कहीं मरीजों पर भारी न पड़े केजीएमयू की लापरवाही

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। इंसेफ्लाइटिस एक बार फिर राजधानी सहित पूरे प्रदेश में कहर मचा सकती है। पूर्वांचल मेें यह बीमारी पहले ही तबाही मचा चुकी है। इसके बावजूद केजीएमयू प्रशाासन इंसेफ्लाइटिस जैसी असाध्य बीमारी के रोगियों के इलाज के लिए मशीनेें नहीं खरीद रहा है। जबकि इन मशीनों को खरीदने के लिए एनएचएम की ओर से केजीएमयू प्रशासन को 5 करोड़ रुपये का बजट पहले ही जारी किया जा चुका है।
राजधानी समेत पूरे प्रदेश में प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में लोग जापानी इन्सेफ्लाइटिस व एक्यूट इन्सेफ्लाइटिस का शिकार होते हैं। जिनमें से अधिकांश रोगियों को मौत हो जाती है, वहीं कुछ रोगी जिनकी जान बच जाती है उनमें ऐसी शारीरिक विकृतियां आ जाती हैं जिनसे उनका जीवनयापन कठिन हो जाता है। जापानी इन्सेफ्लाइटिस व एक्यूट इन्सेफ्लाइटिस सिंड्रोम के कहर के चलते राजधानी के केजीएमयू में प्रतिवर्ष जुलाई से अक्टूबर माह के बीच लगभग सैकड़ों मरीजों को भर्ती किया जाता है। इन मरीजों में बाल रोगियों की संख्या अधिक होती है। विशेषज्ञों की मानें तो ‘जेई’ के शिकार अधिकांश मरीजों की मौत हो जाती है लेकिन जो मरीज बच जाते हैं उनमें कई तरह से शारीरिक विकलांगता आ जाती है। इस बीमारी में रोगी के दिमाग का काफी हिस्सा प्रभावित हो जाता है, क्योंकि हर अंग दिमाग द्वारा ही संचालित होता है इसलिए शरीर के कई अंगों में एक साथ असमानता आ जाती है। इससे रोगी की आवाज चली जाती है, चलने की गति व तरीका प्रभावित होता है, हाथ पैरों में अकडऩ, मांसपेशियों की परेशानी व कई गंभीर विकृतियां हो जाती हैं। इनके इलाज के लिए रोगी को केजीएमयू के न्यूरोलॉजी, पीड्रियाटिक्स व लिम्ब सेन्टर में रिफर किया जाता है। ऐसे रोगियों के लिए कुछ विशेष प्रकार की मशीनों की आवश्यकता पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जेई से प्रभावित रोगियों के इलाज में उनकी बीमारी व शरीरिक अक्षमता को पहचानना सबसे बड़ी चुनौती होती है जो अत्याधुनिक मशीनों से ही संभव है। इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है।

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