कांग्रेस के ‘इंसाफ के तराजू’ पर कितना फिट बैठेंगे राज बब्बर

  • राहुल बनाना चाहते थे जितिन प्रसाद को अध्यक्ष मगर प्रियंका गांधी के वीटो ने दिलाई राज बब्बर को कुर्सी
  • प्रियंका गांधी ने कहा कि वह प्रचार करें उसके लिए तेज तर्रार अध्यक्ष का होना है जरूरी
  • कांग्रेस में चर्चा राज बब्बर को आगे करने से क्या राहुल गांधी को किया गया किनारे
  • प्रियंका और बब्बर की जोड़ी से जगी लोगों की उम्मीदें
  • कांग्रेस को इस पुराने हीरो से नए जादू की बहुत उम्मीद

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Raj-Babbarलखनऊ। इंसाफ का तराजू फिल्म के खलनायक राज बब्बर से कांग्रेस की बहुत उम्मीदें जुड़ गई हैं। कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी को लगता है कि वह एक नायक की तरह कांग्रेस को आगे ले जायेंगे। उनकी इसी उम्मीद ने पहली बार राहुल गांधी की इच्छा को किनारे कर दिया है। राहुल गांधी हर कीमत पर जितिन प्रसाद को अध्यक्ष बनाना चाहते थे। मगर प्रियंका ने साफ कर दिया कि अगर उनसे प्रचार करने की उम्मीद की जा रही है तो राज बब्बर को अध्यक्ष बनाना ही होगा। वेंंटीलेटर पर चल रही कांग्रेस के पास प्रियंका गांधी के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था, लिहाजा प्रियंका की बात मानी गई और राज बब्बर कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए।
कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से कांग्रेस में खेमेबंदी चल रही थी। बार-बार कई गुटों के नाम सामने आ रहे थे मगर कोई फैसला नहीं हो पा रहा था। बार-बार प्रदेश अध्यक्ष का नाम उछलने से नाराज निर्मल खत्री ने कांग्रेस की बैठकों में आना भी कम कर दिया था। अध्यक्ष कौन बने इसको लेकर चल रही गुटबाजी आखिर कल खत्म हो ही गई।
लंबी जद्दोजहद के बाद ऐसे नाम का चयन किया जो अपने तीखे तेवर और जुझारूपन के लिए चर्चित हैं। राज बब्बर में संघर्ष की क्षमता है और यह उन्होंने कई बार सिद्ध भी की है। कांग्रेस भले ही कहे कि वह भाजपा को रोकने की तैयारी में जुटी है, मगर हकीकत में उसका निशाना सपा और बसपा से अपने पंरपरागत वोट बैंक को छीनना है। इसीलिए राज बब्बर की ताजपोशी की गई है। राज बब्बर वीपी सिंह के साथ लंबे समय तक आंदोलन कर चुके हैं और अमर सिंह के लिए दलाल संस्कृति जैसे शब्द कह कर सपा से बाहर भी किए जा चुके हैं।
आमतौर पर अध्यक्ष को ही अपनी टीम चुनने का अधिकार होता है। मगर अध्यक्ष के साथ अपनी जहरीली जबान के लिए चर्चित हुए इमरान मसूद जैसे नेता को उपाध्यक्ष बनाकर कांग्रेस हाईकमान ने साफ कर दिया है कि राज बब्बर को सब कुछ अपने मन का चुनने की आजादी नहीं रहेगी। इमरान मसूद के बहाने कांग्रेस मुस्लिमों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहती है।
राजबब्बर के लिए यह बड़ी चुनौती है कि जब चुनाव में सिर्फ कुछ महीने ही बचे हैं ऐसे में उन्हें ऐसे राज्य की कमान दी गई है, जहां कांग्रेस की हालत बेहद खराब है। अब अगर राज बब्बर और प्रियंका गांधी की जोड़ी कांग्रेस को 50 सीटे भी दिलाने की स्थिति में आ गई तो यह कांग्रेस के लिए लॉटरी लगने जैसी स्थिति हो जाएगी।

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