कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजना ने बदली प्रदेश की तस्वीर

दुग्ध उत्पादन में नंबर वन है उत्तर प्रदेश

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। दुग्ध उत्पादन में यूपी भले ही पूरे देश में पहले स्थान पर है, लेकिन हकीकत में यहां पर पशुओं की तुलना में दुग्ध उत्पादकता कम है। इसकी मुख्य वजह प्रदेश में उच्च गुणवत्ता युक्त पशुओं की संख्या का कम होना रहा है। कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजना ने न केवल इस समस्या से निजात दिलाने में मदद की है, बल्कि इससे किसानों में पशुओं के पालने को लेकर भी नजरिया बदला है। यूपी में हर साल 241.939 लाख मीट्रिक टन से अधिक दुग्ध का उत्पादन होता है।

क्या है कामधेनु योजना
कामधेनु योजना दुग्ध विभाग की बड़ी योजना है। इसके तहत उच्च गुणवत्ता युक्त पशुओं की कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा बेहतर नस्ल के 100 दुधारू पशुओं की डेयरी यूनिट स्थापित की जाती है। इसके माध्यम से पशु पालन के क्षेत्र में उद्यमिता के विकास हेतु ब्याज मुक्त कामधेनु इकाईयां स्थापित होती हैं। गुणवत्ता प्रभावित न हो इसके लिए योजना में पशुधन का क्रय प्रदेश के बाहर से किए जाने का भी प्राविधान है। इस योजना तहत पूरे प्रदेश में कुल 425 कामधेनु डेयरी इकाईयों की स्थापना की गई है।

बदल सकती है यूपी की तस्वीर
यूपी सरकार की इस योजना से पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है। जहां प्रदेश में बीमार और कमजोर पशुओं की भरमार है, वहीं पर इस योजना के तहत दुधारू गायों में संकर जर्सी, संकर एचएफ अथवा साहीवाल प्रजाति की गाय तथा भैंसों में मात्र मुर्रा प्रजाति की भैंस ही रखी जायेगी। ये न केवल अधिक दूध देंगी, बल्कि इससे प्रदेश में उच्च कोटि की दुग्ध उत्पादक पशुओं की नई वरायटी भी तैयार होगी। 100 दुधारू पशुओं की एक यूनिट स्थापित करने हेतु पशुपालक अपनी सुविधानुसार यह स्वयं निर्णय ले सकेगा कि यूनिट में सभी गाय अथवा भैंसें रखनी है या गायें एवं भैंसें दोनों कितनी-कितनी संख्या में रखनी है। हालांकि इकाई में गोवंश एक ही प्रजाति का होना अनिवार्य किया गया है।

आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए मिनी कामधेनु योजना
यूपी सरकार ने इस योजना के तहत 2500 मिनी कामधेनु डेयरी इकाईयों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत पूरे प्रदेश में उच्च उत्पादन क्षमता के पशुओं की उपलब्धता एवं उत्पादन सुनिश्चित करना है। इस योजना से छोटे एवं मध्यम पशुपालकों को काफी फायदा हुआ है। कामधेनु योजना से जोडऩे के लिए मिनी कामधेनु योजना ली गयी है। इसके तहत प्रदेश में 50 दुधारू गाय/भैंसों की डेयरी इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। कामधेनु डेयरी योजना की तहत ही इसके तहत भी 50 दुधारू पशुओं की एक यूनिट स्थापित करने का नियम है। इसमें पशुपालक अपनी सुविधानुसार यह स्वयं निर्धारित करेगा कि उसे यूनिट में सभी गाय रखनी है या भैंसें।

मिनी कामधेनु के एक इकाई की क्या है लागत
योजना के मुताबिक, एक इकाई की कुल लागत 52.35 लाख रुपए है, जिसमें 50 दुधारू पशुओं का क्रय, पशु गृह एवं भूसा गोदाम आदि का निर्माण सम्मिलित है। यूनिट की पूरी लागत की 25 फीसदी धनराशि 13.09 लाख रुपए लाभार्थी को स्वयं लगानी होगी एवं 75 फीसदी धनराशि 39.26 लाख रुपए बैंक ऋ ण के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी। योजना लागत के 75 फीसदी पर या लाभार्थी द्वारा बैंक से प्राप्त ऋ ण पर जो भी कम हो 12 फीसदी ब्याज की दर से अधिकतम 14.14 लाख रुपए की धनराशि की प्रतिपूर्ति 5 वर्षों (60 माह) तक प्रदेश सरकार द्वारा की जायेगी।

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