कहीं जश्न, कहीं सन्नाटा

इस चुनाव में सबसे ज्यादा कोई खुश है तो वह है बीजेपी। असम की जीत ने बीजेपी के घाव पर मरहम का काम किया है। लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में बीजेपी को हार मिली थी, जिसकी वजह से भाजपा नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठने लगे थे। असम की जीत और केरल में खुले खाते, पश्चिम बंगाल में सीटों में बढ़त से बीजेपी खेमे में उत्साह का माहौल है।

sanjay sharma editor5भारतीय राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। खासकर यह चुनावों में ज्यादा लागू होता है। किसको जीत मिल जाए और और किसी हार, कहा नहीं जा सकता है। कल पांच राज्यों के चुनावी परिणाम घोषित हुए। चुनावों से पहले अनेक एक्जिट पोल के नतीजे सामने आए थे लेकिन चुनावी परिणाम के बाद अलग ही नजारा देखने को मिला। जिसकी सत्ता में वापसी की उम्मीद कम थी उसे जनता का पूर्ण जनादेश मिला। जनता ने असम और केरल ने बदलाव का रास्ता चुना तो वहीं तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने वर्तमान सरकार में ही विश्वास जताया। परिणाम आने के बाद कहीं जश्न का माहौल दिखा तो कहीं सन्नाटा पसरा रहा। सबसे ज्यादा सन्नाटा कांग्रेस दफ्तरों में दिखा। हार का असर राज्यों के अलावा दिल्ली में भी दिखा। निश्चित ही कांग्रेस की इतनी बुरी हालत कभी नहीं हुई। दो राज्यों, केरल और असम में जहां उसकी सरकार थी, वहां वह डूब गई। बंगाल और तमिलनाडु में उसने जिसका हाथ पकड़ा, उसे डुबा दिया। असम में 15 साल से कांग्रेस सरकार चला रही थी और केरल में भी कांग्रेस की ही सरकार थी। कांग्रेस को सिर्फ पुडुचेरी में राहत मिली है। लेकिन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की प्रतिष्ठïा को लगभग डुबाने का काम किया है। जिस तरह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का सफाया हुआ था, वैसा ही कुछ इस विधानसभा चुनाव में दिखा।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा कोई खुश है तो वह है बीजेपी। असम की जीत ने बीजेपी के घाव पर मरहम का काम किया है। लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में बीजेपी को हार मिली थी, जिसकी वजह से भाजपा नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठने लगे थे। असम की जीत और केरल में खुले खाते, पश्चिम बंगाल में सीटों में बढ़त से बीजेपी खेमे में उत्साह का माहौल है। निश्चित ही इस जीत ने जोश बढ़ाने का काम किया है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को जनादेश मिला है। निश्चित ही उनके दोबारा सत्ता में आने से उनका कद बढ़ा है। वहीं तमिलनाडु में जयललिता ने एक्जिट पोल के नतीजों को फेल करते हुए फिर सत्ता में वापसी की। जयललिता ने तमिलनाडु में इतिहास बनाने का काम किया है। रामचंद्रन के बाद तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार कोई सरकार दोबारा सत्ता में आई है। ऐसे में जयललिता खेमे में उत्साह का माहौल होना वाजिब है।

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