कांग्रेसियों के सवालों में उलझे ‘पीके’ कार्यकर्ताओं ने पूछा कौन होगा सीएम का चेहरा

  • प्रियंका की हां का इंतजार अभी पीके को भी है
  • प्रशांत ने जानीं पार्टी की कमजोरियां
  • कार्यकर्ताओं से सीधा-संवाद बना प्रशांत तय करेंगे रणनीति

अजय कुमार पांडेय
Captureलखनऊ। कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके शुक्रवार को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से मुखातिब हुए। कार्यकर्ताओं के पास सवालों की लंबी सूची थी। एक के बाद एक सवालों के तीर पीके को उनकी रणनीति साफ करने के लिए छोड़े जा रहे थे। कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बैठक के दौरान पीके को कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। लेकिन सीएम के चेहरे वाले सवाल पर पीके की गाड़ी आकर रुक गए। ऐसे में पीके के सामने सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा है।
चुनाव प्रचार का मंत्र देने पहुंचे प्रशांत से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पूछा कि बिना मुख्यमंत्री चेहरे के वे विधान सभा चुनाव लड़ेंगेे कैसे। इस सवाल पर पीके ने चुप्पी साध ली। प्रशांत किशोर ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत प्रियंका को यूपी में आगे लाने की वकालत की थी। जिसके तहत प्रियंका को सक्रिय राजनीति में उतरने की बात तेजी से फैली। प्रशांत की यह रणनीति पार्टी में जान फूंकने के तहत बनाई गई थी। लेकिन अभी तक खुद प्रशांत इस सवाल पर प्रियंका के उत्तर का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी को अभी प्रियंका के राजनीति में उतरने पर फैसला लेना है।
पीके से सवाल जवाब के तहत कार्यकर्ताओं ने प्रशांत को जमीनी हकीकत से रूबरू कराया। बहराइच के एक कार्यकर्ता के सवाल से प्रशांत की मुश्किल बढ़ती दिखाई दी जब कार्यकर्ता ने 30 साल से यूपी में सत्ता से दूर रहने और किसी बड़े चेहरे के नहीं होने की बात उठाई। कार्यकर्ताओं में बड़ा सवाल यही था कि पार्टी के पास कोई बड़े कद का नेता नहीं है जो यूपी को नई दिशा दिखा सके। ऐसे में जब हम फील्ड में जाते हैं तो हम लोगों से क्या कहें? कौन हमारा नेता होगा? लोगों के लिए क्या काम करेगा? ऐसे तमाम सवालों के जवाब कार्यकताओं को खुद खोजने पड़ते हैं या बगले झांकने को मजबूर होना पड़ता है। प्रदेश की दूसरी पार्टियों में ऐसा नहीं है। सपा-बसपा में सीएम कैंडिडेट पहले से पता है। वहीं पार्टी के सीतापुर के रवि वर्मा ने जोर देकर कहा कि पार्टी को जल्द से जल्द मौर्या, ब्राह्मण किसी को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना होगा। जिससे समुदाय और जाति में अपनी पकड़ बनाई जा सके।
इससे पहले कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गुरुवार को लखनऊ में अपने शुरुआती दौरे में कार्यकर्ताओं को अपने इलाकों में जाकर अपने क्षेत्रों में पार्टी संगठन को विस्तार देने की सीख दी। प्रशांत ने कांग्रेसियों से कहा कि आपको सीटों के फेर में नहीं पडऩा है बल्कि इन सबको भूलकर सिर्फ एक बात याद रखनी है कि हमको यूपी में इस बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत ने अपनी बैठक में कार्यकर्ताओं से चुनावी जीत के लिए सुझाव भी मांगे। वह सुझावों को नोट करते भी दिखे। इतना ही नहीं प्रशांत ने यह साफ जता दिया कि पार्टी उन्हें ही तरजीह देगी जो जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ सकेगा। इसके लिए पीके ने कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए कड़ी मेहनत करने की अपील की।
प्रशांत किशोर के साथ ही उनकी पूरी टीम, कांग्रेस के यूपी प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री,प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री और कांग्रेस के सभी राष्ट्रीय सचिव भी शामिल हुए। पहले दिन गांधी भवन में हुई बैठकों में कार्यकर्ताओं में पूरा जोश देखने को मिला।
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों,प्रदेश पदाधिकारियों,लोकसभा और विधानसभा अध्यक्षों ने पार्टी को मज़बूती दिलाने के लिए कई सुझाव दिए। वहीं अनुसूचित जाति जनजाति विभाग, ज़िला कमेटियों, ब्लॉक अध्यक्षों और आरक्षित विधानसभाओं के महत्वपूर्ण नेताओं की बैठक के ज़रिए भी पार्टी दलितों के बीच अपनी पकड़ बनाने में जुटी है। इस बैठक के बीच मीडिया ने प्रशांत किशोर से बात करनी चाही लेकिन प्रशांत ने कहा कि वो पार्टी की रणनीति को सार्वजनिक नहीं कर सकते। वहीं अध्यक्ष निर्मल खत्री ने कहा कि उनकी पार्टी पीके के साथ मिलकर विधान सभा चुनाव में जीत की बेहतरीन योजना बना रही है। जिसके नतीजे चुनाव में ही सामने आएंग।े

वक्त से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहते प्रशांत किशोर
प्रशांत के लखनऊ दौरे का पूरा लब्बोंलुआब यही रहा कि वह पार्टी के कमजोरियों का पता कर सकें। इसके लिए बाकायदा उन्होंने संगठन से लगाए कार्यकर्ताओं को पूरी छूट दी। जिससे सारा मामला ऊपर आ सके। यह कुछ उसी तरह है जैसे दही से घी निकालने की प्रक्रिया की जाती है। लेकिन इन बैठकों का यक्ष प्रश्न यही रहा कि घी निकालने की वह मथानी क्या होगी। जिसका जवाब अभी फिलहाल प्रशांत किशोर नहीं दे पाए। जाहिर है प्रशांत किशोर की रणनीति का यह हिस्सा हो या वह वक्त से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहते हों। लेकिन बड़ा सवाल कांग्रेसी कार्यकर्र्ताओं का यही रहा कि सीएम क ाचेहरा क्या प्रियंका गांधी होंगी या कोई और, क्योंकि कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर जवाब भी देने हैं।

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