कहीं मौन, कहीं मुखरता

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना के हिंदुओं के हालात आज वैसे ही हो गए हैं, जैसा कि 90 के दशक में कश्मीर में रह रहे ब्राह्मïणों के थे। उस समय भारी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घर से बेघर कर दिया गया था और आज यूपी के कैराना के हिंदू भी अपना घर-बार छोडक़र पलायन करने को मजबूर हैं। कैराना के लगभग 346 हिंदू परिवारों को एक जाति विशेष के लोंगो की गुंडागर्दी और जबरन वसूली की धमकियों के कारण कैराना छोडऩा पड़ा है। कोई इसे कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला भी कह सकता है, लेकिन यह बात तथ्यों के आधार पर समझी जाये तो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कैराना में 30 प्रतिशत हिंदू थे, जबकि मुसलमानों की जनसंख्या 68 प्रतिशत थी। अब यहां 8 फीसदी हिंदू रह गए हैं, जबकि यहां 92 फीसदी जनसंख्या मुसलमानों की है।

ajay kumarअजय कुमार
पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निकटता वहां के आतंकवादियों को रास नहीं आ रही है। शायद इसी लिये अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से संदिग्ध आंतकवादियों ने एक भारतीय महिला का उसके ऑफिस के सामने से अपहरण कर लिया ताकि भारत को सबक सिखाया जा सके। बांग्लादेश में संदिग्ध इस्लामी कट्ïटरपंथियों ने एक आश्रम में 40 वर्षों से काम करने वाले बुजुर्ग निरंजन पांडेय की हत्या कर दी। मुस्लिम बाहुल्य देश में अल्पसंख्यक समुदाय के वह ऐसे चैथे शख्स हैं ,जिनकी हाल में हत्या की गई है। मलेशिया में पेनांग प्रांत में गत दिनों एक हिंदू मंदिर श्री धर्म मुनिश्वरर को पूरी तरह से खंडहर में तब्दील कर दिया। इससे पहले भी यहां एक मंदिर को निशाना बनाया गया था। मंदिर पर हमले की वजह हिन्दुओं से नफरत बताया जा रहा है। मलेशिया में भी हिन्दू आबादी अल्पसंख्यक है। यह सभी घटनाएं एक ही दिन अखबार की सुर्खियां बनीं। मुस्लिम बाहुल्य देशों में हिन्दुओं पर अत्याचार की न तो यह पहली घटनाएं थीं न आखिरी। हमेशा ही हिन्दुओं के उत्पीडऩ, अत्याचार, हिन्दू लड़कियों के साथ बलात्कार, बलात धर्म परिर्वतन कराके शादी कर लेने की खबरें आती रहती है। पाकिस्तान में तो हिन्दुओं पर अत्याचार का इतिहास काफी लम्बा और डरावना है। इसी वजह से वहां अब हिन्दुओं की आबादी खत्म होने को है।
उक्त देश हिन्दुस्तान के पड़ोसी मुल्क है। यहां से अल्पसंख्यकों (हिन्दुओं) पर अत्याचार की खबरें आती हैं तो दुख होता है। भारत सरकार ऐसे मामलों में कभी गंभीर तो कभी सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त करती है। भारत सरकार की अपनी मजबूरी है, लेकिन उन मुल्कों की सरकारों के हाथ क्यों बंधे रहते हैं जिनके ऊपर आम जनता के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी रहती है। शायद इन देशों में भी वोट बैंक की राजनीति और छद्म धर्मनिरपेक्षता हावी रहती होगी, जैसी सियासत हिन्दुस्तान में देखने को मिलती है। मुस्लिम बाहुल्य मुल्कों में जो कुछ हिन्दुओं के साथ हो रहा है, वह तो दुखदायी है ही उससे भी ज्यादा दुख तब होता है जब यह खबरें आती हैं कि हिन्दुस्तान में भी हिन्दुओं को अपनी जानमाल की सुरक्षा के लिये पलायन करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना के हिंदुओं के हालात आज वैसे ही हो गए हैं, जैसा कि 90 के दशक में कश्मीर में रह रहे ब्राह्मïणों के थे। उस समय भारी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घर से बेघर कर दिया गया था और आज यूपी के कैराना के हिंदू भी अपना घर-बार छोडक़र पलायन करने को मजबूर हैं। कैराना के लगभग 346 हिंदू परिवारों को एक जाति विशेष के लोंगो की गुंडागर्दी और जबरन वसूली की धमकियों के कारण कैराना छोडऩा पड़ा है। कोई इसे कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला भी कह सकता है, लेकिन यह बात तथ्यों के आधार पर समझी जाये तो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कैराना में 30 प्रतिशत हिंदू थे, जबकि मुसलमानों की जनसंख्या 68 प्रतिशत थी। अब यहां 8 फीसदी हिंदू रह गए हैं, जबकि यहां 92 फीसदी जनसंख्या मुसलमानों की है। कैराना मुजफ्फरनगर के पास स्थित है। जहां 2013 में दंगा हुआ था। कैराना में उन लोगों को जान बूझकर घर छोडऩे पर मजबूर किया गया जो लोहा, सर्राफा और हार्डवेयर के व्यापार से जुड़े थे। पहले उनसे जबरन वसूली की गई और बाद में घर छोडऩे पर मजबूर किया गया। यहां के पुराने नुमांइदे बताते हैं कि गांव जहानपुरा में पहले 60 हिंदू परिवार थे। अब यहां एक भी हिंदू परिवार नहीं है। पंजीठ से भी कई परिवार पलायन कर चुके हैं। पंजीठ गांव से पलायन रोकने के लिए क्षेत्रीय सांसद हुकुम सिंह स्वयं प्रयासरत हैं। उन्होंने जिले के हालात को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पिछले दिनों अपनी मुलाकात का जिक्र भी किया। कैराना के सांसद ने 10 ऐसे लोगों की सूची भी जारी की जिनकी हत्या रंगदारी न देने पर कर दी गई। कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबरों पर भाजपा नेताओं की मुखरता को अखिलेश सरकार चुनावी वर्ष में बीजेपी की ड्रामेबाजी बता रही है।
वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबरें आने के बाद लंबे समय तक मौन साधे रही अखिलेश सरकार को जब लगा कि पानी सिर से ऊपर जा रहा है तो उसने जिला प्रशासन को मामला संज्ञान में लेने को कहा। इसके बाद शमली जिले के जिला मजिस्टे्रट ने एसडीएम और एसपी सिटी के नेतृत्व में जांच दल गठित कर दिया। मानवाधिकार आयोग ने भी पलायन की खबरों को संज्ञान में लेते हुए अखिलेश सरकार से जबाव तलब किया। कैराना में सांसद हुकुम सिंह के बयान की सत्यता की जांच के लिए पुलिस और खुफिया विभाग भी सक्रिय हो गया है। दो साल की वोटर लिस्ट खंगाली जा रही है, जिसमें पता लगाया जाएगा कि क्या कैराना से लोगों ने वास्तव में पलायन किया है। स्थानीय लोगों से भी पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कैराना से कितने लोग गए और जाने का क्या कारण रहा। दरअसल, भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने बयान दिया था कि कैराना से दो साल के भीतर 250 हिंदू परिवारों ने पलायन कर दिया है। पलायन का कारण कैराना और आसपास क्षेत्र में बढ़ते अपराध, अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल बताया था। साथ ही कहा था कि कश्मीर की तर्ज पर कैराना में साजिश के तहत हिंदुओं के साथ आपराधिक वारदातों की जा रही हैं, जिसमें पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। यह भी आरोप लगाया था कि गुंडागर्दी करने वालों को सपा नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। वहीं बीजेपी की प्रदेश इकाई भी पूरे मामले की जांच अपने स्तर से कर रही है।
उधर, यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह तथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस संबंध में कई तीखे सवाल किएं। उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती तथा कांग्रेस से भी इतनी गंभीर समस्या पर चुप्पी का कारण पूछा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा मुख्यमंत्री जी कृपा करके प्रदेश के व्यापक हित में सोचिए। महज वोट की राजनीति से प्रभावित नीति से जहां कैराना का हिन्दू समुदाय लगातार पलायन कर रहा है तथा भयग्रस्त है। इससे समाज का व्यापक अहित होगा। यह भी खबरें हैं कि कैराना अवैध हथियारों का केन्द्र बनता जा रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दल वहां जाकर पूरी स्थित का जायजा लेगा तथा पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए जन आन्दोलन करेगा।
बहरहाल, हिन्दुओं के पलायन की खबरों को बीजेपी का सियासी ड्रामा बता कर अनदेखा नहीं किया जा सकता है। हो सकता है बीजेपी नेताओं ने मामले को ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित कर दिया हो, लेकिन जनसंख्या के आंकड़ों को तो अनदेखा नहीं किया जा सकता है। यहां लगातार हिन्दुओं की आबादी का प्रतिशत घट रहा है। कैराना में पलायन के बाद बंद पड़े घर अपने भीतर कई दर्द समेटे नजर आते है।

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