कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने की चुनौती

पिछले साल के रिकॉर्ड तो यही कहते हैं कि पुलिस पर अपराधी भारी रहे। पुलिस अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम रही। कई ऐसी वीभत्स घटनाएं हुईं जिसने राजधानी को हिला कर रख दिया। लोग दहशत में आ गए। किसी को दिनदहाड़े गोली मारी गई तो किसी के घर में घुसकर पूरे परिवार की नृशंस हत्या कर दी गई।

sanjay sharma editor5कल जावीद अहमद ने उत्तर प्रदेश के पुलिस मुखिया का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने अपनी प्राथमिकता में बेहतर पुलिसिंग और विभाग की छवि खराब करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित करना गिनाया। यह सौ फीसदी सही है कि प्रदेश में पुलिस की छवि बहुत खराब हो गई है। जिस तरह से जनता को पुलिस पर भरोसा करना चाहिए उस तरह से भरोसा नहीं कर पा रही है। जनता बहुत ही मजबूरी मेंं ही पुलिस के पास जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि पुलिस जनता का सहयोग नहीं कर रही है। भ्रष्टïाचार चरम पर है। बिना लेन-देन के एफआईआर तक दर्ज नहीं होती। यदि पिछले साल हुई घटनाओं पर नजर डालें तो स्पष्टï दिखता है कि पुलिस रक्षक कम भक्षक की भूमिका में ज्यादा रही है।
कई ऐसी घटनाएं हुईं जिसने खाकी को शर्मशार करने का काम किया। पिछले साल महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाएं ज्यादा हुईं। महिलाएं न घर में सुरक्षित रहीं और न ही बाहर। और तो और न्याय के लिए पुलिस के पास गई तो वहां भी उन्हें शर्मशार होना पड़ा। कई थानों में महिलाओं के साथ दुराचार करने की कोशिश की गई। कई पीडि़त महिलाओं को थानों से भगाया गया। न तो उनकी सुनवाई हुई और न ही उन्हें न्याय मिला। पिछले साल के रिकॉर्ड तो यही कहते हैं कि पुलिस पर अपराधी भारी रहे। पुलिस अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम रही। कई ऐसी वीभत्स घटनाएं हुईं जिसने राजधानी को हिला कर रख दिया। लोग दहशत में आ गए। किसी को दिनदहाड़े गोली मारी गई तो किसी के घर में घुसकर पूरे परिवार की नृशंस हत्या कर दी गई। यदि ऐसी घटनाएं होती हैं तो निश्चित ही यह पुलिस की निष्क्रियता की वजह से ही है। पुलिस के ढुलमुल रवैये की वजह से ही अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। आए दिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठती है। ऐसे में प्रदेश के नए डीजीपी के सामने कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की बड़ी चुनौती है। पुलिस को रक्षक की भूमिका के लिए तैयार करना इतना आसान नहीं है। लोगों में पुलिस की अच्छी छवि पेश करना और आम जनता को सुरक्षा का एहसास दिलाना आवश्यक है। इसको ध्यान में रखकर सूबे के मुखिया को योजनाबद्ध ढंग से कठोर कदम उठाने होंगे। पुलिस की साख को बट्टïा लगाने वालों की पहचान करनी होगी। उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी और आम जनता के साथ मित्रवत व्यवहार कर उनका सहयोग और समर्थन हासिल करना होगा।

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