कहां गई एंबुलेंस, टेम्पो में ढोये जा रहे शव

कहां गई एंबुलेंस, टेम्पो में ढोये जा रहे शव

मोर्चरी में गंदगी में रखे जा रहे हैं शव
गेट पर सेनेटाइजर तक की व्यवस्था नहीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कोरोना संकट काल में आम आदमी को सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य सेवाओं को दुरस्त करने के स्पष्टï निर्देश दे रखे हैं। मगर अधिकारी है कि कान में तेल डालकर बैठे हैं। पूरा सरकारी सिस्टम चरमरा चुका है। आमजनता को किसी भी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
इसका ताजा उदाहरण केजीएमयू स्थित मोर्चरी में देखने को मिला। जहां एंबुलेंस न मिलने के कारण शव को टेम्पो से ले जाते लोग दिखे। पीपीई किट पहने अस्पतालकर्मी डेडबॉडी को टेम्पो में लदवाते नजर आए। मोर्चरी में पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए टेम्पो में रखकर बैकुंठधाम शव भेजे जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह आज का नहीं रोज का हाल है। इससे अंदाजा लगाइए कि सरकारी तंत्र कितना लापरवाह है। अस्पताल व मोर्चरी में शवों को रखने तक की व्यवस्था नहीं। स्थिति यह है कि कई बार पता हीं नहीं चलता है कि यह डेडबाडी कोराना संक्रमित है या सामान्य शव है। कोरोना काल में एक तरफ अस्पतालों में एंबुलेंस न मिलने से मरीजों की जान जा रही है तो दूसरी ओर शवों को ऑटो-टेम्पो में ढोया जा रहा है। केजीएमयू स्थित मोर्चरी में टेम्पो के जरिए शवों को बैकुंठधाम ले जाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि टेम्पो में रोजाना सैकड़ों सवारियां सफर करती हैं। शव को रखने के बाद टेम्पो का न तो सेनेटाइजेशन किया जाता है और न ही उसकी धुलाई कराई जाती है। इस प्रकार की लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार खुले में ही संक्रमण फैला रहे हैं। वहीं मोर्चरी के बाहर गंदगी पसरी हुई है। गेट पर सेनेटाइजर तक की व्यवस्था नहीं है। गंदगी का आलम यह है कि जिस स्थान पर बॉडी को रखा जाता है वहां पॉलीथीन का ढेर लगा हुआ है। संक्रमण मोर्चरी में भी घुस सकता है। मगर स्वास्थ्य महकमा कोविड-19 को लेकर सरकार द्वारा जारी की गई गाइडलाइन को दरकिनार कर रहा है। पीपीई किट खुले में छोड़ दी जाती हैं, जिससे शव के परिजनों को संक्रमण का भय बना रहता है। मोर्चरी में सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर भी सावधानी नहीं बरती जा रही है।

शवों को कूड़े की तरह रखा जा रहा
शव का पोस्टमार्टम करने के बाद शवों को गंदगी में रखा जा रहा है। इसके अलावा मोर्चरी में सेनेटाइजर व मास्क तक की कोई व्यवस्था नहीं है। शव को टेम्पो में कूड़े की तरह फेंकने के बाद बैंकुण्ठधाम पहुंचाया जा रहा है। हालांकि टेम्पो में कोई व्यक्ति नहीं बैठता, लाश अकेले ही रखकर भेज दी जाती है। आसपास के लोगों का कहना है कि यह प्रतिदिन का काम है। यहां कोरोना का किसी को खौफ नहीं है।

खुले में रख दिए पीपीई किट
मोर्चरी के अंदर घुसते ही सामने खुले में कूड़ेदान रखे जाते हैं। इन कूड़ेदान में पीपीईकिट खुले में पड़ी रहती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इतना ही नहीं शवों को रखने वाले स्थानों पर गंदगी पसरी रहतीं, रोजाना सफाई खानापूर्ति के नाम पर की जाती है।
उसी टेम्पो में सफर भी करते हैं यात्री
टेम्पो में रोजाना सैकड़ों लोग सफर करते हैं और इन्हीं में शवों को रखा जा रहा है। टेम्पो न तो सेनेटाइज होता है और नहीं इसकी सफाई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही पर रोक लगा देनी चाहिए सरकार को। लेकिन जिम्मेदार है कि इस तरह की हरकतों से बाज ही नहीं आते, जो कि बेहद चिंताजनक है।

दावे जो भी कर लिए जाएं। सरकार बेशक बदल जाए लेकिन सिस्टम ने मानो तय कर लिया है कि वह नहीं सुधरेगा।

अभी चार्ज संभाला है। अगर ऐसा है तो मामले की पूरी जांच होगी। अस्पताल के कर्मचारियों को गाइडलाइन व रूल्स फॉलो करने चाहिए। वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
एमके. सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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