।

गौरतलब हो कि केन्द्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत हर महीने एपीएल और बीपीएल कार्ड धारकों को निर्धारित राशन उपलब्ध कराती है। इसमें एपीएल कार्ड धारकों को प्रथम आगत, प्रथम पावत के अनुसार 6.60 रुपये प्रति किग्रा गेहूं और 8.80 रुपये प्रति किग्रा की दर से चावल दिया जाता है। इसमें प्रशासन की तरफ से राशन वितरण की तिथि घोषित की जाती है।
प्रशासन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की निगरानी में राशन वितरण करवाता है लेकिन लखनऊ में अगस्त महीने में राशन वितरण की तिथि घोषित किए बिना वितरण शुरू करवा दिया गया। इसमें राशन की दुकानों पर निगरानी का काम भी राम भरोसे हैं। वहीं आवश्यक वस्तु निगम ने दुकानों पर खराब गेहूं पहुंचाकर कोढ़ में खाज का काम किया है। जिसकी वजह से कार्ड धारकों ने गेहूं लेने से इंकार कर दिया है।

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