कहीं ख़ुशी, कहीं गम

– मुजाहिद जैदी
Captureलखनऊ। ‘हमसे का भूल हुई जो ई सजा हमका मिली’ राजेश खन्ना की फिल्म जनता हवलदार का ये गाना यूपी के सिंगल सिनेमा हाल के मालिक इन दिनों हर वक्त गुनगुना रहे हैं और ऐसा हो भी क्यों न जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निर्माताओं को करोड़ों रुपये का अनुदान दे रही है। साथ ही यूपी में दो नई फिल्म सिटी बनाने की भी घोषणा की गई है। लेकिन सूबे में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर खस्ताहाल होते जा रहे हैं। एक तरफ सरकार बॉलीवुड को यूपी में उतारने की तैयारी में जुटी है तो वहीं प्रदेश के सिंगल स्क्रीन सिनेमाहॉल सरकारी मदद की बाट जोह रहे हैं!
यूपी सरकार ने जो नई फिल्म नीति बनाई है उसमें सारा फोकस निर्माता निर्देशकों को बेहतर सुविधाएं देने पर है। उत्तर प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग करने वाले डायरेक्टर को फिल्म की लागत का 25 फीसदी खर्च अनुदान के रूप में दिया जा रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान शायद यूपी में लगातार बंद होते जा रहे सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की तरफ नहीं गया है और अब सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से जुड़े लोग भी ये मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी सरकारी मदद मिलनी चाहिए। क्योंकि यूपी सरकार जो अनुदान फिल्म निर्माताओं को दे रही है वो पैसा तो इन सिनेमाहॉल की कमाई से ही सरकार के खजाने में जुटा है। क्योंकि यूपी के हर सिंगल स्क्रीन सिनेमाहॉल में बिकने वाले प्रत्येक टिकट पर 50 पैसा फिल्म विकास निधि के नाम पर सरकारी खजाने में जाता है और इसके बदले में इन सिनेमाघरों को कुछ भी नहीं मिलता है।
क्या कहते हैं आंकड़े
साल 2000 तक उत्तर प्रदेश में तकरीबन 1000 सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर हुआ करते थे, लेकिन धीरे-धीरे ये सिनेमाघर बंद होते चले गये और इनकी संख्या घटकर 350 के आसपास रह गई है। वहीं अगर राजधानी लखनऊ की बात करें तो यहां एक समय तकरीबन 29 सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर हुआ करते थे जिनमें से 19 टॉकीज बंद हो गये। जिनमें कैपिटल, स्वरूप, मेफेयर, ओडियन, प्रकाश जैसे हॉल शामिल हैं। वहीं बदलते वक्त के साथ साथ अब मल्टीप्लेक्स से मुकाबला करने के लिए कई सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों को तोडक़र वहां भी मल्टीप्लेक्स बनाने की तैयारी की जा रही है। जिनमें लीला और उमराव टॉकीज शामिल हैं।
अब इन्हें नये ढंग से बनाया जा रहा है। लगातार खर्च बढऩे और आमदनी घटने से सिनेमाहॉल के कारोबार से जुड़े लोग कह रहे हैं कि अगर ऐसा ही रहा तो टॉकीज में काम करने वाले भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे और जब फिल्म दिखाने के लिए सिनेमाहॉल ही नहीं होंगे तो फिल्में बनने के बाद रीलीज कहां होंगी। साथ ही उनका ये भी कहना है कि पूरे देश में सबसे ज्यादा मनोरंजन कर यूपी सरकार सिनेमाहॉल मालिकों से लेती है। यहां मनोरंजन कर 40 फीसदी है। जबकि मल्टीप्लेक्स वालों को पांच साल तक टैक्स में सरकार छूट देती है और अब सिंगल स्क्रीन सिनेमाहॉल वाले भी सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी टैक्स में पूरी तरह से रियायत दी जाए। जिससे इस लगातार बंद होते इन टॉकीज को बचाया जा सके।
उत्तर प्रदेश ने फिल्म इंडस्ट्री को तमाम नामचीन कलाकार दिये हैं और अब सरकार की कोशिश ये है कि यूपी का बॉलीवुड में दबदबा हो और मुंबई से लोग फिल्म बनाने के लिए उत्तर प्रदेश आएं। लेकिन इसके साथ साथ जरूरत इन सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों को भी बचाने की है।

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